नई दिल्ली/वॉशिंगटन: अमेरिका ने भारत से आयात होने वाले सोलर पैनलों और सोलर सेल्स पर 126 फीसदी की शुरुआती ड्यूटी लगाने का फैसला किया है। यह कदम अमेरिकी वाणिज्य विभाग की प्रारंभिक जांच के बाद उठाया गया है, जिसमें आरोप लगाया गया है कि भारत अपने सोलर निर्माताओं को अनुचित सब्सिडी दे रहा है, जिससे अमेरिकी घरेलू कंपनियों को नुकसान हो रहा है।
अमेरिका के इस फैसले का सीधा असर भारतीय सोलर निर्यातकों पर पड़ने वाला है। 126 फीसदी ड्यूटी का मतलब है कि भारतीय सोलर पैनलों की कीमत अमेरिका में दोगुनी से भी ज्यादा हो जाएगी। ऐसे में अमेरिकी खरीदार भारतीय उत्पादों के बजाय स्थानीय कंपनियों या अन्य देशों से सोलर पैनल खरीदना पसंद कर सकते हैं। इससे भारतीय कंपनियों की प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति कमजोर पड़ सकती है।
अन्य देशों पर भी कार्रवाई
भारत के अलावा लाओस और इंडोनेशिया पर भी 81 फीसदी से 143 फीसदी तक की लेवी लगाई गई है। हालांकि, यह फैसला अभी प्रारंभिक जांच के आधार पर लिया गया है। अंतिम निर्णय 6 जुलाई को आने की संभावना है। यदि जांच में सब्सिडी के आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह ड्यूटी स्थायी रूप से लागू की जा सकती है।
ट्रंप टैरिफ से अलग है यह फैसला
यह नया टैक्स उस 10 फीसदी ग्लोबल टैरिफ से अलग है, जिसकी घोषणा हाल ही में अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति Donald Trump ने की थी। गौरतलब है कि पिछले सप्ताह Supreme Court of the United States ने ट्रंप के पुराने टैरिफ प्लान को रद्द कर दिया था, जिसके बाद नए सिरे से टैरिफ लागू किए गए।
अब इस ताजा फैसले से वैश्विक सोलर इंडस्ट्री में हलचल बढ़ गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह ड्यूटी स्थायी हो जाती है, तो भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों पर भी इसका असर पड़ सकता है और सोलर सेक्टर में वैश्विक सप्लाई चेन में बदलाव देखने को मिल सकता है।











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