Central Bureau of Investigation की विशेष अदालत ने 56 आरोपियों को किया बरी
पंचकूला। जाट आंदोलन के दौरान हरियाणा के तत्कालीन वित्त मंत्री Captain Abhimanyu के घर में आगजनी मामले में आज बड़ा फैसला आया। पंचकूला स्थित हरियाणा की विशेष सीबीआई अदालत ने इस बहुचर्चित प्रकरण में 56 आरोपियों को बरी कर दिया।
यह मामला वर्ष 2016 में हुए जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान हिंसा और आगजनी की घटनाओं से जुड़ा हुआ था, जिसमें कई स्थानों पर संपत्ति को नुकसान पहुंचाया गया था।
60 लोगों के खिलाफ दर्ज हुआ था मामला
इस मामले में कुल 60 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी। जांच की जिम्मेदारी केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) को सौंपी गई थी।
ट्रायल के दौरान तीन आरोपियों—विजेंद्र, प्रदीप और सुमित—की मृत्यु हो चुकी है। वहीं एक अन्य आरोपी धर्मेंद्र हुड्डा को अदालत द्वारा भगोड़ा (पीओ) घोषित किया गया था।
अब शेष बचे 56 आरोपियों को अदालत ने साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया है।
बचाव पक्ष ने दी फैसले की जानकारी
फैसले की पुष्टि बचाव पक्ष के वरिष्ठ अधिवक्ता एस.पी.एस. परमार और अधिवक्ता जितेंद्र हुड्डा ने की। उन्होंने बताया कि सीबीआई ने पूर्व कैबिनेट मंत्री कैप्टन अभिमन्यु की कोठी में आगजनी के आरोप में 60 लोगों को नामजद किया था, लेकिन लंबी सुनवाई और गवाहियों के बाद अदालत ने 56 आरोपियों को दोषमुक्त करार दिया।
लंबे समय से चल रहा था ट्रायल
यह मामला जाट आंदोलन के दौरान हुई हिंसा से जुड़ा होने के कारण राजनीतिक और सामाजिक दृष्टि से काफी संवेदनशील माना जा रहा था। कई वर्षों तक चले ट्रायल के बाद आज विशेष सीबीआई कोर्ट ने अपना निर्णय सुनाया।
फैसले के बाद आरोपियों और उनके परिजनों ने राहत की सांस ली, जबकि मामले को लेकर प्रदेश की राजनीति में भी चर्चा तेज हो गई है।











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