August 30, 2026 8:30 am

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Punjab and Haryana High Court में सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर ज्योति मल्होत्रा की जमानत पर फैसला सुरक्षित

पंचकूला/चंडीगढ़: सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर ज्योति मल्होत्रा की जमानत याचिका पर शुक्रवार को पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट में सुनवाई हुई। विस्तृत बहस के बाद अदालत ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने एफआईआर को “बिना ठोस आधार” का बताते हुए आरोपों को निराधार करार दिया।

मई 2025 से जेल में बंद, जासूसी के आरोप
ज्योति मल्होत्रा मई 2025 से न्यायिक हिरासत में हैं। उन पर पाकिस्तान के लिए जासूसी गतिविधियों में संलिप्त होने का आरोप है। दर्ज एफआईआर के अनुसार मामला मई 2025 में इंटेलिजेंस ब्यूरो की एक इनपुट रिपोर्ट के आधार पर सामने आया था।
आरोप है कि वर्ष 2023 में वह नई दिल्ली स्थित पाकिस्तान उच्चायोग में वीजा आवेदन के सिलसिले में गई थीं, जहां उनकी मुलाकात पाकिस्तानी अधिकारी अहसान-उर-रहीम उर्फ दानिश से हुई। जांच एजेंसियों का दावा है कि इसके बाद भारत से जुड़ी संवेदनशील सूचनाओं के आदान-प्रदान की आशंका बनी, जिसके चलते उनके खिलाफ Official Secrets Act के तहत मामला दर्ज किया गया।

मैं प्रोफेशनल ट्रैवल ब्लॉगर हूं, जासूस नहीं”
अपनी जमानत याचिका में ज्योति ने स्वयं को एक प्रोफेशनल ट्रैवल ब्लॉगर बताया है। उन्होंने कहा कि वह खुले तौर पर कैमरा लेकर कंटेंट शूट करती हैं और उसे सार्वजनिक मंचों पर अपलोड करती हैं। ऐसे में उन्हें ‘जासूस’ बताया जाना “अंतर्निहित रूप से अविश्वसनीय और निराधार” है।
बचाव पक्ष के वकील रविंद्र सिंह ढुल ने दलील दी कि आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम के तहत अपराध सिद्ध करने के लिए जिन शर्तों की आवश्यकता होती है—जैसे प्रतिबंधित क्षेत्र में प्रवेश, स्केच या मॉडल तैयार करना—वे इस मामले में पूरी नहीं होतीं।

एसपी के बयान का हवाला
बचाव पक्ष ने हिसार के एसपी शशांक कुमार सवान के कथित सार्वजनिक बयान का भी हवाला दिया, जिसमें कहा गया था कि जांच के दौरान ज्योति के पास किसी सैन्य या रणनीतिक संवेदनशील जानकारी तक पहुंच के प्रमाण नहीं मिले।
इसके अलावा याचिका में कहा गया है कि जांच रिकॉर्ड में ऐसा कोई फोन कॉल या संदेश उपलब्ध नहीं है, जो ज्योति मल्होत्रा और संबंधित पाकिस्तानी अधिकारी के बीच प्रत्यक्ष संपर्क की पुष्टि करता हो।

बीएनएस की धारा 152 लागू करने पर आपत्ति
याचिका में यह भी तर्क दिया गया कि मामले में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 152 लागू करना विधिसम्मत नहीं है, क्योंकि कथित मुलाकात वर्ष 2023 की है, जबकि भारतीय न्याय संहिता बाद में लागू हुई। बचाव पक्ष ने यह भी उल्लेख किया कि पुरानी राजद्रोह धारा 124-ए पर सर्वोच्च न्यायालय पहले ही रोक लगा चुका है।

परिवार की जिम्मेदारी का भी हवाला
जमानत याचिका में मानवीय आधार भी उठाया गया है। ज्योति ने कहा है कि वह अपने बुजुर्ग पिता और बीमार ताऊ की एकमात्र देखभालकर्ता हैं। दोनों उम्रजनित बीमारियों और मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे हैं।
अब सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाई कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया है। अदालत के आदेश पर ही यह स्पष्ट होगा कि ज्योति मल्होत्रा को जमानत मिलती है या उन्हें फिलहाल न्यायिक हिरासत में ही रहना होगा।

बाबूगिरी हिंदी ब्यूरो
Author: बाबूगिरी हिंदी ब्यूरो

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