डॉ. गीता मल्होत्रा, सीईओ, रीड इंडिया
अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस 2026 की थीम “Give to Gain” (‘दान से लाभ’) हमें यह याद दिलाती है कि जब महिलाओं को नेतृत्व करने का अवसर दिया जाता है, तो उसका लाभ पूरे राष्ट्र को मिलता है। लंबे समय तक महिलाओं को घर की धुरी माना जाता रहा है, क्योंकि वे परिवार को मानसिक, सामाजिक और आर्थिक रूप से मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। उनके योगदान को समाज में धीरे-धीरे पहचान मिली, लेकिन आज महिलाओं की भूमिका इससे कहीं अधिक व्यापक हो चुकी है।
पहचान से नेतृत्व तक का सफर
कई दशकों तक महिलाओं के अधिकारों, उनकी उपस्थिति और संघर्षों को पहचान दिलाने की बात होती रही। लेकिन अब समय बदल गया है। आज महिलाएं केवल अपनी जगह मांगने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे समाज और व्यवस्था को आकार देने में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं।
पहले महिलाओं को विकास योजनाओं का लाभार्थी माना जाता था, लेकिन विकसित भारत (Viksit Bharat) के दौर में महिलाएं अब विकास की निर्माता और नेतृत्वकर्ता बन चुकी हैं।
यदि हम महिलाओं की यात्रा को देखें तो यह तीन चरणों में दिखाई देती है—
अतीत: महिलाओं ने पहचान और अधिकारों के लिए संघर्ष किया।
वर्तमान: महिलाओं के विकास से महिलाओं के नेतृत्व वाले विकास की ओर बदलाव।
भविष्य: भारत की अर्थव्यवस्था में महिलाओं की भागीदारी एक मजबूत आधार बनेगी।
शिक्षा और सशक्तिकरण की दिशा में प्रयास
महिलाओं को शिक्षित, सक्षम और आत्मनिर्भर बनाना ही वास्तविक सशक्तिकरण का मार्ग है। READ India वर्ष 2007 से इसी दिशा में कार्य कर रहा है। संस्था का उद्देश्य महिलाओं को सामाजिक और आर्थिक रूप से सशक्त बनाना है ताकि वे अपने जीवन के साथ-साथ अपने समुदाय में भी सकारात्मक परिवर्तन ला सकें।
ग्रामीण भारत में कई महिलाओं के लिए आत्मविश्वास प्राप्त करना भी एक बड़ी चुनौती रहा है। ऐसे में उन्हें सुरक्षित वातावरण, मार्गदर्शन और निरंतर सहयोग प्रदान करना जरूरी है। महिलाओं को अपनी क्षमता पहचानने और समस्याओं का समाधान स्वयं खोजने के लिए प्रेरित किया गया।
READ India की पहल “ONE WOMAN, ONE FAMILY, ONE VILLAGE” इसी विचार पर आधारित है कि यदि एक महिला सशक्त होती है तो उसका प्रभाव पूरे परिवार और गांव तक पहुंचता है।
50 हजार से अधिक महिलाओं को मिला प्रशिक्षण
पिछले पांच वर्षों में READ India ने 50,000 से अधिक महिलाओं को विभिन्न स्किलिंग कार्यक्रमों के माध्यम से प्रशिक्षित और सशक्त बनाया है। इन कार्यक्रमों के तहत महिलाओं को पुस्तकालय में किताब पढ़ने और अपने बच्चों की शिक्षा जारी रखने के लिए भी प्रेरित किया गया।
आज यह पहल 500 से अधिक गांवों में समुदायों को जोड़ते हुए सामाजिक और आर्थिक विकास का आधार बन रही है।
‘Give to Gain’ का संदेश
“Give to Gain” का अर्थ है कि हमें आज निवेश करना होगा ताकि भविष्य समृद्ध और मजबूत बन सके।
इसके लिए कुछ महत्वपूर्ण कदम आवश्यक हैं—
महिलाओं को शिक्षा और डिजिटल साक्षरता प्रदान करना ताकि एक सक्षम कार्यबल तैयार हो सके।
Mudra और Lakhpati Didi जैसी योजनाओं के माध्यम से आर्थिक स्वतंत्रता बढ़ाना।
महिलाओं को सम्मान और सुरक्षा देना ताकि समाज में संतुलन और समृद्धि बनी रहे।
महिलाओं को विकास योजनाओं में केवल शामिल करने की आवश्यकता नहीं है, बल्कि उन्हें विकास की योजना का केंद्र बनाना होगा।
विकसित भारत 2047 की दिशा
भारत जब अपनी स्वतंत्रता के 100 वर्ष पूरे करने की ओर बढ़ रहा है, तब विकसित भारत 2047 का सपना केवल जीडीपी या बुनियादी ढांचे तक सीमित नहीं है। यह उस 50 प्रतिशत आबादी की क्षमता पर भी निर्भर करता है, जो नवाचार और नेतृत्व की ताकत रखती है।
भविष्य का भारत ऐसा होना चाहिए जहां
ग्रामीण क्षेत्र की एक महिला ड्रोन तकनीक के माध्यम से कृषि में बदलाव लाए,
और एक महिला कॉर्पोरेट बोर्डरूम में वैश्विक तकनीकी कंपनी का नेतृत्व करे।
जब हम एक महिला को सशक्त बनाते हैं तो हम केवल एक व्यक्ति की मदद नहीं करते, बल्कि एक ऐसी विरासत की शुरुआत करते हैं जो आने वाली पीढ़ियों तक समाज और राष्ट्र को नई दिशा देती है।
आइए हम सब मिलकर अपना सर्वश्रेष्ठ दें ताकि भारत एक सशक्त, समावेशी और वैश्विक नेतृत्व करने वाला राष्ट्र बन सके।











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