April 6, 2026 1:31 am

April 6, 2026 1:31 am

IDFC बैंक घोटाले के तार चंडीगढ़ तक, नगर निगम, क्रेस्ट और स्मार्ट सिटी फंड की जांच तेज

निजी बैंक में एफडी कराने के फैसले पर उठे सवाल, विजिलेंस और सीबीआई की रडार पर अधिकारी; पुलिस ने रिकॉर्ड कब्जे में लिया

चंडीगढ़ स्मार्ट सिटी फंड घोटाला: 116.84 करोड़ की फर्जी एफडी मामले में मेयर सौरभ जोशी सख्त, कमिश्नर से मांगी एक्शन टेकन रिपोर्ट
चंडीगढ़। हरियाणा में सामने आए बहुचर्चित आईडीएफसी बैंक घोटाले की जांच का दायरा अब चंडीगढ़ यूटी तक पहुंच गया है। जांच एजेंसियों को मिले शुरुआती इनपुट के अनुसार इस मामले के तार चंडीगढ़ नगर निगम और स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट से भी जुड़ते नजर आ रहे हैं। जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ रही है, प्रशासनिक और नगर निगम के अधिकारियों में हड़कंप मच गया है।

स्मार्ट सिटी में उस समय कौन थे सीईओ और डिप्टी सीईओ
सूत्रों के अनुसार जांच एजेंसियां यह भी खंगाल रही हैं कि जिस समय सरकारी फंड को निजी बैंक में फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडी) के रूप में जमा कराया गया, उस दौरान स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट में सीईओ और डिप्टी सीईओ कौन थे। अधिकारियों की भूमिका और निर्णय प्रक्रिया को लेकर फाइलों और रिकॉर्ड की गहन जांच की जा रही है।

लापरवाही या मिलीभगत, जांच का अहम बिंदु
जांच में यह सवाल भी उठ रहा है कि यह मामला केवल प्रशासनिक लापरवाही का है या फिर इसमें किसी स्तर पर मिलीभगत भी शामिल रही है। शुरुआती जांच में कुछ वित्तीय फैसले और फाइल मूवमेंट संदिग्ध पाए गए हैं, जिन्हें लेकर एजेंसियां बारीकी से पड़ताल कर रही हैं।

विजिलेंस और सीबीआई की नजर
मामले की गंभीरता को देखते हुए विजिलेंस और केंद्रीय जांच एजेंसियां भी सक्रिय हो गई हैं। संबंधित अधिकारियों, वित्त शाखा के कर्मचारियों और बैंक से जुड़े लोगों की भूमिका की जांच की जा रही है।
पुलिस ने लिया महत्वपूर्ण रिकॉर्ड कब्जे में
जांच के दौरान पुलिस ने कई महत्वपूर्ण दस्तावेज और वित्तीय रिकॉर्ड अपने कब्जे में ले लिए हैं। इनमें बैंकिंग लेनदेन, एफडी से जुड़े कागजात और नगर निगम व अन्य विभागों की फाइलें शामिल हैं।

निगम और प्रशासनिक हलकों में हड़कंप
जैसे ही इस घोटाले के तार चंडीगढ़ तक जुड़ने की बात सामने आई, नगर निगम और प्रशासनिक अधिकारियों में हड़कंप मच गया। कई अधिकारी लगातार बैठकों में व्यस्त हैं और मामले की जानकारी जुटाई जा रही है।

मामला पहुंचा उच्च स्तर तक
सूत्रों के अनुसार यह मामला अब उच्च प्रशासनिक और राजनीतिक स्तर तक पहुंच चुका है। पूरे मामले की रिपोर्ट मांगी गई है और जांच पूरी होने के बाद कुछ अधिकारियों पर कार्रवाई की गाज गिरने की संभावना जताई जा रही है।

निजी बैंक में जमा धन की भी जांच
जांच एजेंसियां यह भी पता लगा रही हैं कि नगर निगम और क्रेस्ट (CREST) से जुड़े करोड़ों रुपये के फंड को निजी बैंक में जमा कराने का फैसला किसने लिया और उसके पीछे क्या कारण थे।
फिलहाल जांच जारी है और आने वाले दिनों में इस मामले में कई बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।

आईडीएफसी बैंक और नगर निगम के कर्मचारियों पर संदेह, आर्थिक अपराध शाखा कर रही जांच

स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के बंद होने के बाद सामने आया मामला

चंडीगढ़ नगर निगम में स्मार्ट सिटी फंड से जुड़े लगभग 116.84 करोड़ रुपये के कथित घोटाले के मामले में मेयर सौरभ जोशी एक्शन मोड में आ गए हैं। उन्होंने नगर निगम कमिश्नर अमित कुमार से पूरे मामले की विस्तृत एक्शन टेकन रिपोर्ट (ATR) जल्द से जल्द सौंपने के निर्देश दिए हैं।
प्राथमिक जानकारी के अनुसार, स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के खाते से निकाली गई 116.84 करोड़ रुपये की राशि को 11 फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडी) के रूप में दिखाया गया था। लेकिन बाद में जांच में यह सामने आया कि ये सभी एफडी फर्जी थीं। इस खुलासे के बाद पूरे मामले ने बड़ा घोटाले का रूप ले लिया है।

पुलिस ने दर्ज किया केस
मामले की गंभीरता को देखते हुए चंडीगढ़ पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (Economic Offences Wing) ने नगर निगम द्वारा आउटसोर्स पर रखे गए अकाउंटेंट अनुभव मिश्रा और ऋभव ऋषि के खिलाफ मामला दर्ज किया है। इसके साथ ही सेक्टर-32 स्थित आईडीएफसी बैंक के पूर्व मैनेजर को भी आरोपी बनाया गया है।
प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया है कि बैंक के कुछ कर्मचारियों के नाम हरियाणा में सामने आए करीब 540 करोड़ रुपये के बैंक घोटाले में भी आए थे। इसके अलावा नगर निगम चंडीगढ़ के कुछ अज्ञात कर्मचारियों को भी मामले में आरोपी बनाया गया है और पुलिस जल्द उनसे पूछताछ कर सकती है।
मेयर ने मांगे संबंधित अधिकारियों के नाम
मेयर सौरभ जोशी ने स्पष्ट कहा कि जनता के पैसे से किसी भी तरह का समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने निगम कमिश्नर को निर्देश दिए हैं कि मार्च-अप्रैल 2025 के दौरान सीएससीएल (Chandigarh Smart City Limited) के बैंक खातों की निगरानी करने वाले सभी अधिकारियों की पहचान कर रिपोर्ट दी जाए।
इसके साथ ही उन्होंने कहा कि पूरे मामले की जांच में चंडीगढ़ पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा को पूरा सहयोग दिया जाए।

फॉरेंसिक ऑडिट कराने की तैयारी
मेयर ने यह भी निर्देश दिए हैं कि सीएससीएल के सभी बैंक खातों और वित्तीय लेनदेन का स्वतंत्र एजेंसी से फॉरेंसिक ऑडिट कराया जाए, ताकि यह पता लगाया जा सके कि घोटाले की पूरी प्रक्रिया कैसे हुई और इसमें किन-किन लोगों की भूमिका रही।

स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट खत्म होने के बाद खुला मामला
जानकारी के अनुसार जनवरी 2026 में स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट का कार्यकाल समाप्त हो गया था। उस समय परियोजना के खाते में करीब 116.84 करोड़ रुपये शेष थे। इसके बाद अधिकारियों ने यह राशि नगर निगम चंडीगढ़ के खाते में ट्रांसफर करने का निर्णय लिया।
बताया गया कि बाद में इस पैसे की 11 फिक्स्ड डिपॉजिट बनाकर अकाउंट ब्रांच में जमा दिखा दी गईं, लेकिन लंबे समय तक इन एफडी की विस्तृत जांच नहीं की गई और मामला फाइलों में ही दबा रहा।

कमिश्नर का बयान
नगर निगम कमिश्नर अमित कुमार ने कहा कि निगम को ब्याज सहित करीब 121 करोड़ रुपये वापस मिल चुके हैं। उन्होंने बताया कि बैंकों में हुए लेनदेन के रिकॉर्ड की जांच के दौरान कुछ खामियां सामने आईं, जिसके बाद अकाउंट ब्रांच के एक कर्मचारी की संदिग्ध भूमिका को देखते हुए पुलिस में शिकायत दी गई।
कमिश्नर ने कहा कि पुलिस जांच के बाद पूरे मामले की सच्चाई सामने आ जाएगी।

 

RAMESH GOYAT
Author: RAMESH GOYAT

With over 20 years of experience in Hindi journalism, Ramesh Goyat has served as District Bureau Chief in Kaithal and worked with the Haryana , Punjab , HP and UT Bureau in Chandigarh. Coming from a freedom fighter family, he is known for his fast, accurate, and credible reporting. Through Babugiri Hindi, he aims to deliver impartial and fact-based news to readers.

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