May 3, 2026 2:54 pm

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भारत संस्कृति की पुनर्स्थापना द्वारा सभ्यता की पुनर्प्राप्ति करें!

भारत एक महान देष है। सभ्यता व संस्कृति उसके गठन व उसकी निरंतरता के प्रमुख घटक हैं। सतयुग, त्रेता, द्वापर तथा कलयुग में षंकराचार्य से लेकर महर्शि दयानंद-स्वामी विवेकानंद तक प्रगाढ सांस्कृतिक निरंतरता है। राश्ट्रीय सांस्कृतिक मानचित्रण मिषन षुरु किया जा रहा है, सांस्कृतिक धरोहरों का जीर्णों-उद्वार हो रहा है, इतिहास के पुनर्लेखन का बोध समझा जा रहा है क्योंकि सबाल्टर्न इतिहासकार पार्थ चटर्जी ने कहा है कि ”देष का इतिहास लिखने के बदले उसके खंडों का इतिहास लिखा जाए, क्योंकि भारत एक ईकाई नहीं है।“ महात्मा गांधी ने 1909 में ”हिंद स्वराज“ में लिखा था कि ”अंग्रेजों ने पढाया है कि उन्होंने ही भारत को एक राश्ट्र बनाया है।” गांधीजी ने अंग्रेजी षैली के इतिहास लेखन की कटु आलोचना की थी। अंग्रेजी इतिहास के छात्र राहुल गांधी कहते हैं कि ” भारत राश्ट्र नहीं बल्कि राज्यों का समूह है।“ भारत संयुक्त राज्य अमेरिका नहीं है। सभ्यता संस्कृति का बोध जरुरी है।

हमारे ग्रंथ हमारी संस्कृति हैं। रामायण-महाभारत जैसे ग्रंथों के नायक हमारी सांस्कृतिक चेतना हैं जिनको कल्पना कहा गया है। वैदिक समाज हमारी विरासत है, जिनके सूत्रधार आर्य थे, उनको विदेषी आक्रांता बताया जाता है। भारत विरोधी इतिहासकारों ने भारत को आत्महीन देष बताया तथा यह सिद्ध करने का प्रयास किया कि पराजिता भारत की नियति है। वास्तविकता यह है कि सम्पूर्ण भारत कभी किसी का गुलाम नहीं रहा है। साफ झूठ यह है कि इतिहासकारों ने अरबों को विजेता लिखा। महान उपन्यासकार बंकिम चंद्र चटर्जी ने लिखा है कि ” अरब एक प्रकार से दिग्विजय रहे हैं। उन्होंने जहॉं-जहॉ आक्रमण किये, वहॉं-वहॉं जीते मगर फ्रांस और भारत से पराजित होकर लौटे। हजरत मुहम्मद के बाद छह वर्श के भीतर उन्होंने मिस्र एवं सीरिया, दस वर्श में ईरान, फिर एक वर्श बाद अफ्रीका व स्पेन, अस्सी वर्श के भीतर काबुल को, आठ वर्शों के भीतर तुर्कीस्तान पर अधिकार किया लेकिन 300 वर्शों की लंबी अवधि में भी भारत को हस्तगत नहीं कर पाए।“ आठवीं षताब्दी से सांस्कृतिक षोशण की पटकथा आक्रंाता व उनकी औलादों के कारण फलती-फूलती रही और हिंदू, सिक्ख, जैन, बौद्ध, पारसी जैसे धर्मावलम्बी कुरान, हदीस, षरीयत की रोषनी में दोयम-दर्जे के नागरिक बनते चले गए। 16वीं षताब्दी में जेसुइट मिषनरी फ्रांसिस जेवियर ने गोवा-इंक्विजीषन के अंतर्गत भारतीयों संग ईसाइयों के खिलाफ भी मजहबी अभियान छेडा जो रोमन कैथोलिक चर्च के कायदे-कानूनों के खिलाफ थे।
आस्टेªलिया का बैक्सटाउन अस्पताल में 11.2.2025 को दो मुस्लिम नर्सो ने इजरायली यहूदियों को उपचार के दौरान इसलिए मारा की कि इजरायली यहूदी मुस्लिमों को गाजापट्टी में दफना रहें हैं। नीदरलैण्ड की राजधानी एम्सटर्डम में 7.11.2024 को एक फुटबाल मैच के दौरान यहूदियों को फलस्तीन समर्थकों ने मारा। ब्रिटेन में यहूदी मारे जा रहें हैं। सारे मामले को इजरायल बनाम इस्लामी आंतकवादी सांगठनिक गतिविधियों का केंद्र बताया जा रहा है। यहूदी चौथी षताब्दी से ईसायत द्वारा मारे जाते रहें फिर आठवीं षताब्दी के बाद इस्लाम द्वारा दफनाए जाते रहें हैं। साक्ष्य इतिहास में दर्ज हैंः 1 1466 में तत्कालीन पोप पाल द्वितीय के द्वारा क्रिसमस के दिन रोम में यहूदियों को सार्वजनिक रुप से नंगा किया। 2 बाद में यहूदी पुजारयिों (रब्बियों) को विदूशक के वस्त्र पहनाकर परेड कराई। 3 25.12.1891 को पौलेण्ड के वारसा में दर्जनों यहूदियों की भीड द्वारा हत्या की गई। 4 कालांतर में हिटलर द्वारा होलोकास्ट आया, जिसमें 15 लाख बच्चों संग 60 लाख यहूदी मारे गए।

समानांतर, हिंदुओं पर भी अत्याचार हुए। बाप कैदी, दफीना नौकरों व किन्नरों द्वारा, जनाजों को कंधा नहीं, सूखे कंठ को पानी नहीं, भतीजे सुलेमान (दारा षिकोह का पुत्र) भाई मुराद को धोखे से मरवाया, भाई दारा षिकोह का सिर कलम करके पिता को भेंट किया उस औरंगजेब को जिंदा पीर की उपाधि देना, पिता षहांजहॉं की कैद व भतीजे-भाइयों की मौत की तौहिन है। महाराश्ट्र के सपा के विधायक अबू आजमी औरंगजेब की महानता का बखान करते हुए उसका गुणगान करते हैं। दारुल हरम से दरुल इस्लाम में परिवर्तित करने वाला औरंगजेब देवालयों को फोडता-तोडता, पूजकों-पुजारियों को पीटता-मारता था। उसने 12.4.1669 को जजिया लगाया, हिंदू त्यौहारों पर पाबंदी लगाई, उसने हिंदू पालकी तथा हाथी-घोडों की सवारी पर पाबंदी लगाई, उसने अस्त्र-षस्त्र रखना अपराध घोशित किया, उनके दरबारी मुहम्मद साकी मुस्तइद खान की पुस्तक मआसिर-ए-आलमगिरी महत्वपूर्ण साक्ष्य के रुप में उपलब्ध है। अकबर महान जिसने 1568 को चितौड में 30,000 हिंदू मरवाए, स्वयं अकबर द्वारा 9.3.1568 को प्रकाषित फतेहनामा-ए-चितौड, इन तथ्यों की गवाही देता है। मीना बाजार अकबर की कामुकता का अड्डा था जिसमें सुंदर हिंदू बालिकाओं को खरीदा-बेचा तथा अपहरण तक किया जाता था। अकबरनामा, आईने अकबरी अबुल फजल की पुस्तकें साक्ष्य तौर पर मौजूद हैं। बाबरनामा बाबर की वह क्रूरता ब्यां करता है जिसमें बाबर ंिहंदुओं की खोपडी की मीनारें खडी करने की बातें करता है।

दुनियां में यहूदी-हिंदू कल और आज निषाने पर रहें हैं, कल भी निषानें बनाए जाने की सम्पूर्ण आषंका है क्योंकि दलीय राजनीति का खपर खून का प्यासा है। बामियान में बुद्ध प्रतिमा तोडना तालिबान की औरंगजेब वाली मानसिकता का प्रतीक है तथा भारतीय उलेमा तालिबान की प्रषंसा करते हैं। भारतीय, अत्याचारियों की स्मृति मिटाएं और मतवाद को भूलाएं जो प्रेरणा का घोतक है। मतवाद को नंगा करके इतिहास की खुली आंखों से देखकर-परखकर, उनके साक्ष्यों व सबूतों का इतिहास-वीथी जैसा संग्रहालय बनाना जरुरी है। ब्रिटिष इतिहास अर्नालड टायनबी ने दिल्ली में आजाद मैमोरियल व्याख्यान में कहा था-”प्रथम विष्व युद्ध में पौलेण्ड पर कब्जे के बाद रूसियों ने राजधानी वारसा में रूसी आर्थोडाक्स चर्च का निर्माण किया, पर जैसे ही पौलैण्ड आजाद हुआ उसने चर्च को तोड दिया।“ उसे याद कर टायनबी ने औरंगजेब द्वारा भारत में बनवाई मस्जिदों के बारे में कहा-”मस्जिदे भी इस्लामी साम्राज्यवाद का प्रतीक हैं। मस्जिदे यह दिखाने के लिये थी कि हिंदू धर्म की महानतम ग्रंथों पर भी इस्लाम का एकछत्र अधिकार है। पोलिष लोगों ने रूसियों द्वारा बनाए चर्च को ढहाकर रूसियों की बदनामी का स्मारक भी हटा दिया, पर भारतीयों ने स्वतंत्र होने पर भी औरंगजेब की बनवाई गई मस्जिदों को वैसे ही छोड कर निर्दयी काम किया।
भारतीय सभ्यता व सस्ंकृति का ज्वंलत उदाहरण यह है कि भारतीय ऋशिमुनि संतों ने मुसलमानों के सामने अयोध्या, मुथरा, काषी के बदले बाकी सब दावे छोडने का प्रस्ताव किया। हिंदू एकता की फूट में राजनीतिक दलों को सिरमौर मानकर, हथियार बनाकर मुसलमानों ने प्रस्ताव ठुकराया।

पूजास्थलों धर्मस्थलोंकी पुनर्प्राप्ति स्पेन में रिकोनक्विस्टायानि कैथोलिक पुनर्विजय के बाद कार्डोबा, टोलेडो, अर्चेज, सेगोविया, एविला, जरागोजा और सविल नामक षहरों में चर्चों पर मस्जिद बनाई मगर मस्जिदों पर फिर से चर्च बने। इसी तरह ग्रीस, यूक्रेन, रोमानयिा, हंगरी व बुल्गारिया में भी उस्मानी साम्राज्य के दौरान कब्जाए गये चर्चों पर बनी मस्जिदों को सल्तनत की समाप्ति पर मस्जिदों को फिर से चर्चों में तब्दील किया। षारलमेन से युद्ध करते हुए सैक्सन कबीलों और रोमन कैथोेलिक चर्च से जुझती लिथुआनियाई ग्रैड डची ने अंत तक अपने धर्मस्थलों व पूजास्थलों हेतु संघर्श किया।

मीनाक्षी जैन इतिहासकार ने अपनी पुस्तक फलाइट आफ डेटीज एण्ड रीबर्थ आफ टेंपल्स में बताया है कि मंदिरों की पुनर्स्थापना व पुनर्प्राप्ति होती रही है। पूजास्थल ही सभ्यता व संस्कृति की रक्षा के केंद्रबिंदु हैं। धर्मस्थल ही पहली व महत्वपूर्ण पहचान हमारी सभ्यता व संस्कृति के अस्तित्व की है। आजादी का अमृत महोत्सव, अमृत काल संस्कृति व सभ्यता का पुनर्जागरण है। इस कालखंड में 500 से अधिक स्मारकों को संरक्षित किया गया है। अखंड भारत का विचार महाकुंभ है, एक भारत-श्रेश्ठ भारत काषी-तमिल संगमम है, चार धाम परयिोजना है, बुद्ध-जैन सर्किट है, करतार साहिब-महाकाल लोक-काषी विष्वनाथ कोरिडोर हैं, श्रीराम मंदिर है, 370 का टूटना तथा जेके में खीर भवानी मेले का चलना है, वीर बाल दिवस है, विदेषियों को तुलसी-गीता भेंट है, योग-दिवस है, संसद में सेंगोल है, नमामि गंगे है, नारी षक्ति वंदन है, भारत मंडप है, नया संसद भवन है तथा इतना ही नहीं, अखंड भारत काविचार लुटकर ले जायी गई अनेकोंनेक में से 642 कलाकृतियों व मूर्तियों की वापिसी भारतीय विरासत में फिर से संजोना- सहेजना भारतीय संस्कृति की पुनर्स्थापना संग सभ्यता की पुनर्प्राप्ति की ओर बढ चले कदमों की चाप है।

डा. रोहताष जमदग्नि
सचिव, भारतमातरम राश्ट्रपीठ,
नई दिल्ली।

लेखक ने निजी विचार है

बाबूगिरी हिंदी ब्यूरो
Author: बाबूगिरी हिंदी ब्यूरो

बाबूगिरी हिंदी

virender chahal

चंडीगढ़ में सुबह 7:30 बजे मौसम ने अचानक करवट ली। Chandigarh में तेज बारिश और तेज हवाओं के साथ आसमान में घने बादल छा गए, जिससे सुबह होते हुए भी अंधेरा जैसा माहौल बन गया। तेज हवाओं के कारण पेड़-पौधे झूमते नजर आए, वहीं कई इलाकों में विजिबिलिटी भी कम हो गई। मौसम के इस अचानक बदलाव से लोगों को गर्मी से राहत तो मिली, लेकिन दैनिक गतिविधियों पर असर भी पड़ा।

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