बाबूगिरी हिंदी ब्यूरो
चंडीगढ़,15 मई। देशभर में बढ़ती तेल खपत और ऊर्जा संकट को लेकर प्रधानमंत्री Narendra Modi लगातार लोगों से ईंधन बचाने और अनावश्यक वाहनों के उपयोग में कटौती करने की अपील कर रहे हैं। प्रधानमंत्री की इस अपील का असर कई राज्यों में भी देखने को मिला है, जहां मंत्रियों और मुख्यमंत्रियों ने अपने काफिलों में वाहनों की संख्या कम की है। हालांकि, चंडीगढ़ प्रशासन में इस अपील का कोई खास असर दिखाई नहीं दे रहा।
शुक्रवार को चंडीगढ़ के सेक्टर-9 स्थित ओल्ड यूटी सचिवालय के बाहर एक ऐसा मामला सामने आया, जिसने प्रशासनिक व्यवस्था और सरकारी वाहनों के इस्तेमाल पर सवाल खड़े कर दिए। जानकारी के अनुसार चंडीगढ़ समाज कल्याण विभाग में लगी एक सरकारी गाड़ी लंच टाइम के दौरान ओल्ड सचिवालय पहुंची। इसी दौरान ड्राइवर की कथित लापरवाही के कारण एक डिलीवरी बॉय घायल हो गया। घटना के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई और आसपास मौजूद लोग एकत्र हो गए।

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक जिस गाड़ी से हादसा हुआ, उस पर “भारत सरकार” लिखा हुआ था। इसके अलावा वाहन पर वीआईपी, कस्टम और सेल्स टैक्स ऑफिसर के स्टीकर भी लगे हुए थे। लोगों का कहना था कि सरकारी गाड़ियों का इस प्रकार उपयोग किए जाने से प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
मौके पर मौजूद ड्राइवर ने बताया कि गाड़ी चंडीगढ़ समाज कल्याण विभाग में लगी हुई है और वह विभाग की दो महिला अधिकारियों को लेकर ओल्ड यूटी सचिवालय आया था। हालांकि, लोगों ने सवाल उठाया कि जब सरकार लगातार ईंधन बचत को लेकर अभियान चला रही है, तब विभागीय अधिकारी और कर्मचारी छोटी दूरी तथा सामान्य कार्यों के लिए भी सरकारी वाहनों का इस्तेमाल क्यों कर रहे हैं।
घटना के बाद आसपास मौजूद लोगों में प्रशासन के प्रति नाराजगी भी देखने को मिली। लोगों का कहना था कि आम जनता से पेट्रोल-डीजल बचाने की अपील की जाती है, जबकि सरकारी विभागों में अब भी वाहनों का उपयोग पुराने तरीके से जारी है। यदि प्रशासन स्वयं प्रधानमंत्री की अपील को गंभीरता से नहीं लेगा तो आम लोगों तक सही संदेश कैसे पहुंचेगा।
स्थानीय लोगों ने यह भी मांग उठाई कि सरकारी वाहनों के उपयोग को लेकर स्पष्ट नियमों का सख्ती से पालन कराया जाए और जिन विभागों में वाहनों का अनावश्यक उपयोग हो रहा है, वहां जवाबदेही तय की जाए। वहीं घायल डिलीवरी बॉय को प्राथमिक उपचार के लिए भेजा गया।
यह घटना ऐसे समय में सामने आई है जब केंद्र सरकार लगातार “ईंधन बचाओ” और “कम संसाधनों में अधिक कार्य” का संदेश दे रही है। ऐसे में चंडीगढ़ प्रशासन की कार्यशैली पर उठ रहे सवाल आने वाले दिनों में और तेज हो सकते हैं।

स्कूलों के बाहर भी दौड़ रही सरकारी गाड़ियां
चंडीगढ़ में सरकारी वाहनों के उपयोग को लेकर पहले भी कई बार सवाल उठ चुके हैं। शहर के विभिन्न स्कूलों के बाहर सुबह और दोपहर के समय बड़ी संख्या में सरकारी गाड़ियां अधिकारियों के बच्चों को छोड़ने और वापस लाने के लिए पहुंचती दिखाई देती हैं।
सूत्रों के अनुसार इनमें कुछ वाहन सीधे सरकारी विभागों के हैं, जबकि कई गाड़ियां अलग-अलग विभागों में लीज पर लगाई गई हैं। बावजूद इसके इनका उपयोग निजी कार्यों में किए जाने के आरोप लगातार सामने आते रहे हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि जब केंद्र सरकार ईंधन बचत और सरकारी खर्चों में कटौती की बात कर रही है, तब सरकारी वाहनों का इस प्रकार इस्तेमाल गंभीर सवाल खड़े करता है। लोगों ने प्रशासन से सरकारी गाड़ियों के उपयोग की निगरानी और जवाबदेही तय करने की मांग की है।

एक अधिकारी, कई विभाग… फिर किसके इस्तेमाल में हैं सरकारी गाड़ियां?
चंडीगढ़ प्रशासन में कई ऐसे अधिकारी हैं जिनके पास एक साथ कई विभागों का अतिरिक्त चार्ज है। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि जब एक ही अधिकारी कई विभाग संभाल रहा है, तो अलग-अलग विभागों की सरकारी गाड़ियों का इस्तेमाल आखिर कौन कर रहा है।
सूत्रों के अनुसार कई विभागों की गाड़ियां नियमित रूप से सड़कों पर दौड़ती दिखाई देती हैं, जबकि संबंधित अधिकारी एक ही होते हैं। लोगों का कहना है कि यदि एक अधिकारी के पास कई विभागों की जिम्मेदारी है तो वाहनों के उपयोग का स्पष्ट रिकॉर्ड सार्वजनिक होना चाहिए।
स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने मांग उठाई है कि प्रशासन को सरकारी वाहनों के उपयोग की जांच करानी चाहिए। साथ ही यह भी स्पष्ट किया जाए कि कौन अधिकारी या कर्मचारी किन परिस्थितियों में विभागीय गाड़ियों का उपयोग कर रहा है। लोगों का कहना है कि सरकारी संसाधनों के उपयोग में पारदर्शिता जरूरी है, ताकि ईंधन बचत और खर्चों में कटौती संबंधी सरकारी दावों की वास्तविकता सामने आ सके।













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