बाबूगिरी हिंदी ब्यूरो
पंचकूला, 4 जून। पंचकूला नगर निगम के बहुचर्चित 150 करोड़ रुपये के बैंक घोटाले की जांच में चौंकाने वाले खुलासे सामने आए हैं। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की जांच के अनुसार नगर निगम के खातों से कथित तौर पर निकाली गई भारी-भरकम राशि का इस्तेमाल लग्जरी गाड़ियों की खरीद, प्रॉपर्टी में निवेश और विभिन्न बैंक खातों के जरिए धन के जाल को फैलाने में किया गया।
ईडी ने विशेष अदालत में पेश रिपोर्ट में दावा किया है कि कोटक महिंद्रा बैंक के तत्कालीन शाखा प्रबंधक एवं डिप्टी वाइस प्रेसिडेंट पुष्पिंदर सिंह ने इस कथित घोटाले की रकम से बीएमडब्ल्यू 7 सीरीज, महिंद्रा थार, स्कॉर्पियो-एन और मोटरसाइकिल जैसी महंगी गाड़ियां खरीदी थीं। जांच एजेंसी के अनुसार मामला उजागर होने से पहले ही इन वाहनों और संपत्तियों को बेच दिया गया था।
ईडी ने हाल ही में पुष्पिंदर सिंह को गिरफ्तार कर अदालत में पेश किया। एजेंसी का आरोप है कि उन्होंने अपने पद और बैंकिंग सिस्टम का दुरुपयोग करते हुए नगर निगम की राशि को फर्जी खातों के माध्यम से बाहर निकालने की साजिश रची। जांच में उन्हें पूरे मामले का कथित “मास्टरमाइंड” बताया गया है।
जांच के मुताबिक नगर निगम पंचकूला के नाम पर दो बैंक खाते कथित रूप से जाली दस्तावेजों के आधार पर खोले गए और इनके जरिए करोड़ों रुपये विभिन्न व्यक्तियों के खातों में ट्रांसफर किए गए। ईडी के अनुसार रजत दहरा को 88.17 करोड़ रुपये, स्वाति तोमर को 31.58 करोड़ रुपये, कपिल कुमार को 2.36 करोड़ रुपये और विनोद कुमार को 1.41 करोड़ रुपये भेजे गए।
पूछताछ में कपिल कुमार ने बताया कि उसे अच्छी नौकरी दिलाने का झांसा देकर उसके नाम पर बैंक खाता खुलवाया गया और कई चेकों पर हस्ताक्षर करवाए गए। वहीं स्वाति तोमर ने भी बयान में कहा कि उसे विभिन्न बैंकों में खाते खुलवाने के लिए प्रेरित किया गया था। उसने यह भी दावा किया कि जिन लोगों और संस्थाओं को कथित तौर पर धन पहुंचा, उनमें से कई को वह जानती तक नहीं थी और उसने किसी को कोई ऋण नहीं दिया।
ईडी की जांच में यह भी सामने आया कि 2020 से 2023 के बीच पुष्पिंदर सिंह ने रजत दहरा और स्वाति तोमर से 33 करोड़ रुपये ऋण के रूप में प्राप्त करने की बात स्वीकार की है। एजेंसी का मानना है कि इसी धन का उपयोग संपत्तियां और लग्जरी वाहन खरीदने में किया गया।
पूर्व नगर निगम लेखा अधिकारी विकास कौशिक के बयान के अनुसार नगर निगम और बैंक के बीच होने वाला अधिकांश भौतिक पत्राचार पुष्पिंदर सिंह और बैंक के रिलेशनशिप मैनेजर दिलीप राघव के माध्यम से संचालित होता था, जिससे जांच एजेंसियों को पूरे नेटवर्क की भूमिका की पड़ताल में मदद मिल रही है।
हालांकि पुष्पिंदर सिंह की ओर से अदालत में गिरफ्तारी और हिरासत को चुनौती देते हुए कहा गया कि धनशोधन निवारण अधिनियम की निर्धारित शर्तों का पालन नहीं किया गया है। इसके बावजूद विशेष अदालत ने धन के अंतिम लाभार्थियों और मनी ट्रेल की गहन जांच को देखते हुए उन्हें 9 जून तक ईडी रिमांड पर भेज दिया है।
जांच एजेंसियों का मानना है कि आने वाले दिनों में इस घोटाले से जुड़े और बड़े खुलासे हो सकते हैं तथा धन के अंतिम लाभार्थियों तक पहुंचने के लिए जांच का दायरा लगातार बढ़ाया जा रहा है।













Total Users : 333253
Total views : 554022