CBI ने अदालत में कहा- जांच अहम चरण में, कई पहलुओं की हो रही पड़ताल; चैट डिलीट करने का भी आरोप
बाबूगिरी हिंदी ब्यूरो
पंचकूला, 22 जून। नगर निगम पंचकूला के बैंक खाते से करोड़ों रुपये के कथित गबन से जुड़े मामले में गिरफ्तार पूर्व नगर निगम आयुक्त एवं IAS अधिकारी राम कुमार सिंह और पंचायत विभाग के पूर्व सुपरिटेंडेंट प्रिंस शर्मा की रिमांड अवधि खत्म होने के बाद सोमवार को अदालत में पेश किया गया। सुनवाई के बाद अदालत ने दोनों आरोपियों को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है।
मामले की जांच कर रही केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने अदालत को बताया कि जांच अभी महत्वपूर्ण दौर में है और कई अहम तथ्यों, दस्तावेजों और संबंधित लोगों की भूमिका की गहन जांच की जा रही है। एजेंसी ने अदालत में कहा कि हरियाणा सरकार और केंद्र सरकार से आवश्यक अनुमति मिलने के बाद पंचकूला एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) द्वारा दर्ज एफआईआर को CBI ने अपने हाथ में लिया था।
CBI के अनुसार, यह मामला भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत दर्ज किया गया है। जांच एजेंसी का दावा है कि नगर निगम के खाते से कथित रूप से निकाली गई राशि और इससे जुड़े लेन-देन की जांच की जा रही है।
कथित चैट डिलीट करने का मामला भी आया सामने
सुनवाई के दौरान CBI की ओर से अदालत को बताया गया कि IDFC फर्स्ट बैंक फ्रॉड केस के कथित मास्टरमाइंड के साथ हुई कुछ चैट्स को राम कुमार सिंह ने गिरफ्तारी से पहले कथित तौर पर डिलीट कर दिया था। यह जानकारी प्रिंस शर्मा की पेशी के दौरान सामने आई। जांच एजेंसी अब इन डिजिटल साक्ष्यों और अन्य इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड की भी जांच कर रही है।
चार्जशीट में कई नाम शामिल
CBI ने अदालत को बताया कि इस मामले में 21 मई को 13 आरोपियों के खिलाफ अंतिम रिपोर्ट दाखिल की गई थी। इसके बाद 12 जून को दाखिल की गई अनुपूरक चार्जशीट में विक्रम वाधवा और राजन सिंह को अतिरिक्त आरोपी बनाया गया।
जांच एजेंसी का कहना है कि मामले में अभी कई अन्य पहलुओं की जांच बाकी है। इसमें अन्य विभागों के अधिकारियों, निजी व्यक्तियों और संभावित सहयोगियों की भूमिका की भी पड़ताल की जा रही है।
नगर निगम खाते से करोड़ों के लेन-देन का मामला
गौरतलब है कि पंचकूला नगर निगम के बैंक खाते से करोड़ों रुपये के कथित गबन का मामला सामने आने के बाद जांच शुरू हुई थी। प्रारंभिक जांच के बाद मामला ACB के पास पहुंचा और बाद में सरकार की मंजूरी के बाद CBI ने इसकी जांच अपने हाथ में ले ली।
CBI अब कथित वित्तीय अनियमितताओं, बैंक लेन-देन, दस्तावेजों और आरोपियों के बीच संभावित संबंधों की जांच कर रही है। आने वाले दिनों में जांच की दिशा और सामने आने वाले नए तथ्यों पर सभी की नजर बनी हुई है।














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