अब अमेरिका और स्पेन में भी ‘चंडीगढ़ की विरासत’ पर मंडराया खतरा
पेरिस में नीलामी रुकवाने के बाद प्रशासन अलर्ट, विदेश मंत्रालय के जरिए दोनों देशों में प्रस्तावित नीलामी रोकने की कवायद तेज
प्रारंभिक जानकारी में पंजाब-हरियाणा विधानसभा से जुड़ी बताई जा रहीं दो ऐतिहासिक कुर्सियां, असल मालिकाना हक और विदेश पहुंचने के पूरे नेटवर्क की होगी जांच
अमेरिका और स्पेन में दो और ऐतिहासिक कुर्सियों की नीलामी की तैयारी, पेरिस के बाद प्रशासन फिर अलर्ट
सरकारी संस्थान में विरासत फर्नीचर से स्टेंसिल चिह्न उखाड़कर चोरी, सेक्टर-3 थाने में एफआईआर; दोनों मामलों के तार जुड़ने की आशंका
रमेश गोयत
चंडीगढ़, 15 जुलाई। चंडीगढ़ की विश्वप्रसिद्ध स्थापत्य विरासत को लेकर एक के बाद एक चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं। पेरिस में चंडीगढ़ के विरासत फर्नीचर की प्रस्तावित नीलामी रुकवाने के बाद अब अमेरिका और स्पेन में भी दो ऐतिहासिक कुर्सियों समेत अन्य फर्नीचर की नीलामी की तैयारी सामने आई है। इसी बीच चंडीगढ़ के एक सरकारी संस्थान में सुरक्षित रखे गए विरासत फर्नीचर से उसकी पहचान बताने वाले मूल स्टेंसिल चिह्न उखाड़कर चोरी किए जाने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। घटनाक्रम ने इस आशंका को और मजबूत कर दिया है कि चंडीगढ़ की विरासत को व्यवस्थित तरीके से निशाना बनाया जा रहा है।
चंडीगढ़ प्रशासन ने विदेश मंत्रालय के माध्यम से अमेरिका और स्पेन में प्रस्तावित नीलामी रोकने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। वहीं दूसरी ओर संस्कृति विभाग की शिकायत पर सेक्टर-3 थाना पुलिस ने विरासत फर्नीचर से स्टेंसिल चोरी के मामले में अज्ञात आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर जांच तेज कर दी है।
विधानसभा से जुड़ी बताई जा रहीं ऐतिहासिक कुर्सियां
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, अमेरिका और स्पेन में नीलामी के लिए सूचीबद्ध दो कुर्सियां स्टेट लेजिस्लेटिव मेंबर्स ब्लॉक से जुड़ी बताई जा रही हैं। यह ब्लॉक पंजाब के पुनर्गठन से पहले की संयुक्त पंजाब विधानसभा परिसर का हिस्सा रहा था। इसी कारण इन कुर्सियों का संबंध तत्कालीन विधानसभा अथवा बाद में पंजाब-हरियाणा विधानसभा से होने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि इसकी आधिकारिक पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही होगी।

अब विरासत फर्नीचर से पहचान भी मिटाई जा रही
विदेशों में नीलामी की खबरों के बीच सामने आए नए मामले ने जांच एजेंसियों की चिंता और बढ़ा दी है। संस्कृति विभाग के निदेशक नवीन रत्तू की शिकायत के अनुसार, सरकारी संस्थान में सुरक्षित रखे गए विरासत फर्नीचर पर लगे मूल स्टेंसिल चिह्न किसी अज्ञात व्यक्ति ने उखाड़कर चोरी कर लिए। यही स्टेंसिल फर्नीचर की असली पहचान, सरकारी रिकॉर्ड और उसके ऐतिहासिक महत्व का सबसे बड़ा प्रमाण माने जाते हैं।
पुलिस ने एफआईआर नंबर 77 के तहत भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 305(ई) और 61(2) के अंतर्गत मामला दर्ज कर लिया है। जांच एजेंसियां अब यह भी पता लगा रही हैं कि कहीं पहचान मिटाकर इन फर्नीचर को भविष्य में अंतरराष्ट्रीय बाजार में बेचने की साजिश तो नहीं रची जा रही।
सीसीटीवी और रिकॉर्ड खंगाल रही पुलिस
सेक्टर-3 थाना पुलिस संस्थान में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज, विजिटर रजिस्टर, कर्मचारियों की आवाजाही और सुरक्षा रिकॉर्ड की जांच कर रही है। तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि स्टेंसिल कब और किसने हटाए।
पेरिस के बाद अमेरिका और स्पेन पर फोकस
चंडीगढ़ प्रशासन हाल ही में पेरिस में 25 जून को प्रस्तावित विरासत फर्नीचर की नीलामी रुकवाने में सफल रहा था। अब अमेरिका और स्पेन में सूचीबद्ध वस्तुओं को लेकर विदेश मंत्रालय के माध्यम से संबंधित देशों के भारतीय दूतावासों और नीलामी संस्थानों से संपर्क किया गया है। प्रशासन का कहना है कि यदि ये वस्तुएं चंडीगढ़ की सार्वजनिक विरासत का हिस्सा हैं तो उन्हें नीलाम नहीं होने दिया जाएगा और भारत वापस लाने के लिए हर संभव कानूनी कदम उठाए जाएंगे।
यूनेस्को विरासत से जुड़ा है पूरा मामला
चंडीगढ़ का कैपिटल कॉम्प्लेक्स यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल है। शहर के मूल भवनों के साथ उनमें रखा गया फर्नीचर भी प्रसिद्ध वास्तुकार ली कॉर्बुजिए और उनकी टीम की डिजाइन अवधारणा का अभिन्न हिस्सा माना जाता है। ऐसे में इन वस्तुओं का विदेशों में पहुंचना और अब उनकी पहचान मिटाने की कोशिश सामने आना शहर की सांस्कृतिक विरासत पर गंभीर खतरे के रूप में देखा जा रहा है।
जांच के दायरे में पूरा नेटवर्क
प्रशासन पहले ही पंजाब विश्वविद्यालय और पीजीआई से जुड़े विरासत फर्नीचर की कथित चोरी और अवैध बिक्री के मामलों में एफआईआर दर्ज करा चुका है। अब जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि दशकों पुराने सरकारी फर्नीचर को किसने, कब और कैसे संस्थानों से बाहर निकाला तथा अंतरराष्ट्रीय नीलामी बाजार तक पहुंचाया। साथ ही यह भी जांच होगी कि क्या स्टेंसिल चोरी और विदेशी नीलामी के मामलों के पीछे कोई संगठित नेटवर्क सक्रिय है।
प्रमुख बिंदु
अमेरिका और स्पेन में विरासत फर्नीचर की नीलामी की तैयारी।
प्रारंभिक जानकारी में दो कुर्सियां संयुक्त पंजाब विधानसभा ब्लॉक से जुड़ी बताई जा रहीं।
सरकारी संस्थान से विरासत फर्नीचर के मूल स्टेंसिल चिह्न चोरी।
सेक्टर-3 थाने में एफआईआर नंबर 77 दर्ज।
सीसीटीवी, विजिटर रजिस्टर और सुरक्षा रिकॉर्ड की जांच।
विदेश मंत्रालय के जरिए नीलामी रुकवाने और विरासत भारत वापस लाने की कवायद तेज।












Total Users : 371212
Total views : 606549