झूठ बोला है तो कायम भी रहो उस पर
आदमी को साहेब-ए-किरदार होना चाहिए
अमेरिका के प्रसिद्ध लेखक, हास्यकार और उपन्यासकार मार्क टवेन ने इंसानी बिहेवियर पर गजब का लिखा है। वे अपने तीखे व्यंग्य के लिए जाने जाते हैं। उन्हें अमेरिकी साहित्य का जनक भी कहा जाता है। उन्होंने एक दफा कहा कि…जब तक सच्चाई अपने जूते पहन रही होती है,तब तक झूठ आधी दुनिया की यात्रा कर चुका होता है। उनका एक प्रसिद्ध कथन है कि… यदि आप भूखे मरते कुत्ते को रोटी खिला दें तो वो वह आपको नहीं काटेगा। आदमी और कुत्ते में यही अंतर है। उन्होंने कमाल का लिखा…मूर्ख से कभी बहस मत करो। वो तुम्हें अपनी मूर्खता के स्तर तक नीचे उतार लाएगा और अपने लंबे अनुभव के आधार पर आपको हरा देगा। करीब चार दशक से हरियाणा की राजनीति में सक्रिय उद्योग मंत्री राव नरबीर पहली दफा 1987 में 26 बरस की आयु में विधायक बने और तत्कालीन देवीलाल सरकार में मंत्री रहे। राव नरबीर ने इंसान की बदलती सोच पर हालिया अपने एक इंटरव्यू में खुलकर बात की है। उन्होंने कहा कि राजनीति करने वाले इंसान की हालत श्मशान घाट में बैठे व्यक्ति जैसी हो जाती है, जिसे वहां अंतिम संस्कार के लिए आ रहे मुर्दों से कोई फर्क नहीं पड़ता। भले ही वो बच्चे हों,युवा हों या बुर्जग हों उसकी आंख में आंसू नहीं आते। हमारे जज्बात खत्म हो जाते हैं। नेताओं के पास तो लगभग हर इंसान रोता हुआ आता है और ये बताता है कि मैं ऐसे दुखी हंू। मुझे ये कष्ट है..मुझे वो पीड़ा है। लोग इतने झूठ बोलकर जाते हैं कि कोई सच कहे तो भी यकीन नहीं होता। हालात ये हो गए हैं कि सच की पड़ताल करने में भी वक्त लगता है। अब तो अनुभव बहुत हो गया। पहले तो लोग सच ही बोलते थे। सारे गांव में एक आध झूठा होता था। अब वो जमाना नहीं रहा। अब इंसान अपने फायदे और स्वार्थ के लिए कितना भी-कैसा भी झूठ बोल देता है। इस कारण से अब हर किसी को संदेह की नजर से देखना पड़ता है। ऐसे बहुत से आदमी आ जाते हैं कि मेरा बेटा बीमार है। हस्पताल में दाखिल है। उसके इलाज के लिए पैसा चाहिए। पहले मैं ऐसे लोगों की दिल खोल कर मदद करता था। वो जितने पैसे मांगते, उतने दे दिया करता था। बाद में किसी ने मुझे बताया कि ये सब झूठ बोलते हैं और इन पैसों से दारू पीते हैं। फिर इन झूठे लोगों के कारण मुझे अपना ये रवैया बदलने पर मजबूर होना पड़ा। अब अगर कोई ऐसा आदमी कभी मदद के लिए आता है तो मैं अपने किसी व्यक्ति को उस के साथ भेज देता हंू कि हस्पताल में खुद जाकर इनकी मदद कर के आए। इसके बाद से होने ये लगा कि जो मदद लेने आते हैं वो बीच रास्ते में ही भाग जाते हैं। समय सबको सीखाता है। इंसान हर दिन परिपक्व होता है। जब तक जीता है,सीखता रहता है। राव नरबीर कहते हैं कि उनको अपने स्पष्टवादी स्वभाव का राजनीति में नुकसान भी उठाना पड़ता है। अगर वो किसी व्यक्ति को साफ साफ ये बता दें कि उनका काम नहीं हो सकता तो ऐसे लोग फिर चुनाव के समय में उनका विरोध करने के लिए सबसे आगे रहते हैं। अगर मैं किसी को बहका दूं,चक्कर कटवाता रहू तो इस नुकसान से बच सकता हंू,लेकिन ये सब करना मेरे स्वभाव में नहीं है। मैं बेबाक आदमी हंू। बेबाकी से बात करना पंसद करता हंू। किसी को बेवकूफ नहीं बनाता। इस हालात पर कहा जा सकता है कि..
सिलसिला जख्म जख्म जारी है
ये जमीं दूर तक हमारी है
मैं बहुत कम किसी से मिलता हंू
जिस से यारी है,उस से यारी है
हम जिसे जी रहे हैं हर वो लम्हा
हर गुजरे हुए वक्त पे भारी है
नाव कागज की छोड़ दी मैंने
अब समंदर की जिम्मेदारी है
रेत के घर तो बह गए सभी
बारिशों का खुलूस जारी है
दुखदायी हादसा
मिर्जा गालिब ने कभी लिखा था..हम को मालूम है जन्नत की हकीकत,लेकिन दिल को खुश रखने को गालिब ये ख्याल अच्छा है। जब कभी हम नेताओं और सरकार के अफसरों की बात सुनेंगे तो ऐसा लगेगा कि हरियाणा को स्वर्ग से सुंदर बना दिया गया है। अब जैसी सरकारें और जैसी हकीकत है ये हम सब जानते ही हैं। दो दिन पहले गुरूग्राम के बादशाहपुर के 16 बरस के आशुतोष की दमदमा झील में डूबने से मौत हो गई। वो अपने तीन दोस्तों के साथ झील में नहाने के लिए आया था। तीनों बादशाहपुर के सरकारी स्कूल में बाहरवीं कक्षा के छात्र थे। यंू अगर किसी को तैरना नहीं आता हो तो उसे इस तरह नहाने के लिए कतई जाना ही नहीं चाहिए। फिर भी बेहतर होता कि इस झील पर प्रशासन की तरफ से जरूर ये व्यवस्था कर दी जाए कि यहां पर होर्डिग-सूचना पटट लगा कर इस तरह की चेतावनी दे दी जाए कि झील में नहाने वाले के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। उनके खिलाफ जुर्माना लगाया जाएगा। झील का पानी गहरा है और यहां डूबने की आशंका है। यहां पर ऐसे हादसे होते रहते हैं। अगर ये सब सूचनाएं वहां सूचना पटट पर लगाई जाएं तो बहुत से लोग वहां पर नहाने से गुरेज कर सकते हैं। ये झील पर्यटन विभाग के अधीन हैं और यहां अक्सर पर्यटक आते रहते हैं। वो बोटिंग भी करते रहते हैं। कई पर्यटक इस झील में नहाने लग जाते हैं। उनको ये अंदेशा और अंदाजा कतई नहीं होता कि इस तरह कार्यक्रम करने से उनकी जान जोखिम में आ सकती है। कुल मिला कर आशुतोष की जान लापरवाही में गई है। इसके लिए डूबने वाला तो कसूरवार था ही ,पर्यटन विभाग ने भी अपनी जिम्मेदारी का ठीक से निर्वहन नहीं किया। पर्यटन विभाग को इस दिशा में तत्काल समुचित कदम उठाने चाहिए। पर्यटन परिसरों के पास जहां जहां इस तरह की झील हैं, वहां पर लाइफ सेविंग गार्डस,सिक्योरिटी गार्डस और जो भी जरूर प्रबंध किए जाने चाहिए वो तत्काल करने चाहिए।

…जारी है मनोहरलाल का वन मैन शो
केंद्रीय मंत्री मनोहरलाल खट्टर ने फिर से साबित किया कि भाजपा के दिल्ली दरबार में उनकी पैठ कितनी मजबूत है। कितनी जबरदस्त है। मनोहरलाल के लिए अपनी करनाल लोकसभा सीट की कुर्बानी करने वाले संजय भाटिया को अब भाजपा का राष्ट्रीय महासचिव बना दिया गया है। ये पद पाने से चंद दिन पहले ही पहले भाटिया को राज्यसभा सांसद भी बनाया गया है। ऐसा माना जाता है कि भाटिया को यहां तक पहुंचाने में सिर्फ और सिर्फ उनके गुरू मनोहरलाल का योगदान है। हरियाणा के कई अन्य नेता भी संगठन में राष्ट्रीय स्तर पर पद पाने के लिए प्रयासरत थे,लेकिन मनोहरलाल के आगे उनकी एक न चली। हरियाणा भाजपा,हरियाणा सरकार,केंद्र सरकार और केंद्रीय भाजपा संगठन सब जगह इस समय मनोहरलाल की तूती बोल रही है। हर तरफ उनका जलवा है। वन मैन शो है। सब जगह अब हालात ऐसी है कि खाता ना बही-जो मनोहर कहे वो सही। राजनीति में मैसेज का ही महत्व है। पावर के सर्कल में किस की तूती बोल रही है इस मैसेज को भांपने में अपनी अफसरशाही ना पहले पीछे थी और ना ही अब है। इसीलिए अफसरशाही में मनोहरलाल की शान में कसीदे पढने, उनको खुश करने,उनके कहे को अंजाम तक पहुंचाने की होड़ लगी रहती है। सब समय समय का खेल है। एक समय हरियाणा भाजपा के जो नेता मनोहरलाल को शक्ति विहीन मान कर उनको तव्वजो नहीं देते थे, अब वो सारे के सारे लाइन में लग कर उनके सामने जी हुजूरी करने और नतमस्तक होने को लालायित रहते हैं। मनोहरलाल भी अब खुल कर खेल रहे हैं। एक के बाद एक अपने लोगों को चुन चुन कर शिखर पर पहुंचा रहे हैं और अपने विरोधियों को चुन चुन कर ठिकाने लगा रहे हैं। हमारे हरियाणा में कहा जाता है कि चलती में चलाने वाला समझदार, और ना चलती में अपनी चलाने की कोशिश करने वाला बेवकूफ और चलती में ना चलाने वाला महाबेवकूफ होता है। खट्टर का अंदाज ऐसा है कि उनका काटा पानी नहीं मांगता। बिना खून का एक कतरा टपकाए वो ऐसी सर्जरी कर देते हैं कि समाने वाले की सात पुश्तें याद रखती हैं। मनोहरलाल के करकमलों से सर्जरी करवाने वालों और उन से लाभान्वित होने वालों की सूची दिनों दिन लंबी होती जा रही है। ये उनकी मनोहारी अदा है कि वो इस तरह के कांड करने के बाद उसका प्रत्यक्ष या परोक्ष तौर पर श्रेय भी नहीं लेते। ना वो अन्य नेताओं की तरह बड़बोले हैं कि जो कुछ हो रहा है उनके ही फजल-प्रताप से हो रहा है। खटटर के इस कातिल अंदाज से हर्षित उनके समर्थक उनके लिए यही कुछ कह रहे हैं कि..
तेरे आने की जब खबर निकली
बड़ी उम्मीद लिए ये सुबह निकली
जरूरतमंदों पर खर्च हो दान पात्र
सोशल मीडिया पर एक खबर खूब ही प्रचारित हुई कि तमिलनाडु सरकार ने फैसला किया है कि प्रदेश के सभी धार्मिक संस्थानों से दानपात्रों-दान पेटियों को हटा कर इन्हें सरकारी हस्पतालों और सरकारी स्कूलों में रखा जाएगा। वहां की सरकार ने जल्द ही इसका खंडन कर दिया कि ऐसा कोई फैसला नहीं किया गया है। जिस तरह से अपने यहां सरकारी स्कूलों और हस्पतालों की हालत है उस के मददेनजर ये व्यवस्था शुरू करने में किसी भी सरकार को हर्ज नहीं होना चाहिए। हम धार्मिक संस्थानों में ईश्वर के आगे नतमस्तक होते हैं। चढावा चढाते हैं। ये भूल जाते हैं कि जो ईश्वर सबको देने वाला है, उसको हमारे दान की कहां से और क्यों जरूरत आन पड़ेगी? बेहतर होगा कि इस धन को किसी गरीब लाचार बेटी को शिक्षित बनाने पर खर्च किया जाए। उसे आत्मनिर्भर बनाया जाए। किसी की जिंदगी संवारने-उसके अच्छे दिन लाने पर खर्च किया जाए।













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