June 21, 2026 1:31 pm

June 21, 2026 1:31 pm

DELHI: कांग्रेस का ‘मनरेगा बचाओ’ अभियान: 2.5 लाख से अधिक ग्राम सभाओं में प्रस्ताव पास कराने की तैयारी

नई दिल्ली: कांग्रेस ने केंद्र सरकार की नई ग्रामीण रोजगार योजना के खिलाफ देशव्यापी आंदोलन छेड़ने की तैयारी कर ली है। पार्टी 8 जनवरी से 10 फरवरी 2026 तक ‘मनरेगा बचाओ’ अभियान चलाएगी, जिसके तहत देशभर की 2.5 लाख से अधिक ग्राम सभाओं में प्रस्ताव पास कराए जाएंगे। इन प्रस्तावों के जरिए पुरानी मनरेगा व्यवस्था को बहाल करने की मांग की जाएगी।

कांग्रेस का आरोप है कि केंद्र सरकार ने नई योजना के जरिए ग्राम पंचायतों की शक्तियों में कटौती कर दी है। पहले जहां ग्राम सभाओं और पंचायतों को स्थानीय जरूरतों के अनुसार काम तय करने और मजदूरों को रोजगार देने का अधिकार था, अब वह अधिकार केंद्र सरकार के हाथों में चला गया है। इससे ग्रामीण गरीबों का काम मांगने का संवैधानिक अधिकार कमजोर हो गया है।

काम का अधिकार छिनने का आरोप
कांग्रेस नेताओं का कहना है कि यूपीए सरकार के दौर में मनरेगा एक मांग-आधारित योजना थी, जिसमें जरूरत पड़ने पर ग्रामीण मजदूर काम मांग सकते थे। लेकिन नई योजना के तहत यह तय करने का अधिकार केंद्र सरकार के पास होगा कि किस पंचायत में, कब और कितना काम मिलेगा। इससे रोजगार की गारंटी समाप्त हो गई है।

गांव-गांव तक आंदोलन
राजीव गांधी पंचायती राज संगठन के चेयरमैन सुनील पंवार ने कहा कि कांग्रेस कार्यकर्ता देश के लगभग हर गांव में मौजूद हैं और करीब 22 करोड़ मनरेगा मजदूरों से संपर्क किया जाएगा। ग्राम सभाओं से प्रस्ताव पास कराकर केंद्र सरकार को स्पष्ट संदेश दिया जाएगा कि ग्रामीण भारत इस बदलाव के खिलाफ है।
उन्होंने कहा कि यह लंबे समय बाद मजदूरों का सबसे बड़ा राष्ट्रव्यापी आंदोलन होगा। कांग्रेस का मानना है कि नई योजना ग्राम पंचायतों को कमजोर करती है और विकेंद्रीकरण की भावना के खिलाफ है।

महात्मा गांधी का नाम हटाने पर नाराजगी
कांग्रेस सूत्रों के अनुसार, पार्टी नेतृत्व संसद के शीतकालीन सत्र में पुराने कानून को नई योजना में बदलने और महात्मा गांधी का नाम हटाने के फैसले से बेहद नाराज है। इसी के चलते कांग्रेस वर्किंग कमेटी ने ‘मनरेगा बचाओ’ अभियान को मंजूरी दी।

पंचायतों को ‘जीरो फंड’ का खतरा
कांग्रेस वर्किंग कमेटी के सदस्य जगदीश ठाकोर ने आरोप लगाया कि नई योजना के तहत फंड, काम और संपत्तियों से जुड़े सभी फैसले केंद्र सरकार करेगी। इससे कई पंचायतों को जीरो फंड मिलने का खतरा है और स्थानीय स्तर पर योजना बनाने की प्रक्रिया खत्म हो जाएगी।

महिलाओं और गरीबों पर पड़ेगा असर
कांग्रेस नेता कमलेश्वर पटेल ने कहा कि मनरेगा ने महिलाओं को बराबर मजदूरी, रोजगार सुरक्षा और सामाजिक सम्मान दिया। कुल कार्य दिवसों में महिलाओं की भागीदारी लगभग 60 प्रतिशत रही है। नई योजना से यह संतुलन बिगड़ जाएगा और ग्रामीण गरीबों के लिए रोजगार की गारंटी समाप्त हो जाएगी।
उन्होंने कहा कि मनरेगा ने सूखा, बाढ़ और कोविड जैसी आपदाओं के समय गरीबों के लिए सुरक्षा कवच का काम किया, लेकिन नई योजना इस संवैधानिक अधिकार को सरकारी अनुमति में बदल देती है।

बाबूगिरी हिंदी ब्यूरो
Author: बाबूगिरी हिंदी ब्यूरो

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