August 28, 2026 1:17 pm

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48 घंटे में भाजपा का डिजिटल पलटवार, अब बैकफुट पर नहीं फ्रंटफुट पर खेलेगी टीम

नई आईटी-सोशल मीडिया टीम को मिला फ्री हैंड, रोज नया आइडिया, तर्क के साथ आक्रामक जवाब और दिल्ली से राज्यों तक एक साथ अभियान का फॉर्मूला
चंडीगढ़/ हरियाणा 28 अगस्त। भाजपा ने सोशल मीडिया के मोर्चे पर अपनी रणनीति में बड़ा बदलाव करते हुए अब बैकफुट से निकलकर फ्रंटफुट पर खेलने की तैयारी कर ली है। नई आईटी और सोशल मीडिया टीम के कामकाज की शुरुआत के महज 48 घंटे में पार्टी के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर जिस तेजी से नए कंटेंट और मुद्दा आधारित अभियान दिखाई देने लगे हैं, उससे भाजपा के भीतर भी नई ऊर्जा और उत्साह का माहौल है।
पार्टी से जुड़े सूत्रों के मुताबिक नई टीम के साथ हुई करीब साढ़े चार घंटे की महत्वपूर्ण बैठक में उसे ऊपर से स्पष्ट दिशा और पर्याप्त स्वतंत्रता दी गई। संदेश बिल्कुल सीधा था-“रोज नया आइडिया होना चाहिए, रोज कुछ नया सोचिए।” इसके बाद टीम ने पुराने ढर्रे से हटकर नए फॉर्मेट, नए विषय और तेजी से प्रतिक्रिया देने की रणनीति पर काम शुरू किया है।

आक्रामकता में कोई कमी नहीं, लेकिन मर्यादा की सीमा तय
भाजपा की नई डिजिटल रणनीति में विपक्ष के हमलों का जवाब देने में अब संकोच नहीं होगा। कांग्रेस की सोशल मीडिया टीम की आक्रामक शैली के मुकाबले भाजपा भी अपने नैरेटिव को मजबूती से रखने की तैयारी में है। हालांकि नेतृत्व ने एक महत्वपूर्ण सीमा भी तय कर दी है-हमला मुद्दों पर होगा, व्यक्ति की गरिमा पर नहीं। नई टीम को स्पष्ट संदेश है कि राजनीतिक जवाब तीखा हो सकता है, लेकिन गाली-गलौज और अभद्र भाषा की कोई जगह नहीं होगी। तर्क होगा, तथ्य होंगे और राजनीतिक आक्रामकता होगी, लेकिन भाषा की मर्यादा कायम रहेगी।

48 घंटे में कंटेंट की बाढ़, कार्यकर्ताओं में दिखा 2014 जैसा उत्साह
नई टीम की सक्रियता का असर सोशल मीडिया पर दिखाई देने लगा है। पिछले 48 घंटे में पार्टी के डिजिटल नेटवर्क पर अलग-अलग मुद्दों से जुड़े नए कंटेंट की बाढ़ देखने को मिली है। भाजपा के एक पदाधिकारी ने नई सक्रियता का वर्णन करते हुए कहा-“ऐसा लग रहा है जैसे 2014 वाला टाइम वापस आ गया है।” दरअसल, भाजपा की डिजिटल ताकत केवल दिल्ली की केंद्रीय टीम तक सीमित नहीं है। पार्टी की संगठनात्मक मशीनरी की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि केंद्रीय स्तर पर एक मुद्दा तय होते ही प्रदेश और स्थानीय स्तर की टीमें अपने-अपने क्षेत्र की भाषा, मुद्दों और परिस्थितियों के मुताबिक उसे जनता तक पहुंचाने में जुट जाती हैं। यही मॉडल अब सोशल मीडिया पर और अधिक आक्रामक तरीके से लागू करने की तैयारी है।

दिल्ली से निकलेगा आइडिया, राज्यों में दिखेगा असर
भाजपा की नई रणनीति का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा केंद्रीय समन्वय और राज्यों को पर्याप्त स्वतंत्रता देना है। दिल्ली की मुख्य टीम के साथ प्रदेशों की टीमों को भी अपनी रचनात्मक क्षमता इस्तेमाल करने की छूट दी जा रही है। यानी केंद्रीय स्तर पर दिशा एक होगी, लेकिन राज्यों में उसका स्थानीय और रचनात्मक विस्तार होगा। पार्टी के भीतर इसे सोशल मीडिया के “सीरियल अटैक” मॉडल के तौर पर देखा जा रहा है- एक मुद्दा सामने आए और उसके बाद देशभर में भाजपा का डिजिटल नेटवर्क उसी मुद्दे पर अलग-अलग तरीके से सक्रिय हो जाए।सूत्रों का कहना है कि फिलहाल सोशल मीडिया पर दिखाई दे रही गतिविधि को इस रणनीति का शुरुआती चरण माना जा रहा है। आने वाले दिनों में इसके और बड़े विस्तार की तैयारी है।

नई सोच वाले चेहरों को मौका, टीम में प्रयोग की खुली छूट
नई रणनीति में एक और महत्वपूर्ण बदलाव यह है कि सोशल मीडिया को केवल राजनीतिक पोस्ट और प्रेस नोट के विस्तार के रूप में नहीं देखा जा रहा। युवा डिजिटल यूजर्स की पसंद, नए कंटेंट फॉर्मेट, छोटे वीडियो, रचनात्मक ग्राफिक्स और तेजी से प्रतिक्रिया देने वाले कंटेंट पर विशेष जोर दिया जा रहा है। नई टीम के काम करने के तरीके में भी अंतर दिखाई दे रहा है। टीम के सदस्यों को अपनी शैली और क्षमता के मुताबिक काम करने की स्वतंत्रता दी गई है। राज्यों में भी नई सोच रखने वाले कार्यकर्ताओं और डिजिटल कंटेंट तैयार करने वाले चेहरों को आगे लाने की कवायद शुरू की जा रही है।

संसाधनों की कमी नहीं, असली चुनौती निरंतरता की
भाजपा के लिए एक बड़ा प्लस पॉइंट उसका देशव्यापी संगठन और संसाधनों का नेटवर्क है। किसी केंद्रीय अभियान को कुछ ही समय में राज्यों और जिलों तक पहुंचाने की क्षमता पार्टी के पास पहले से मौजूद है। अब नई टीम के सामने चुनौती इस ताकत को लगातार नए और प्रभावी कंटेंट में बदलने की है। शुरुआती 48 घंटे उत्साहजनक जरूर हैं, लेकिन डिजिटल राजनीति में असली सफलता तभी मानी जाएगी जब यह गति आने वाले हफ्तों और महीनों तक बनी रहे।

डिजिटल नैरेटिव की बड़ी परीक्षा
नई व्यवस्था को लेकर पार्टी के भीतर यह भी चर्चा है कि यदि नई टीम अपनी शुरुआती गति को कायम रखने में सफल रहती है तो आने वाले एक-दो महीनों में सोशल मीडिया के राजनीतिक नैरेटिव में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। फिलहाल शुरुआती बढ़त भाजपा के पक्ष में दिखाई दे रही है। लेकिन इसे निर्णायक बढ़त में बदलने के लिए तेज प्रतिक्रिया, तथ्य आधारित राजनीति, रचनात्मक कंटेंट और संगठनात्मक समन्वय को लगातार बनाए रखना होगा।
भाजपा की नई डिजिटल टीम के सामने अब लक्ष्य साफ है- सोशल मीडिया पर केवल विपक्ष के नैरेटिव का जवाब देना नहीं, बल्कि अपना नैरेटिव पहले से तैयार करना और उसे देशभर में एक साथ जनता तक पहुंचाना। यही प्रयोग सफल हुआ तो आने वाले महीनों में सोशल मीडिया की राजनीतिक लड़ाई का अंदाज काफी हद तक बदल सकता है।

RAMESH GOYAT
Author: RAMESH GOYAT

With over 20 years of experience in Hindi journalism, Ramesh Goyat has served as District Bureau Chief in Kaithal and worked with the Haryana , Punjab , HP and UT Bureau in Chandigarh. Coming from a freedom fighter family, he is known for his fast, accurate, and credible reporting. Through Babugiri Hindi, he aims to deliver impartial and fact-based news to readers.

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