September 1, 2026 10:58 am

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पंजाब यूनिवर्सिटी छात्रसंघ चुनाव में एबीवीपी का फिर दबदबा, पढ़े पूरी लिस्ट किसको कितने वोट मिले

चंडीगढ़ के कॉलेजों में छात्र परिषद चुनाव, लोकतंत्र के रंग में रंगे कैंपस

• चंडीगढ़ के कॉलेजों में छात्र परिषद चुनाव संपन्न, कैंपस में दिखा लोकतांत्रिक उत्साह
• कॉलेजों में छात्र परिषद चुनाव की धूम, विद्यार्थियों ने चुने अपने प्रतिनिधि
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• चंडीगढ़ के कॉलेजों में छात्र परिषद चुनाव, कहीं मतदान तो कहीं निर्विरोध चुने प्रतिनिधि
• कॉलेजों में छात्र परिषद चुनाव संपन्न, नई टीम के हाथों में छात्र नेतृत्व

अंकित बिढान विजयी; ASAP ने पात्रता पर उठाए सवाल, हाईकोर्ट जाने का ऐलान

चंडीगढ़, 31 अगस्त। पंजाब यूनिवर्सिटी कैंपस स्टूडेंट्स काउंसिल चुनाव 2026 में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने लगातार दूसरी बार अध्यक्ष पद पर कब्जा जमा लिया है। एबीवीपी के प्रत्याशी अंकित बिढान ने चुनाव में जीत दर्ज की। चुनाव परिणाम सामने आने के साथ ही कैंपस की छात्र राजनीति में नई बहस भी शुरू हो गई है। आम आदमी पार्टी से जुड़े छात्र संगठन एसैप ने बिढान की चुनावी पात्रता, शैक्षणिक रिकॉर्ड और दस्तावेजों को लेकर गंभीर सवाल उठाते हुए पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट का रुख करने की घोषणा की है।

पंजाब यूनिवर्सिटी प्रधान पद का चुनाव परिणाम
अंकित बिढान ने 506 वोट से जीत दर्ज की
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी): 3,143 वोट
आप समर्थित छात्र संगठन एसैप (एएसएपी): 2,637 वोट
भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन (एनएसयूआई): 2,263 वोट
साथ (सैथ): 1,387 वोट
जीत का अंतर : 506 वोट
कुल मत : 9,430

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दूसरी बार एबीवीपी का अध्यक्ष पद पर कब्जा
पंजाब यूनिवर्सिटी में यह एबीवीपी के लिए लगातार दूसरी बड़ी जीत है। वर्ष 2025 में गौरव वीर सोहल ने अध्यक्ष पद जीतकर संगठन के लिए करीब 48 साल बाद ऐतिहासिक वापसी दर्ज की थी। अब अंकित बिधान की जीत ने एबीवीपी को छात्र राजनीति में अपनी स्थिति मजबूत करने का अवसर दिया है।
इस वर्ष अध्यक्ष पद के लिए मुकाबला चार प्रमुख प्रत्याशियों के बीच था। अंतिम सूची में एबीवीपी के अंकित बिधान के अलावा ASAP के आदिल बराड़, एनएसयूआई के गुरमन सिंह सिद्धू और SATH के दरशप्रीत सिंह मैदान में थे।

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मतगणना के दौरान उपलब्ध ताजा आंकड़ों में भी अंकित बिढान लगातार आगे रहे। 51 विभागों की मतगणना पूरी होने तक उन्हें 1,808 वोट मिले थे, जबकि ASAP के आदिल बराड़ 1,355 और एनएसयूआई के गुरमन सिंह सिद्धू 1,281 वोटों के साथ पीछे चल रहे थे। दरशप्रीत सिंह को 763 वोट मिले थे। इसके बाद बिधान की जीत की पुष्टि हुई।

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सोई के समर्थन से मजबूत हुआ एबीवीपी का समीकरण
चुनाव से ठीक पहले अकाली दल के छात्र संगठन स्टूडेंट ऑर्गेनाइजेशन ऑफ इंडिया ने भी एबीवीपी प्रत्याशी अंकित बिढान को बिना शर्त समर्थन देने का ऐलान किया था। सोई के अपने उम्मीदवार का नामांकन खारिज होने के बाद संगठन ने एबीवीपी के पक्ष में समर्थन दिया। इसके अलावा कुछ अन्य छात्र संगठनों ने भी बिढान को समर्थन दिया था।

इस समर्थन को पंजाब की छात्र राजनीति के साथ-साथ आगामी पंजाब विधानसभा चुनावों के संदर्भ में भी राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
जीत के तुरंत बाद उठे पात्रता पर सवाल
अंकित बिढान की जीत के बाद ASAP ने चुनाव परिणाम और उनकी उम्मीदवारी पर सवाल खड़े कर दिए हैं। संगठन का कहना है कि उसने चुनाव से पहले ही पंजाब यूनिवर्सिटी के कुलपति, डीन स्टूडेंट वेलफेयर, रिटर्निंग ऑफिसर, रजिस्ट्रार और शिकायत निवारण सेल को शिकायत देकर बिधान की पात्रता और संबंधित रिकॉर्ड की जांच की मांग की थी।
ASAP का आरोप है कि विश्वविद्यालय प्रशासन को शिकायत की जानकारी होने के बावजूद चुनाव प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई और मतदान से पहले पात्रता संबंधी आपत्तियों का कोई स्पष्ट निर्णय सामने नहीं आया। अब संगठन इस मामले को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में ले जाने की तैयारी कर रहा है।

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यूएमसी और शैक्षणिक रिकॉर्ड को लेकर आरोप
ASAP ने बिढान के कथित शैक्षणिक और अनुशासनात्मक रिकॉर्ड पर भी सवाल उठाए हैं। संगठन का दावा है कि उनके खिलाफ परीक्षा में अनुचित साधनों के इस्तेमाल यानी यूएमसी का मामला रहा है और उन्हें पूर्व में विश्वविद्यालय से डिबार किया गया था। इसके अलावा संगठन ने उनकी बाद की शैक्षणिक योग्यता तथा पंजाब यूनिवर्सिटी में पीएचडी में दाखिले के लिए प्रस्तुत दस्तावेजों की वैधता की भी जांच की मांग की है।

हालांकि, ये आरोप अभी आरोप ही हैं और इनकी स्वतंत्र पुष्टि या किसी न्यायिक फैसले की जानकारी सामने नहीं आई है।
अंकित बिधान पहले ही आरोपों को नकार चुके हैं
चुनाव से पहले अंकित बिढान ने ASAP की ओर से लगाए गए आरोपों को खारिज किया था। उन्होंने आरोपों को गलत सूचना और छात्रों को गुमराह करने की कोशिश बताया था।

अब चुनाव परिणाम के बाद विवाद का अगला चरण कानूनी हो सकता है। यदि ASAP हाईकोर्ट में याचिका दायर करता है तो अदालत के सामने मुख्य सवाल बिधान की चुनावी पात्रता, विश्वविद्यालय के नियमों के अनुपालन और चुनाव से पहले उठाई गई आपत्तियों पर प्रशासन द्वारा की गई कार्रवाई से जुड़े होंगे।
मतदान के दौरान भी हुआ था विवाद
चुनाव के दौरान कैंपस में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। करीब 16,500 मतदाताओं के लिए मतदान कराया गया और अध्यक्ष पद पर चार उम्मीदवारों के बीच मुकाबला हुआ। मतदान के दौरान लॉ विभाग के बाहर छात्रों और पुलिस के बीच धक्का-मुक्की तथा मतदान प्रक्रिया को लेकर कुछ आरोपों की भी खबरें सामने आई थीं।

अब अंकित बिढान की जीत के बाद जहां एबीवीपी समर्थकों में उत्साह है, वहीं ASAP की प्रस्तावित कानूनी चुनौती ने चुनाव परिणाम को लेकर नई राजनीतिक और कानूनी बहस छेड़ दी है। आने वाले दिनों में हाईकोर्ट में याचिका दायर होती है या नहीं और विश्वविद्यालय प्रशासन इस मामले में क्या रुख अपनाता है, इस पर पूरे कैंपस की नजर रहेगी।

RAMESH GOYAT
Author: RAMESH GOYAT

With over 20 years of experience in Hindi journalism, Ramesh Goyat has served as District Bureau Chief in Kaithal and worked with the Haryana , Punjab , HP and UT Bureau in Chandigarh. Coming from a freedom fighter family, he is known for his fast, accurate, and credible reporting. Through Babugiri Hindi, he aims to deliver impartial and fact-based news to readers.

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