October 11, 2026 8:53 am

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जगदीश भगत सिंह : देशभक्ति का अविकल ध्वजवाहक, शहीद भगत सिंह के अनन्य भगत

भगत सिंह के विचारों को जीवन में उतारने का संकल्प, 2007 से पंचकूला में देशभक्ति की अलख जगा रहा ‘शहीद भगत सिंह जागृति मंच’
रमेश गोयत
पंचकूला, 27 सितंबर। देशभक्ति केवल नारों और आयोजनों तक सीमित नहीं होती, बल्कि जब कोई व्यक्ति किसी विचार को अपने जीवन का उद्देश्य बना ले तो वह विचार समाज में एक आंदोलन का रूप ले सकता है। पंचकूला के जगदीश भगत सिंह की जीवन यात्रा इसी समर्पण और देशभक्ति की मिसाल प्रस्तुत करती है। शहीद-ए-आजम भगत सिंह से प्रभावित होकर उन्होंने न केवल अपने नाम के साथ ‘भगत सिंह’ जोड़ा, बल्कि पिछले कई दशकों से स्वतंत्रता संग्राम के महानायकों की स्मृतियों और उनके विचारों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का लगातार प्रयास किया है।बचपन में पड़ी भगत सिंह की छाप
जगदीश भगत सिंह का जन्म 1 मार्च 1957 को कैथल जिले के बाहमनीवाला गांव में एक जाट परिवार में हुआ। उनके पिता स्वर्गीय बख्शी राम और माता स्वर्गीय मानो देवी थीं। प्रारंभिक शिक्षा गांव में प्राप्त करने के बाद उन्होंने राजकीय उच्च विद्यालय, बाता से मैट्रिक की परीक्षा उत्तीर्ण की और बाद में आईटीआई का प्रशिक्षण लिया।
बचपन से ही कैथल के एक चौक पर स्थापित शहीद-ए-आजम भगत सिंह की प्रतिमा उन्हें विशेष रूप से आकर्षित करती थी। समय के साथ यह आकर्षण उनके जीवन का अभिन्न हिस्सा बनता गया। वर्ष 1993-94 के दौरान उन्होंने अपने नाम के साथ ‘भगत सिंह’ जोड़ लिया। इसके साथ ही उन्होंने भगत सिंह की पहचान से जुड़े पहनावे को भी अपनाया। सिर पर फेल्ट हैट, नुकीली मूंछें, लंबी कॉलर वाली शर्ट और ओवरकोट उनके व्यक्तित्व का हिस्सा बन गए।
धीरे-धीरे उनका व्यक्तित्व भगत सिंह की स्मृतियों और देशभक्ति के विचारों से इस कदर जुड़ गया कि पंचकूला और आसपास के क्षेत्र में उनकी अलग पहचान बन गई।


नौकरी के साथ जारी रहा देशभक्ति का जुनून
जगदीश भगत सिंह ने जीवन-यापन के लिए विभिन्न संस्थानों में नौकरी की। उन्होंने हिमाचल प्रदेश के सोलन जिले के परवाणू स्थित आयशर ट्रैक्टर कंपनी में काम किया। इसके बाद वर्ष 1981 में हरियाणा स्मॉल स्केल इंडस्ट्रीज एक्सपोर्ट कॉरपोरेशन, पंचकूला में सेवाएं दीं।
वर्ष 2006 में उन्होंने उत्तर हरियाणा बिजली वितरण निगम में बतौर लिपिक योगदान दिया और फरवरी 2015 में वहां से सेवानिवृत्त हुए। नौकरी की जिम्मेदारियों के बावजूद स्वतंत्रता संग्राम के महानायकों के प्रति उनका आकर्षण और उनके विचारों को समाज तक पहुंचाने का प्रयास लगातार जारी रहा।

2007 में बनाया ‘शहीद भगत सिंह जागृति मंच’
शहीद भगत सिंह की जन्म शताब्दी के अवसर पर वर्ष 2007 में पंचकूला में ‘शहीद भगत सिंह जागृति मंच’ का गठन किया गया। इसके संस्थापक अध्यक्ष के रूप में जगदीश भगत सिंह ने मंच की गतिविधियों को निरंतर विस्तार दिया।
मंच की ओर से प्रत्येक वर्ष शहीद भगत सिंह की जयंती के अवसर पर बड़े स्तर पर कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। इन कार्यक्रमों में पंचकूला और ट्राईसिटी के विभिन्न सरकारी एवं गैर-सरकारी विद्यालयों के विद्यार्थी भाग लेते हैं। विद्यार्थी देशभक्ति से ओतप्रोत सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत करते हैं और स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास से जुड़े विषयों पर अपनी प्रस्तुतियों के माध्यम से नई पीढ़ी को जोड़ते हैं।
पंचकूला के सेक्टर-5 स्थित यवनिका पार्क में आयोजित होने वाले इन कार्यक्रमों में हजारों विद्यार्थी, अभिभावक, शिक्षक और आम नागरिक शामिल होते रहे हैं।

शहीदों और क्रांतिकारियों के परिवारों को एक मंच पर लाने का प्रयास
जागृति मंच के कार्यक्रमों की एक खास विशेषता स्वतंत्रता संग्राम से जुड़े शहीदों और क्रांतिकारियों के परिवारों को आमंत्रित करना रही है। मंच के आयोजनों में भगत सिंह, सुखदेव, राजगुरु, बटुकेश्वर दत्त, ऊधम सिंह, बैकुंठ शुक्ल, अशफाकउल्ला खां, रामप्रसाद बिस्मिल, चंद्रशेखर आजाद और करतार सिंह सराभा जैसे महानायकों के परिवारों से जुड़े प्रतिनिधियों की सहभागिता रही है।
इसके अलावा रानी लक्ष्मीबाई, चापेकर बंधुओं, लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक और गदर आंदोलन से जुड़े परिवारों के प्रतिनिधि भी मंच के कार्यक्रमों में शामिल हो चुके हैं।
इन परिवारों के सदस्यों को आमंत्रित कर सम्मानित करने तथा विद्यार्थियों के साथ संवाद कराने का उद्देश्य स्वतंत्रता संग्राम की स्मृतियों को केवल पुस्तकों तक सीमित न रखते हुए नई पीढ़ी तक प्रत्यक्ष अनुभव के रूप में पहुंचाना है।

वर्षभर में करीब 22 कार्यक्रम
जागृति मंच की गतिविधियां किसी एक दिन या एक आयोजन तक सीमित नहीं हैं। मंच के अनुसार वर्षभर में करीब 22 कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। इनमें शहीद भगत सिंह की जयंती और शहादत दिवस के साथ-साथ शहीद चंद्रशेखर आजाद की जयंती एवं शहादत दिवस, मंगल पांडेय और रानी लक्ष्मीबाई के बलिदान दिवस तथा शहीद ऊधम सिंह की जयंती एवं शहादत दिवस शामिल हैं।
मंच ने देश के अलग-अलग क्षेत्रों के स्वतंत्रता सेनानियों और क्रांतिकारियों को भी अपनी गतिविधियों में स्थान दिया है। पंचकूला की तमिल कॉलोनी में दक्षिण भारत के स्वतंत्रता सेनानी तिरुपुर कुमारन से संबंधित कार्यक्रम आयोजित किए गए हैं। इसी प्रकार झारखंड के आदिवासी नायक बिरसा मुंडा से जुड़े कार्यक्रम भी किए जाते हैं।

18 सामुदायिक भवनों के नामकरण की मांग
जगदीश भगत सिंह के नेतृत्व वाले मंच ने पंचकूला में स्वतंत्रता संग्राम के महानायकों के नाम पर सामुदायिक भवनों के नामकरण की मांग भी उठाई थी। बाद में पंचकूला में 18 सामुदायिक भवनों का नामकरण स्वतंत्रता संग्राम के महानायकों के नाम पर किए जाने की पहल हुई।
यह प्रयास इस बात का उदाहरण है कि स्मारक, संस्थान और सार्वजनिक स्थानों के नाम भी आने वाली पीढ़ियों को इतिहास से जोड़ने का माध्यम बन सकते हैं।

देशभर के शहीद स्मारकों की यात्रा
जगदीश भगत सिंह की गतिविधियां पंचकूला तक सीमित नहीं हैं। वे देश के उन स्थानों की यात्राएं करते रहे हैं जिनका संबंध स्वतंत्रता संग्राम और शहीदों के जीवन से रहा है।
उन्होंने अमृतसर के जलियांवाला बाग, हुसैनीवाला स्थित शहीद स्मारक, भगत सिंह की जन्मस्थली खटकड़ कलां तथा चंद्रशेखर आजाद के शहादत स्थल रहे इलाहाबाद के अल्फ्रेड पार्क सहित अनेक ऐतिहासिक स्थलों का भ्रमण किया है।
काकोरी कांड से जुड़े क्रांतिकारियों की स्मृतियों से जुड़े स्थलों और जेलों की यात्रा भी उन्होंने की। 17 से 20 दिसंबर 2012 के दौरान शहीद राजेंद्रनाथ लाहिड़ी, रामप्रसाद बिस्मिल, अशफाकउल्ला खां और ठाकुर रोशन सिंह से जुड़े स्थलों की यात्रा की गई। इस यात्रा में मंच के वर्तमान महामंत्री विजय कुमार सिंह की भी सहभागिता रही।
इन यात्राओं के दौरान उन्होंने आजाद हिंद फौज के बुजुर्ग सैनिकों तथा अनेक शहीद और क्रांतिकारी परिवारों के सदस्यों से मुलाकात कर उनके अनुभवों को जानने का प्रयास किया।

भगत सिंह की प्रतिकृति स्थापित करना रहा महत्वपूर्ण सपना
जगदीश भगत सिंह की लंबे समय से इच्छा थी कि पंचकूला में शहीद-ए-आजम भगत सिंह की प्रतिकृति स्थापित हो। यह प्रयास 23 मार्च 2018 को साकार हुआ, जब तत्कालीन हरियाणा मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने पंचकूला के सेक्टर-11-15 स्थित गोलचक्कर पर स्थापित भगत सिंह की प्रतिकृति का अनावरण किया।
उनके लिए यह केवल प्रतिमा की स्थापना नहीं, बल्कि शहीद भगत सिंह की स्मृति को सार्वजनिक जीवन में स्थापित करने का एक महत्वपूर्ण प्रयास था।

समाजसेवा के लिए मिला सम्मान
जगदीश भगत सिंह के सामाजिक और देशभक्ति से जुड़े कार्यों को प्रशासनिक स्तर पर भी सम्मान मिला। 15 अगस्त 2016 को पंचकूला जिला प्रशासन की ओर से आयोजित स्वतंत्रता दिवस समारोह में तत्कालीन राज्य मंत्री एवं वर्तमान हरियाणा मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने उन्हें विशिष्ट समाजसेवा के लिए सम्मानित किया।

मार्गदर्शकों और सहयोगियों को देते हैं श्रेय
जगदीश भगत सिंह अपनी गतिविधियों की सफलता का श्रेय केवल स्वयं को नहीं देते। वे स्वतंत्रता संग्राम और इतिहास से जुड़े विषयों पर मार्गदर्शन देने वाले विद्वानों, लेखकों और इतिहासकारों का विशेष रूप से आभार व्यक्त करते हैं। इनमें इतिहासकार प्रो. मलविंदर जीत सिंह वडैच और प्रो. एम.एम. जुनेजा सहित अन्य विद्वानों का मार्गदर्शन उनके लिए महत्वपूर्ण रहा है।
वे जागृति मंच के सहयोगियों और उन संरक्षकों के प्रति भी आभार व्यक्त करते हैं, जिनके सहयोग से वर्षों से देशभक्ति से जुड़े कार्यक्रम लगातार आयोजित किए जा रहे हैं।

अब सेल्यूलर जेल सहित कई ऐतिहासिक स्थलों की योजना
भविष्य की योजनाओं के बारे में जगदीश भगत सिंह का कहना है कि वे अंडमान-निकोबार स्थित सेल्यूलर जेल, कोलकाता के विभिन्न ऐतिहासिक स्थलों और स्मारकों, मुजफ्फरपुर एवं गया की सेंट्रल जेल तथा चौरी-चौरा सहित स्वतंत्रता संग्राम से जुड़े अन्य महत्वपूर्ण स्थानों की यात्रा करना चाहते हैं।
उनके लिए इन यात्राओं का उद्देश्य केवल पर्यटन नहीं है। वे शहीदों की जन्मस्थली और शहादत स्थली पर जाकर उनके जीवन और संघर्ष को महसूस करने को अपना सौभाग्य मानते हैं।

नई पीढ़ी को इतिहास से जोड़ना अगला लक्ष्य
जगदीश भगत सिंह अब हरियाणा के अलग-अलग जिलों में जाकर स्वतंत्रता संग्राम के शहीदों और क्रांतिकारियों से जुड़ी चित्र-वीथिका प्रदर्शनियों और व्याख्यान कार्यक्रमों का आयोजन करना चाहते हैं। उनका उद्देश्य युवा पीढ़ी को स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास से जोड़ना और उनमें देश, समाज तथा नागरिक कर्तव्यों के प्रति जागरूकता पैदा करना है।
जगदीश भगत सिंह की कहानी इस बात को रेखांकित करती है कि किसी ऐतिहासिक व्यक्तित्व से प्रभावित होना और उस प्रेरणा को सामाजिक कार्य में बदल देना दो अलग बातें हैं। उन्होंने भगत सिंह के प्रति अपने बचपन के आकर्षण को वर्षों की सक्रियता में बदला और पंचकूला में शहीदों की स्मृतियों, स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास और देशभक्ति से जुड़े आयोजनों की एक निरंतर परंपरा खड़ी करने का प्रयास किया। उनके लिए ‘भगत सिंह’ केवल नाम का हिस्सा नहीं, बल्कि जीवन में अपनाई गई एक विचारधारा और जिम्मेदारी का प्रतीक है।

बाबूगिरी हिंदी ब्यूरो
Author: बाबूगिरी हिंदी ब्यूरो

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