सुबह 10 से शाम 5 बजे तक सरकारी दफ्तर, लेकिन सेक्टर-9 में 5 बजे के बाद शुरू होता है कथित असली खेल? रात 9 बजे तक ठेकेदारों की आवाजाही पर गंभीर सवाल
आरोप—दिन में दिखावे का काम, शाम ढलते ही चहेते ठेकेदारों की बैठकों का दौर; कर्मचारियों को भी रात तक बैठाने की चर्चा
बाबूगिरी न्यूज़
चंडीगढ़, 8 अक्तूबर। चंडीगढ़ यूटी प्रशासन के सरकारी कार्यालयों के निर्धारित समय को लेकर सेक्टर-9 स्थित इंजीनियरिंग विंग में गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। आरोप है कि सरकारी कार्यालय का समय सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक होने के बावजूद यहां शाम 5 बजे के बाद गतिविधियां खत्म होने के बजाय कथित तौर पर तेज हो जाती हैं।
दावा किया जा रहा है कि शाम 5 बजे से रात करीब 9 बजे तक कार्यालय में ऐसी गतिविधियां चलती हैं, जिनमें कुछ पसंदीदा ठेकेदारों की मौजूदगी भी रहती है। यदि ये आरोप सही हैं तो यह सवाल बेहद गंभीर है कि आखिर सरकारी कार्यालय का सामान्य समय समाप्त होने के बाद रोजाना चार घंटे तक किस तरह का कामकाज चल रहा है?
5 बजे तक ‘दिखावा’, 5 बजे बाद शुरू होता है काम?
विभाग से जुड़े लोगों के बीच चर्चा है कि सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक कार्यालय में सामान्य सरकारी कामकाज चलता है, लेकिन शाम 5 बजे के बाद कुछ अधिकारियों और चुनिंदा ठेकेदारों के बीच बैठकों व कामकाज का सिलसिला जारी रहता है।
इसी को लेकर सवाल उठ रहा है कि अगर ठेकेदारों से संबंधित महत्वपूर्ण काम शाम के समय ही किए जाते हैं तो उन्हें नियमित कार्यालय समय में क्यों नहीं किया जाता?
क्या दिन के समय अधिकारी और कर्मचारी सरकारी कार्यों में व्यस्त रहते हैं या फिर महत्वपूर्ण निर्णयों और ठेकेदारों से जुड़ी गतिविधियों के लिए शाम का समय जानबूझकर चुना जाता है? इसका जवाब विभागीय जांच से ही सामने आ सकता है।
कर्मचारियों को रात 9 बजे तक बैठाने का आरोप
मामला केवल ठेकेदारों की कथित आवाजाही तक सीमित नहीं है। आरोप है कि विभाग के कुछ कर्मचारियों को भी शाम 5 बजे के बाद कार्यालय में रुकना पड़ता है और कई बार रात करीब 9 बजे तक काम करना पड़ता है।
सवाल यह है कि यदि कर्मचारियों से नियमित रूप से अतिरिक्त समय काम कराया जा रहा है तो:
उन्हें किस अधिकारी के आदेश पर रोका जाता है?
अतिरिक्त कार्य का रिकॉर्ड कहां है?
क्या इसकी अनुमति सक्षम अधिकारी से ली जाती है?
क्या कर्मचारियों की उपस्थिति का अलग रिकॉर्ड बनाया जाता है?
शाम 5 से 9 बजे तक होने वाले काम की जिम्मेदारी किस अधिकारी की है?
सीसीटीवी कैमरे खोल सकते हैं ‘शाम के खेल’ का राज
इस पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इंजीनियरिंग विंग में विभाग द्वारा सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं।
ऐसे में किसी भी आरोप या दावे को केवल चर्चा मानकर छोड़ने के बजाय पिछले समय की उपलब्ध सीसीटीवी रिकॉर्डिंग की जांच की जा सकती है।
यदि पिछले महीनों की रिकॉर्डिंग में देखा जाए कि:
कौन अधिकारी शाम 5 बजे के बाद कार्यालय में रहता है, कौन-कौन कर्मचारी रात तक मौजूद रहते हैं, कौन से ठेकेदार कार्यालय में प्रवेश करते हैं और किस अधिकारी से उनकी मुलाकात होती है, तो काफी हद तक स्थिति स्पष्ट हो सकती है।
दूसरे विभागों में छुट्टी, यहां क्यों जारी रहती है ‘दूसरी पारी’?
आसपास के लोगों का कहना है कि शाम 5 बजे के बाद सामान्य तौर पर दूसरे सरकारी विभागों के अधिकारी और कर्मचारी कार्यालय से निकल जाते हैं। इसके विपरीत इंजीनियरिंग विंग में देर शाम तक गतिविधियां जारी रहने की बात सामने आ रही है।
इसी वजह से सबसे बड़ा सवाल उठ रहा है—
क्या सेक्टर-9 इंजीनियरिंग विंग में शाम 5 बजे के बाद ‘दूसरी पारी’ लगती है?
अगर लगती है तो इसका उद्देश्य क्या है?
चहेते ठेकेदारों की शाम की एंट्री क्यों?
आरोपों में सबसे गंभीर बिंदु यह है कि शाम 5 बजे के बाद कुछ कथित चहेते ठेकेदारों को कार्यालय में बुलाकर कामकाज किए जाने की बात कही जा रही है।
यदि ऐसा हो रहा है तो जांच एजेंसियों को यह भी देखना चाहिए कि पिछले वर्षों में इन ठेकेदारों को कितने काम मिले, कितने टेंडर जारी हुए, कितने कार्यादेश दिए गए और किन-किन कामों के भुगतान किए गए।
सिर्फ आरोपों के आधार पर किसी अधिकारी या ठेकेदार को दोषी नहीं ठहराया जा सकता, लेकिन रिकॉर्ड की निष्पक्ष जांच से यह जरूर पता लगाया जा सकता है कि शाम के समय होने वाली बैठकों और ठेकेदारी से जुड़े कामों का सरकारी रिकॉर्ड क्या कहता है।
टेंडर हनासमेन्ट, शॉर्ट टेंडर और भुगतान से जोड़कर भी जांच की जरूरत
इंजीनियरिंग विंग से जुड़े अन्य आरोपों की पृष्ठभूमि में यह मामला और गंभीर हो जाता है। यदि विभाग में शॉर्ट टेंडर, ठेकेदारों को काम देने, बिल पास करने, हनासमेन्ट अथवा भुगतान से संबंधित शिकायतें भी हैं तो इनकी समयबद्ध विजिलेंस जांच कराई जानी चाहिए।
जांच में यह देखा जाए कि—
टेंडर कब जारी हुआ, किसने मंजूर किया, काम किसे मिला, काम कब हुआ, माप पुस्तिका में क्या दर्ज है, बिल किसने पास किया और भुगतान कब किया गया।
साथ ही यह भी जांच हो कि संबंधित फाइलों पर शाम 5 बजे के बाद कोई असामान्य गतिविधि या प्रक्रिया तो नहीं हुई।
‘रात की बैठक’ का सरकारी रिकॉर्ड कहां है?
सबसे अहम सवाल यह है कि यदि शाम 5 से रात 9 बजे तक नियमित रूप से सरकारी काम हो रहा है तो उसका पूरा आधिकारिक रिकॉर्ड सार्वजनिक क्यों नहीं है?
क्या इसके लिए कोई आदेश जारी है?
क्या अधिकारियों की ड्यूटी का समय बढ़ाया गया है?
क्या कर्मचारियों को ओवरटाइम या अन्य नियमों के तहत भुगतान मिलता है?
क्या ठेकेदारों की शाम की बैठकों का कोई आगंतुक रजिस्टर है?
क्या सीसीटीवी रिकॉर्ड सुरक्षित रखा गया है?
इन सवालों के जवाब प्रशासन को देने चाहिए।
जांच हुई तो कई चेहरे सामने आ सकते हैं
मामले की निष्पक्ष जांच के लिए पिछले वर्षों की सीसीटीवी फुटेज, प्रवेश रजिस्टर, उपस्थिति रजिस्टर, फाइल मूवमेंट, टेंडर रिकॉर्ड, कार्यादेश, माप पुस्तिकाएं, बिल और भुगतान रिकॉर्ड को एक साथ मिलाकर जांचने की जरूरत है।
यदि आरोप निराधार हैं तो जांच से विभाग की स्थिति साफ होगी। लेकिन यदि शाम के समय किसी विशेष उद्देश्य से कार्यालय में गतिविधियां संचालित की जा रही हैं तो सरकारी व्यवस्था, पारदर्शिता और सरकारी धन—तीनों पर गंभीर सवाल खड़े होंगे।
बड़ा सवाल: सरकारी दफ्तर सुबह 10 से शाम 5 बजे तक है तो फिर रोजाना शाम 5 से रात 9 बजे तक सेक्टर-9 इंजीनियरिंग विंग में आखिर कौन-सा ‘काम’ चलता है?
सीसीटीवी कैमरे, उपस्थिति रजिस्टर और सरकारी फाइलें इस सवाल का जवाब दे सकती हैं। अब जरूरत है कि प्रशासन इन रिकॉर्डों की निष्पक्ष जांच कर सच्चाई सामने लाए।











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