October 13, 2026 4:47 pm

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आर्किटेक्चर में खूबसूरती के साथ उपयोगिता और पर्यावरण संरक्षण भी जरूरी: उमेश शर्मा

द डिज़ाइन स्टूडियो के संस्थापक बोले—आधुनिक इमारतों में स्मार्ट तकनीक, ऊर्जा दक्षता और भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखना जरूरी

रमेश गोयत
चंडीगढ़, 13 अक्तूबर। आधुनिक दौर में आर्किटेक्चर का मतलब केवल खूबसूरत इमारतें तैयार करना नहीं है, बल्कि ऐसे भवनों का निर्माण करना भी है, जो उपयोगी होने के साथ पर्यावरण के अनुकूल हों और भविष्य की जरूरतों को पूरा कर सकें। इमारतों की डिजाइन में प्राकृतिक रोशनी, बेहतर हवा की आवाजाही, ऊर्जा की बचत, आधुनिक तकनीक और लोगों की जीवनशैली को ध्यान में रखना समय की जरूरत बन गया है। द डिज़ाइन स्टूडियो, चंडीगढ़ के संस्थापक आर्किटेक्ट उमेश शर्मा का मानना है कि सफल आर्किटेक्चर वही है, जिसमें रचनात्मकता, तकनीकी विशेषज्ञता और व्यावहारिक जरूरतों के बीच बेहतर तालमेल हो।
करीब 14 वर्षों के पेशेवर अनुभव वाले उमेश शर्मा के अनुसार, आर्किटेक्चर केवल इमारतें बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सीधा संबंध लोगों के जीवन की गुणवत्ता और शहरी परिवेश को बेहतर बनाने से भी है। किसी भी परियोजना की डिजाइन तैयार करते समय उसकी सुंदरता के साथ उपयोगिता, निर्माण लागत, पर्यावरण और लंबे समय तक उसकी प्रासंगिकता पर ध्यान देना जरूरी है।
ग्राहकों की पसंद और डिजाइन की जरूरतों में आया बदलाव
उमेश शर्मा के मुताबिक, द डिज़ाइन स्टूडियो की शुरुआत ऐसे वास्तुशिल्पीय स्थान तैयार करने के उद्देश्य से की गई थी, जो देखने में आकर्षक होने के साथ व्यावहारिक और लंबे समय तक उपयोगी भी रहें। समय के साथ भवन निर्माण और डिजाइन के क्षेत्र में ग्राहकों की अपेक्षाओं में बड़ा बदलाव आया है।
पहले ग्राहक मुख्य रूप से जगह के बेहतर इस्तेमाल, निर्माण बजट और इमारत की बाहरी सुंदरता पर ध्यान देते थे। अब उनकी प्राथमिकताओं में स्मार्ट तकनीक, ऊर्जा दक्षता, पर्यावरण के अनुकूल निर्माण, आधुनिक सुविधाएं और व्यक्तिगत जरूरतों के अनुरूप डिजाइन भी शामिल हो गए हैं।
उन्होंने कहा कि आज किसी भी परियोजना को केवल एक भवन के रूप में नहीं देखा जा सकता। उसे एक संपूर्ण अनुभव के तौर पर विकसित करना होता है। इसके लिए परियोजना के स्थान, ग्राहक की जरूरतों, उपलब्ध बजट, आसपास के वातावरण और भविष्य में होने वाले बदलावों को ध्यान में रखकर योजना तैयार की जाती है।
बड़ी परियोजनाओं में गुणवत्ता बनाए रखना सबसे बड़ी चुनौती
आर्किटेक्चर के क्षेत्र में बढ़ती प्रतिस्पर्धा और बड़े प्रोजेक्ट्स की जटिलताओं पर चर्चा करते हुए शर्मा ने कहा कि किसी फर्म के विस्तार के साथ डिजाइन की गुणवत्ता और उसकी मूल पहचान को बनाए रखना बड़ी चुनौती होती है।
बड़ी परियोजनाओं में रचनात्मक डिजाइन को बजट, निर्माण स्थल की परिस्थितियों, भवन की संरचनात्मक आवश्यकताओं और सरकारी नियमों के अनुरूप तैयार करना पड़ता है। इसके साथ ही विभिन्न टीमों के बीच समन्वय स्थापित करना और निर्धारित समय पर परियोजना को पूरा करना भी महत्वपूर्ण होता है।
उनके अनुसार, इन चुनौतियों का सामना करने के लिए लगातार सीखना, नई तकनीकों को अपनाना और टीम के सदस्यों के बीच बेहतर तालमेल विकसित करना जरूरी है। आर्किटेक्चर सामूहिक प्रयास का क्षेत्र है, जहां रचनात्मक सोच के साथ तकनीकी समझ और व्यावहारिक अनुभव भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
उन्होंने कहा कि किसी फर्म की प्रगति का आकलन केवल इस आधार पर नहीं होना चाहिए कि उसने कितनी परियोजनाएं हासिल कीं। असली विकास तब होता है, जब हर नई परियोजना के साथ काम की गुणवत्ता, तकनीकी क्षमता और डिजाइन की समझ में सुधार हो।
जॉय हाइट्स सहित आवासीय और व्यावसायिक परियोजनाओं का अनुभव
द डिज़ाइन स्टूडियो की प्रमुख परियोजनाओं में ग्रेटर मोहाली स्थित जॉय हाइट्स की बहुमंजिला आवासीय परियोजना शामिल है। लगभग 90 हजार वर्गमीटर निर्मित क्षेत्रफल वाली इस समूह आवासीय परियोजना में वास्तुशिल्पीय योजना, भवनों की सुंदरता, उपयोगिता और सामुदायिक जीवन से जुड़ी जरूरतों को ध्यान में रखा गया है।
इसके अलावा, लक्सोटिका सहित विभिन्न आवासीय विकास परियोजनाओं, व्यावसायिक भवनों, होटलों, रिसॉर्ट्स और लग्जरी विला के डिजाइन का अनुभव भी फर्म के कार्यक्षेत्र का हिस्सा रहा है।
शर्मा के अनुसार, अलग-अलग प्रकार की परियोजनाओं पर काम करने से डिजाइन संबंधी अनुभव और तकनीकी क्षमताओं का विस्तार होता है। प्रत्येक परियोजना की जरूरतें अलग होती हैं, इसलिए उसके अनुरूप समाधान तैयार करना आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि किसी इमारत की सफलता केवल उसके आकार, ऊंचाई या भव्यता से तय नहीं होती। यह भी महत्वपूर्ण है कि वह अपने उपयोगकर्ताओं की जरूरतों को किस तरह पूरा करती है और उनके जीवन को कितना बेहतर बनाती है।
प्राकृतिक रोशनी, हवा और ऊर्जा की बचत पर जोर
आधुनिक आर्किटेक्चर में पर्यावरण संरक्षण और टिकाऊ निर्माण की भूमिका लगातार बढ़ रही है। उमेश शर्मा का मानना है कि भवनों की योजना बनाते समय प्राकृतिक रोशनी, हवा की बेहतर आवाजाही, स्थानीय जलवायु के अनुरूप डिजाइन और निर्माण सामग्री के सही चयन को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
ऐसी योजना से इमारतों की उपयोगिता बढ़ाने के साथ ऊर्जा की खपत कम करने में भी मदद मिल सकती है। उनके मुताबिक, पर्यावरण के अनुकूल डिजाइन अब केवल एक अतिरिक्त सुविधा नहीं, बल्कि जिम्मेदार निर्माण का महत्वपूर्ण हिस्सा बनना चाहिए।
उन्होंने कहा कि डिजाइन तैयार करने की प्रक्रिया में तकनीक का इस्तेमाल भी तेजी से बढ़ा है। त्रिआयामी दृश्यांकन, उन्नत डिजिटल चित्रण, डिजिटल कार्यप्रणाली और कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित उपकरणों से डिजाइन की विभिन्न संभावनाओं को समझने और परियोजना के अलग-अलग पहलुओं पर बेहतर समन्वय स्थापित करने में मदद मिलती है।
हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि तकनीक आर्किटेक्ट की रचनात्मक सोच का विकल्प नहीं है। इसका उद्देश्य डिजाइन प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाना और नए समाधान तलाशने के अवसर प्रदान करना है।
राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाने की योजना
आने वाले दो से तीन वर्षों की योजनाओं के बारे में उमेश शर्मा ने बताया कि द डिज़ाइन स्टूडियो का ध्यान बहुमंजिला आवासीय परियोजनाओं, प्रीमियम व्यावसायिक परिसरों, होटल एवं पर्यटन क्षेत्र से जुड़ी परियोजनाओं और लग्जरी आवासीय भवनों में अपनी विशेषज्ञता बढ़ाने पर रहेगा।
इसके साथ ही वास्तुशिल्प, आंतरिक सज्जा, भू-दृश्य डिजाइन और तकनीकी परामर्श के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करने की दिशा में भी काम किया जाएगा।
उन्होंने बताया कि भवन सूचना मॉडलिंग (बीआईएम), कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित डिजाइन और डिजिटल परियोजना समन्वय जैसी आधुनिक कार्यप्रणालियों को अधिक प्रभावी ढंग से अपनाने की योजना है। इससे डिजाइन से लेकर निर्माण तक विभिन्न चरणों में बेहतर समन्वय स्थापित करने में मदद मिल सकती है।
युवा आर्किटेक्ट्स को आगे बढ़ने के अवसर देना भी लक्ष्य
उमेश शर्मा का दीर्घकालिक लक्ष्य द डिज़ाइन स्टूडियो को राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिष्ठित और विश्वसनीय डिजाइन फर्म के रूप में स्थापित करना है। इसके साथ ही वह ऐसी पेशेवर टीम तैयार करना चाहते हैं, जहां युवा आर्किटेक्ट्स को सीखने, नए प्रयोग करने और अपनी रचनात्मक क्षमताओं को विकसित करने के पर्याप्त अवसर मिलें।
उन्होंने कहा कि आर्किटेक्चर के क्षेत्र में सफलता का अर्थ केवल एक सफल व्यवसाय स्थापित करना नहीं है। वास्तविक उपलब्धि ऐसी इमारतें और डिजाइन तैयार करना है, जो समय के साथ अपनी गुणवत्ता, उपयोगिता और पहचान बनाए रखें।
उनके अनुसार, भविष्य का आर्किटेक्चर वही होगा, जिसमें खूबसूरती के साथ उपयोगिता, तकनीक और पर्यावरण संरक्षण का संतुलन हो। ऐसी डिजाइन न केवल शहरों की सुंदरता बढ़ाएगी, बल्कि लोगों के जीवन को अधिक सुविधाजनक और टिकाऊ बनाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

 

बाबूगिरी हिंदी ब्यूरो
Author: बाबूगिरी हिंदी ब्यूरो

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