October 29, 2026 6:45 pm

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चंडीगढ़ श्रम कल्याण बोर्ड के बड़े फैसले: महिला कर्मचारियों को विवाह पर आर्थिक सहायता, मातृत्व लाभ के लिए ₹21 हजार और पेंशन दोगनी

नवजात के नाम पर ₹10 हजार की एफडी, डिजिटल शिक्षा के लिए ₹25 हजार की मदद; छात्रवृत्ति योजना का भी होगा विस्तार

बाबूगिरी न्यूज़
चंडीगढ़, 29 अक्टूबर। चंडीगढ़ में कार्यरत कर्मचारियों और उनके परिवारों की सामाजिक एवं आर्थिक सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में चंडीगढ़ श्रम कल्याण बोर्ड ने कई महत्वपूर्ण फैसले लिए हैं। बोर्ड की 9वीं बैठक में महिला कर्मचारियों के कल्याण, मातृत्व सहायता, विधवा एवं दिव्यांगता पेंशन में बढ़ोतरी, छात्रवृत्ति योजना के विस्तार और डिजिटल शिक्षा को प्रोत्साहन देने से जुड़े प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। इन फैसलों का उद्देश्य कर्मचारियों और उनके परिवारों को आर्थिक संबल प्रदान करने के साथ-साथ महिलाओं को सशक्त बनाना तथा शिक्षा के अवसरों को बढ़ावा देना है।
बोर्ड की बैठक श्रम सचिव-सह-अध्यक्ष  अनुराधा एस. चागती की अध्यक्षता में आयोजित की गई। बैठक में श्रम आयुक्त-सह-कल्याण आयुक्त निशांत कुमार यादव तथा सहायक श्रम आयुक्त-सह-सचिव, चंडीगढ़ श्रम कल्याण बोर्ड आकाश मित्तल भी उपस्थित रहे। बैठक के दौरान विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं की समीक्षा की गई और पात्र कर्मचारियों एवं उनके परिवारों को मिलने वाली आर्थिक सहायता का दायरा बढ़ाने के प्रस्तावों पर निर्णय लिया गया।

महिला कर्मचारियों को अपने विवाह के लिए भी मिलेगी सहयता
चंडीगढ़ श्रम कल्याण बोर्ड ने महिला कर्मचारियों के हित में महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए कन्यादान योजना के दायरे का विस्तार करने को मंजूरी दी है। इसके तहत अब अविवाहित महिला कर्मचारियों को अपने विवाह के लिए भी वित्तीय सहायता देने का प्रावधान शामिल किया जाएगा।
इस फैसले को महिला सशक्तिकरण की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अभी तक विवाह संबंधी सहायता योजनाओं का लाभ मुख्य रूप से परिवार की बेटियों के विवाह से जुड़ा रहता है। ऐसे में महिला कर्मचारियों को स्वयं के विवाह के लिए सहायता उपलब्ध कराने का प्रावधान उन्हें सीधे आर्थिक सहयोग देने की दिशा में अहम कदम है।
इससे पात्र महिला कर्मचारियों को विवाह के अवसर पर आर्थिक जरूरतों को पूरा करने में मदद मिल सकेगी। हालांकि, सहायता प्राप्त करने के लिए संबंधित योजना के निर्धारित दिशा-निर्देशों और पात्रता शर्तों का पालन करना होगा।

मातृत्व लाभ के लिए ₹21 हजार की वित्तीय सहायता
बोर्ड ने महिला कर्मचारियों के स्वास्थ्य, पोषण और आर्थिक सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए मातृत्व लाभ योजना के अंतर्गत ₹21,000 की वित्तीय सहायता प्रदान करने को मंजूरी दी है। यह राशि वेतन क्षतिपूर्ति और पोषण संबंधी आवश्यकताओं को पूरा करने में मदद के उद्देश्य से दी जाएगी।
मातृत्व के दौरान महिलाओं को स्वास्थ्य देखभाल, पौष्टिक आहार और नवजात शिशु की देखभाल से जुड़े अतिरिक्त खर्चों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में वित्तीय सहायता मिलने से महिला कर्मचारियों को इस महत्वपूर्ण अवधि में आर्थिक राहत मिल सकती है।
इसके साथ ही बोर्ड ने नवजात शिशु के नाम पर ₹10,000 की सावधि जमा यानी एफडीआर कराने के प्रावधान को भी मंजूरी दी है। इस पहल का उद्देश्य बच्चे के भविष्य के लिए शुरुआती स्तर पर बचत सुनिश्चित करने में मदद करना है।
इस प्रकार मातृत्व लाभ योजना के तहत महिला कर्मचारी को आर्थिक सहायता देने के साथ नवजात शिशु के नाम पर जमा राशि की व्यवस्था भी की जाएगी। यह कदम मातृत्व सुरक्षा और बच्चों के भविष्य को आर्थिक आधार देने की दिशा में महत्वपूर्ण है।

विधवा और दिव्यांगता पेंशन ₹1,000 से बढ़कर ₹2,000 प्रतिमाह
बोर्ड की बैठक में सामाजिक सुरक्षा से जुड़ा एक और अहम फैसला लिया गया। विधवा पेंशन और दिव्यांगता पेंशन की मासिक राशि ₹1,000 से बढ़ाकर ₹2,000 करने को मंजूरी दी गई है।
इस निर्णय के लागू होने के बाद संबंधित योजनाओं के पात्र लाभार्थियों को पहले की तुलना में दोगुनी मासिक पेंशन मिल सकेगी। इससे उन लोगों को आर्थिक सहायता मिलेगी, जिन्हें नियमित आय और घरेलू खर्चों के प्रबंधन में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
विधवा और दिव्यांगता पेंशन जैसी योजनाएं जरूरतमंद लाभार्थियों को आर्थिक सहारा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। पेंशन राशि में बढ़ोतरी से पात्र लोगों को दैनिक जरूरतों, घरेलू खर्चों और अन्य आवश्यकताओं को पूरा करने में कुछ अतिरिक्त राहत मिलने की उम्मीद है।
हालांकि, बढ़ी हुई पेंशन का लाभ संबंधित योजना के नियमों और निर्धारित पात्रता मानदंडों के अनुसार ही दिया जाएगा।

नौकरी के साथ पढ़ाई करने वाले कर्मचारियों को भी छात्रवृत्ति
कर्मचारियों को शिक्षा जारी रखने और अपने कौशल में सुधार करने के लिए प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से बोर्ड ने छात्रवृत्ति योजना का विस्तार करने का फैसला किया है।
इसके तहत स्व-अध्ययन के माध्यम से शिक्षा प्राप्त कर रहे कार्यरत कर्मचारियों को भी योजना के दायरे में शामिल करने की मंजूरी दी गई है। इससे उन कर्मचारियों को लाभ मिलने का रास्ता खुलेगा, जो नौकरी के साथ अपनी पढ़ाई जारी रखना चाहते हैं और नियमित शिक्षण संस्थान में उपस्थित हुए बिना अध्ययन कर रहे हैं।
यह फैसला कर्मचारियों के शैक्षणिक विकास और कौशल वृद्धि के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है। शिक्षा और प्रशिक्षण के अवसर बढ़ने से कर्मचारियों को अपने ज्ञान में सुधार करने तथा भविष्य में बेहतर रोजगार और व्यावसायिक संभावनाएं तलाशने में मदद मिल सकती है।

डिजिटल शिक्षा के लिए ₹25 हजार तक की सहायता

तकनीक आधारित शिक्षा के बढ़ते महत्व को देखते हुए चंडीगढ़ श्रम कल्याण बोर्ड ने नई डिजिटल शिक्षा योजना शुरू करने को भी मंजूरी दी है। इस योजना के अंतर्गत पात्र लाभार्थियों को लैपटॉप अथवा अन्य निर्धारित डिजिटल शिक्षण उपकरण खरीदने के लिए ₹25,000 की वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी।
बोर्ड के निर्णय के अनुसार यह लाभ निर्धारित शर्तों के तहत जीवनकाल में एक बार उपलब्ध होगा। इस योजना का उद्देश्य डिजिटल माध्यमों से शिक्षा प्राप्त करने वाले लाभार्थियों को आवश्यक उपकरण उपलब्ध कराने में आर्थिक सहायता देना है।
आज के दौर में ऑनलाइन अध्ययन, डिजिटल पाठ्य सामग्री, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी और कौशल विकास के लिए कंप्यूटर एवं अन्य डिजिटल उपकरणों की उपयोगिता लगातार बढ़ रही है। ऐसे में यह सहायता पात्र लाभार्थियों के लिए उपयोगी साबित हो सकती है।
डिजिटल शिक्षा योजना से कर्मचारियों और योजना के तहत पात्र अन्य लाभार्थियों को तकनीक आधारित अध्ययन के अवसरों का लाभ उठाने में मदद मिलेगी। हालांकि, सहायता प्राप्त करने के लिए किन उपकरणों को निर्धारित श्रेणी में शामिल किया जाएगा और आवेदन की प्रक्रिया क्या होगी, इसका निर्धारण संबंधित योजना के दिशा-निर्देशों के अनुसार होगा।

कर्मचारियों और परिवारों की सामाजिक सुरक्षा पर जोर
चंडीगढ़ श्रम कल्याण बोर्ड की 9वीं बैठक में लिए गए निर्णयों का प्रमुख उद्देश्य कर्मचारियों और उनके परिवारों के कल्याण को बढ़ावा देना है। महिला कर्मचारियों के विवाह और मातृत्व से जुड़े लाभों का विस्तार, विधवा एवं दिव्यांगता पेंशन में वृद्धि, छात्रवृत्ति योजना का दायरा बढ़ाना और डिजिटल शिक्षा के लिए सहायता देना इसी दिशा में उठाए गए कदम हैं।
इन फैसलों के माध्यम से बोर्ड ने आर्थिक सहायता के साथ-साथ शिक्षा, महिला सशक्तिकरण और सामाजिक सुरक्षा से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर ध्यान केंद्रित किया है। खास बात यह है कि प्रस्तावित लाभ कर्मचारियों की अलग-अलग जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किए गए हैं।
बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि स्वीकृत कल्याणकारी उपायों को संबंधित योजनाओं के निर्धारित दिशा-निर्देशों और पात्रता मानदंडों के अनुसार लागू किया जाएगा। ऐसे में कर्मचारियों और अन्य संभावित लाभार्थियों को आवेदन करने से पहले संबंधित योजना की शर्तों, आवश्यक दस्तावेजों और आवेदन प्रक्रिया की जानकारी प्राप्त करनी होगी।
कुल मिलाकर, चंडीगढ़ श्रम कल्याण बोर्ड के इन फैसलों से पात्र महिला कर्मचारियों, विधवाओं, दिव्यांग लाभार्थियों और शिक्षा जारी रखने वाले कर्मचारियों को अतिरिक्त आर्थिक सहायता मिलने का रास्ता खुलेगा। योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन यह तय करेगा कि इन फैसलों का लाभ जरूरतमंद लोगों तक कितनी आसानी और समयबद्ध तरीके से पहुंच पाता है।

बाबूगिरी हिंदी ब्यूरो
Author: बाबूगिरी हिंदी ब्यूरो

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