September 21, 2026 11:37 am

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राजधानी दिल्ली में साइबर ठगों का बढ़ता जाल; ग्रेटर कैलाश में 70 वर्षीय महिला बनी 7 करोड़ की साइबर ठगी का शिकार

नई दिल्ली। देश की राजधानी दिल्ली में साइबर अपराधियों का आतंक तेजी से बढ़ता जा रहा है। बीते एक सप्ताह के भीतर साउथ दिल्ली से साइबर ठगी के दो बड़े मामले सामने आए हैं, जिनमें बुजुर्गों को निशाना बनाकर करोड़ों रुपये की ठगी की गई। ताजा मामला ग्रेटर कैलाश इलाके का है, जहां 70 वर्षीय बुजुर्ग महिला को डराकर, धमकाकर और तीन दिन तक ‘डिजिटल अरेस्ट’ में रखकर साइबर ठगों ने करीब 7 करोड़ रुपये की रकम ठग ली।

ग्रेटर कैलाश में 70 वर्षीय महिला बनी साइबर ठगी का शिकार
पीड़िता ग्रेटर कैलाश इलाके में अकेली रहती हैं। उनका पारिवारिक व्यवसाय फर्नीचर से जुड़ा हुआ है। महिला का बेटा ऑस्ट्रेलिया में रहता है, जबकि बेटी गुरुग्राम में रहती है। साइबर ठगों को जैसे ही यह जानकारी मिली कि महिला घर में अकेली हैं, उन्होंने योजनाबद्ध तरीके से उन्हें अपने जाल में फंसाना शुरू कर दिया।

मनी लॉन्ड्रिंग का डर दिखाकर रची गई साजिश
महिला के अनुसार 5 जनवरी को उनके मोबाइल फोन पर एक कॉल आया। कॉल करने वाले ने खुद को पुलिस अधिकारी बताते हुए कहा कि उनके सिम कार्ड का इस्तेमाल मनी लॉन्ड्रिंग और अन्य अवैध गतिविधियों में किया गया है। आरोपी ने महिला को बताया कि उनके खिलाफ कई मामले दर्ज हैं और जल्द ही गिरफ्तारी हो सकती है।
वीडियो कॉल के जरिए किया गया ‘डिजिटल अरेस्ट’
जब महिला ने इन आरोपों से इनकार किया, तो आरोपियों ने वीडियो कॉल के माध्यम से ‘डिजिटल अरेस्ट’ करने की धमकी दी। उन्हें यह बताया गया कि अब वे पुलिस की निगरानी में हैं और किसी से भी संपर्क नहीं कर सकतीं। ठगों ने महिला को इतना डरा दिया कि उन्हें अपने बच्चों से बात करने तक की इजाजत नहीं दी गई। अगर परिवार से बात होती भी थी, तो वीडियो कॉल ऑन रखने का दबाव बनाया जाता था।

तीन दिन तक मानसिक दबाव, घर में ही रखा बंधक
आरोपियों ने महिला को तीन दिन तक मानसिक रूप से प्रताड़ित किया। उन्हें बार-बार गिरफ्तारी और जेल भेजने की धमकी दी जाती रही। महिला को यह महसूस कराया गया कि वे कानून तोड़ चुकी हैं और पुलिस की निगरानी में हैं। इसी डर के चलते महिला ने ठगों के हर निर्देश का पालन किया।

9 से 12 जनवरी के बीच तीन बड़े बैंक ट्रांजैक्शन
डर और मानसिक दबाव में आकर महिला ने 9 जनवरी से 12 जनवरी के बीच तीन अलग-अलग बड़े ट्रांजैक्शन किए। आरोपियों द्वारा बताए गए विभिन्न बैंक खातों में कुल 7 करोड़ रुपये ट्रांसफर कर दिए गए। ठगों ने महिला को यह भी कहा कि जांच पूरी होने के बाद पैसा वापस कर दिया जाएगा।

बच्चों से संपर्क होते ही सामने आया पूरा मामला
मंगलवार को जब महिला के बच्चों ने फोन किया, तब उन्होंने पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी। बच्चों को जैसे ही ठगी का अहसास हुआ, उन्होंने तुरंत पुलिस से संपर्क किया और पूरे मामले की शिकायत दर्ज कराई।

स्पेशल सेल से IFSO तक पहुंची जांच
बुधवार को महिला के परिजनों ने दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल को लिखित शिकायत दी। शुरुआती जांच के बाद मामला साइबर सेल IFSO (इंटेलिजेंस फ्यूजन एंड स्ट्रैटेजिक ऑपरेशंस यूनिट) को सौंप दिया गया। फिलहाल इस मामले में किसी आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हो पाई है।

IFSO के डीसीपी विनीत कुमार का बयान
IFSO के डीसीपी विनीत कुमार ने बताया कि पीड़िता ने तीन से चार दिनों के भीतर आरोपियों के बताए खातों में पैसे ट्रांसफर किए हैं। इस मामले में एफआईआर दर्ज कर ली गई है। जिन बैंक खातों में रकम ट्रांसफर हुई है, उनकी जानकारी जुटाई जा रही है और जल्द ही उन खातों को सीज किया जाएगा। आरोपियों की पहचान के लिए तकनीकी साक्ष्यों की मदद ली जा रही है।

दिल्ली में लगातार बढ़ रहे साइबर ठगी के मामले
गौरतलब है कि इससे कुछ दिन पहले ही दिल्ली में एक एनआरआई दंपति से करीब 14 करोड़ 50 लाख रुपये की साइबर ठगी का मामला सामने आया था, जिसकी जांच अभी जारी है। लगातार सामने आ रहे ऐसे मामलों ने राजधानी में साइबर सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

पुलिस की अपील: सतर्क रहें, जागरूक बनें
दिल्ली पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी भी अनजान कॉल, वीडियो कॉल या डिजिटल अरेस्ट जैसी धमकियों से सावधान रहें। पुलिस या किसी भी सरकारी एजेंसी द्वारा इस तरह से फोन या वीडियो कॉल पर गिरफ्तारी नहीं की जाती। किसी भी संदिग्ध कॉल की तुरंत सूचना पुलिस या साइबर हेल्पलाइन पर देने की सलाह दी गई है।

बाबूगिरी हिंदी ब्यूरो
Author: बाबूगिरी हिंदी ब्यूरो

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