May 4, 2026 6:12 pm

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चंडीगढ़ मेयर चुनाव: बदले सियासी समीकरण, कांग्रेस-AAP अलग, बीजेपी को बढ़त, तीनो पार्टीयो ने किया नामांकन

चंडीगढ़: चंडीगढ़ नगर निगम मेयर चुनाव से पहले राजनीतिक माहौल पूरी तरह गर्मा गया है। पहले कांग्रेस और आम आदमी पार्टी (AAP) के बीच गठबंधन की संभावनाएं जताई जा रही थीं, लेकिन अब दोनों दलों ने अलग-अलग चुनाव लड़ने का फैसला कर लिया है। इस घटनाक्रम के बाद मेयर चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) को साफ बढ़त मिलती नजर आ रही है।

कांग्रेस का बड़ा ऐलान: अकेले लड़ेगी चुनाव
चंडीगढ़ कांग्रेस अध्यक्ष एचएस लक्की ने स्पष्ट किया है कि कांग्रेस मेयर, सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर—तीनों पदों के लिए अपने उम्मीदवार उतारेगी। उन्होंने कहा कि पार्टी संगठन और पार्षदों की सहमति से यह फैसला लिया गया है। कांग्रेस के इस रुख के बाद AAP के साथ संभावित गठबंधन की सभी अटकलों पर विराम लग गया।

AAP ने भी गठबंधन से किया इनकार
आम आदमी पार्टी ने भी कांग्रेस के साथ किसी भी तरह के गठबंधन को नकार दिया है। AAP के पंजाब प्रभारी जरनैल सिंह ने कहा कि पार्टी पूरी मजबूती के साथ अपने दम पर चुनाव लड़ेगी। उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी और कांग्रेस दोनों ही पार्टियां जनता के हितों के खिलाफ काम करती रही हैं, जबकि आम आदमी पार्टी आम लोगों की आवाज बनकर चुनाव मैदान में उतरेगी।
तीनों दलों ने घोषित किए अपने-अपने उम्मीदवार
मेयर चुनाव को लेकर सभी प्रमुख राजनीतिक दलों ने अपने उम्मीदवारों की घोषणा कर दी है, जिससे मुकाबला अब त्रिकोणीय हो गया है।

आम आदमी पार्टी (AAP):
मेयर उम्मीदवार: योगेश ढींगरा
सीनियर डिप्टी मेयर उम्मीदवार: मुन्नवर खान
डिप्टी मेयर उम्मीदवार: जसविंदर कौर

गुरप्रीत गाबी मेयर के लिए कांग्रेस से नामांकन करते हुए

 

कांग्रेस:
मेयर उम्मीदवार: गुरप्रीत गाबी
सीनियर डिप्टी मेयर उम्मीदवार: सचिन गालिब
डिप्टी मेयर उम्मीदवार: निर्मला देवी

सौरभ जोशी भाजपा से मेयर के लिए नामांकन करते हुए

 

भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी):
मेयर उम्मीदवार: सौरभ जोशी
सीनियर डिप्टी मेयर उम्मीदवार: जसवंतप्रीत सिंह
डिप्टी मेयर उम्मीदवार: सुमन शर्मा

AAP को दलबदली का डर, पार्षदों की कड़ी निगरानी
AAP को अपने पार्षदों की टूट-फूट का अंदेशा है। इसी आशंका के चलते पार्टी ने अपने सभी 11 पार्षदों को रोपड़ के एक होटल में ठहराया है। पार्टी सूत्रों के अनुसार, पार्षदों के मोबाइल फोन बंद कर दिए गए हैं और चुनाव प्रक्रिया पूरी होने तक उन्हें शहर से बाहर रखा जाएगा। नामांकन और मतदान के समय ही पार्षदों को चंडीगढ़ लाया जाएगा।

क्यों नहीं बन पाया कांग्रेस-AAP गठबंधन
राजनीतिक विश्लेषकों की मानें तो कांग्रेस और AAP के बीच गठबंधन की सहमति केवल मौखिक स्तर तक ही सीमित रही। पंजाब विधानसभा चुनाव को लेकर दोनों दलों की अपनी-अपनी रणनीति थी। यदि चंडीगढ़ में गठबंधन होता, तो आने वाले पंजाब विधानसभा चुनाव में दोनों पार्टियों को जनता के बीच सफाई देनी पड़ सकती थी। इसी कारण पंजाब यूनिट के दबाव में आकर दोनों दलों ने अलग-अलग चुनाव लड़ने का फैसला किया।

जानिए पूरा चुनावी गणित
चंडीगढ़ नगर निगम में कुल 35 पार्षद हैं, जबकि एक सांसद को भी वोट देने का अधिकार है। इस तरह कुल 36 वोटों में से मेयर बनने के लिए 19 वोटों की आवश्यकता होती है।
बीजेपी: 18 पार्षद
AAP: 11 पार्षद
कांग्रेस: 6 पार्षद

यदि कांग्रेस और AAP का गठबंधन होता, तो दोनों के पास कुल 17 पार्षद होते और सांसद के वोट के साथ मुकाबला कांटे का बन सकता था। लेकिन गठबंधन टूटने के बाद बीजेपी की स्थिति मजबूत हो गई है और उसकी जीत के रास्ते लगभग साफ माने जा रहे हैं।

मतदान प्रक्रिया में बदलाव की चर्चा
इस बार मेयर चुनाव की मतदान प्रक्रिया में बदलाव की भी चर्चा है। पहले मतदान सीक्रेट बैलेट के जरिए होता था, लेकिन इस बार हाथ उठाकर मतदान कराने का प्रस्ताव सामने आया है। हालांकि, इस पर अभी अंतिम फैसला नहीं लिया गया है। यदि यह बदलाव लागू होता है, तो चुनाव की पारदर्शिता और राजनीतिक रणनीतियों पर इसका सीधा असर देखने को मिल सकता है।

कांग्रेस और AAP के अलग-अलग चुनाव लड़ने के फैसले ने चंडीगढ़ मेयर चुनाव को दिलचस्प जरूर बना दिया है, लेकिन मौजूदा संख्या बल के लिहाज से बीजेपी सबसे मजबूत स्थिति में नजर आ रही है। अब सबकी निगाहें मतदान प्रक्रिया और अंतिम वोटिंग पर टिकी हैं, जो यह तय करेगी कि चंडीगढ़ को अगला मेयर कौन मिलेगा।

बाबूगिरी हिंदी ब्यूरो
Author: बाबूगिरी हिंदी ब्यूरो

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