न्यूयॉर्क: वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को अमेरिका ले जाए जाने के बाद अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल तेज हो गई है। वेनेजुएला की उपराष्ट्रपति डेल्सी रॉड्रिग्ज ने अमेरिका से मादुरो को तत्काल रिहा करने की मांग करते हुए उन्हें देश का वैध राष्ट्रपति बताया। रॉड्रिग्ज ने कहा कि मादुरो इस समय किस स्थिति में हैं, इसकी उन्हें कोई स्पष्ट जानकारी नहीं है।
इस बीच, पूर्व अमेरिकी उपराष्ट्रपति कमला हैरिस ने ट्रंप प्रशासन की इस कार्रवाई का कड़ा विरोध किया है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए हैरिस ने कहा कि वेनेजुएला में डोनाल्ड ट्रंप की कार्रवाई से अमेरिका न तो ज्यादा सुरक्षित हुआ है और न ही मजबूत। उन्होंने इसे गैर-कानूनी और गैर-जिम्मेदार कदम बताते हुए कहा कि सरकार बदलने या तेल के नाम पर की जाने वाली लड़ाइयों का अंजाम अक्सर अराजकता होता है, जिसकी कीमत अमेरिकी परिवारों को चुकानी पड़ती है। हैरिस ने आरोप लगाया कि यह कदम ड्रग्स या लोकतंत्र नहीं, बल्कि तेल और क्षेत्र में वर्चस्व की राजनीति से जुड़ा है।
न्यूयॉर्क सिटी के मेयर जोहरान ममदानी ने भी मादुरो की गिरफ्तारी का विरोध किया है। उन्होंने इस मुद्दे पर सीधे राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से बातचीत की और कहा कि वेनेजुएला एक संप्रभु राष्ट्र है तथा अमेरिका की यह कार्रवाई युद्ध के समान है। ममदानी के मुताबिक, मादुरो और उनकी पत्नी सिलिया फ्लोरेस इस समय न्यूयॉर्क के साउदर्न डिस्ट्रिक्ट में हैं और वह इस पूरे घटनाक्रम का विरोध करते हैं।
संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुतारेस ने भी अमेरिका की कार्रवाई पर गंभीर चिंता जताई है। उनके प्रवक्ता द्वारा जारी बयान में कहा गया कि वेनेजुएला में अमेरिका की सैन्य कार्रवाई और राष्ट्रपति को देश से बाहर ले जाना “खतरनाक मिसाल” कायम करता है। गुतारेस ने कहा कि इन घटनाओं में अंतरराष्ट्रीय कानून के सम्मान को नजरअंदाज किया गया है, जो वैश्विक व्यवस्था के लिए चिंताजनक है।
अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, मादुरो और उनकी पत्नी पर न्यूयॉर्क के संघीय अधिकारियों ने मादक पदार्थों से जुड़े आतंकवाद की साजिश और अमेरिका के खिलाफ विनाशकारी उपकरण रखने की साजिश जैसे गंभीर आरोपों में अभियोग लगाया है।
वहीं, अमेरिका का कहना है कि महीनों से बढ़ते दबाव के बाद उसने वेनेजुएला में बड़े पैमाने पर कार्रवाई कर मादुरो को हिरासत में लिया। इस घटनाक्रम के बाद वेनेजुएला के कुछ हिस्सों में विरोध प्रदर्शन देखने को मिले, हालांकि अमेरिकी मीडिया का दावा है कि देश के कई इलाकों में लोग इस कदम से खुश हैं और अमेरिका की कार्रवाई का समर्थन कर रहे हैं।











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