April 6, 2026 4:59 am

April 6, 2026 4:59 am

अमेरिका–वेनेजुएला तनाव से कच्चे तेल बाजार में हलचल, भारत पर भी पड़ सकता है असर

नई दिल्ली: अमेरिका और वेनेजुएला के बीच बढ़ते तनाव ने वैश्विक कच्चे तेल बाजार में चिंता बढ़ा दी है। अमेरिका की ओर से वेनेजुएला पर सैन्य और राजनीतिक दबाव के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तेल की कीमतों और आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता गहरा गई है। इसका असर भारत जैसे बड़े तेल आयातक देशों पर भी पड़ सकता है।

फिलहाल अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें करीब 60 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बनी हुई हैं। वेनेजुएला के पास दुनिया के सबसे बड़े प्रमाणित तेल भंडार हैं, लेकिन अमेरिकी प्रतिबंधों और राजनीतिक अस्थिरता के चलते उसका तेल निर्यात पहले से ही सीमित रहा है। शनिवार को आई रिपोर्ट के अनुसार, देश की प्रमुख रिफाइनिंग इकाइयां सामान्य रूप से काम कर रही थीं और अमेरिकी कार्रवाई का उत्पादन या रिफाइनिंग पर तात्कालिक रूप से कोई बड़ा असर नहीं दिखा।
रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, वेनेजुएला का सरकारी तेल उत्पादन और रिफाइनिंग फिलहाल सामान्य बनी हुई है। इस बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया कि राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को पकड़ लिया गया है। मादुरो पर ड्रग तस्करी और सत्ता में अवैध रूप से बने रहने जैसे आरोप लगते रहे हैं। हालांकि, कराकस के पास स्थित ला गुआरा बंदरगाह को नुकसान पहुंचा, लेकिन यह बंदरगाह मुख्य रूप से तेल निर्यात के लिए इस्तेमाल नहीं होता।
दिसंबर में अमेरिका द्वारा लगाए गए नए प्रतिबंधों और तेल टैंकरों की नाकाबंदी से वेनेजुएला की सरकारी तेल कंपनी PDVSA के संचालन पर असर पड़ा है। कई जहाज मालिकों ने वेनेजुएला के जलक्षेत्र से अपने मार्ग बदल लिए, जिससे तेल का स्टॉक बढ़ा और डिलीवरी में देरी हुई। मॉनिटरिंग डेटा के अनुसार, नवंबर में वेनेजुएला का करीब 9.5 लाख बैरल प्रतिदिन का निर्यात लक्ष्य था, लेकिन इसका केवल आधा ही निर्यात हो सका।
चीन सबसे बड़ा आयातक, भारत की भूमिका भी अहम
वेनेजुएला का सबसे बड़ा तेल आयातक चीन है, लेकिन भारत के लिए भी यह समीकरण अहम है। अमेरिकी प्रतिबंधों के चलते 2021-22 और 2022-23 में भारत का वेनेजुएला से तेल आयात घटकर क्रमशः 89 मिलियन डॉलर और 250 मिलियन डॉलर रह गया था। हालांकि 2023-24 में हालात सुधरे और भारत-वेनेजुएला तेल व्यापार दोबारा पटरी पर आया। इस दौरान कुछ समय के लिए भारत वेनेजुएला का सबसे बड़ा खरीदार भी बना।

लंबा चला संघर्ष तो बढ़ सकती हैं कीमतें
विश्लेषकों का मानना है कि मौजूदा समय में वैश्विक तेल बाजार में ओवरसप्लाई होने के कारण अमेरिका की सैन्य कार्रवाई का तत्काल असर सीमित रहेगा। लेकिन अगर संघर्ष लंबा चलता है या प्रतिबंध और सख्त होते हैं, तो कच्चे तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में तेजी आ सकती है। इसका सीधा असर भारत की आयात लागत और घरेलू ईंधन कीमतों पर पड़ेगा।
विशेषज्ञों का कहना है कि भारत को तेल आयात और घरेलू बाजार पर लगातार नजर बनाए रखनी होगी, ताकि आपूर्ति में किसी भी तरह की अस्थिरता और कीमतों में संभावित उछाल के प्रभाव को कम किया जा सके।

BabuGiri Hindi
Author: BabuGiri Hindi

बाबूगिरी हिंदी

virender chahal

Our Visitor

2 9 1 3 4 6
Total Users : 291346
Total views : 493642

शहर चुनें