रमेश गोयत
चंडीगढ़, 21 मार्च: हरियाणा सरकार ने राजस्व प्रशासन में बड़ा डिजिटल सुधार लागू करने की दिशा में अहम कदम उठाया है। राज्यभर में पटवारियों और कानूनगो को आधुनिक तकनीक से लैस करने के लिए 4,156 स्मार्ट टैबलेट खरीदने को मंजूरी दी गई है। इस महत्वाकांक्षी पहल को मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और राजस्व एवं आपदा प्रबंधन मंत्री विपुल गोयल ने स्वीकृति दी है।
इस फैसले का उद्देश्य फील्ड स्तर पर कामकाज को डिजिटल बनाना, प्रक्रियाओं में पारदर्शिता लाना और राजस्व सेवाओं की डिलीवरी को तेज व प्रभावी बनाना है। सरकार का मानना है कि इससे खासकर ग्रामीण और कृषि क्षेत्रों में लोगों को सीधा लाभ मिलेगा।
वित्त आयुक्त (राजस्व एवं आपदा प्रबंधन) डॉ. सुमिता मिश्रा ने बताया कि यह पहल सरकार की डिजिटल गवर्नेंस को जमीनी स्तर तक पहुंचाने की प्रतिबद्धता को दर्शाती है। उन्होंने कहा कि अब तकनीक केवल दफ्तरों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि फील्ड में काम करने वाले अधिकारियों के हाथों तक पहुंचेगी, जिससे आम नागरिकों को सेवाएं तेजी और पारदर्शिता के साथ मिल सकेंगी।
मैनुअल सिस्टम से डिजिटल बदलाव की ओर
अब तक पटवारी और कानूनगो मैनुअल रिकॉर्ड, हाथ से बने नक्शों और भारी-भरकम कागजी प्रक्रिया पर निर्भर थे, जिससे काम में देरी और त्रुटियों की संभावना बनी रहती थी। नए टैबलेट मिलने के बाद अधिकारी मौके पर ही फील्ड सर्वे, डेटा एंट्री, जीपीएस-टैग्ड फोटो और रिपोर्टिंग कर सकेंगे। यह डेटा सीधे रियल टाइम में केंद्रीय सर्वर पर अपलोड होगा, जिससे रिकॉर्ड अपडेट रहने के साथ पारदर्शिता भी सुनिश्चित होगी।
आधुनिक फीचर्स से लैस होंगे टैबलेट
सरकार द्वारा उपलब्ध कराए जाने वाले टैबलेट अत्याधुनिक फीचर्स से लैस होंगे। इनमें बड़ा डिस्प्ले, तेज प्रोसेसर, पर्याप्त स्टोरेज और लंबी बैटरी लाइफ शामिल है, जिससे पूरे दिन फील्ड में काम करना आसान होगा। इसके अलावा 5G और LTE कनेक्टिविटी, जीपीएस और हाई-क्वालिटी इमेजिंग सुविधाएं भी उपलब्ध होंगी, जिससे दूरदराज के क्षेत्रों में भी काम प्रभावित नहीं होगा।
क्लाउड और MDM से होगी निगरानी
सभी 4,156 टैबलेट को दो साल के क्लाउड-होस्टेड लाइसेंस और मोबाइल डिवाइस मैनेजमेंट (MDM) सिस्टम से जोड़ा जाएगा। इससे सरकार इन डिवाइस की रियल टाइम मॉनिटरिंग, अपडेट, सुरक्षा और प्रबंधन कर सकेगी। यह व्यवस्था डेटा की सुरक्षा, शुद्धता और जवाबदेही को सुनिश्चित करेगी।
किसानों और आम जनता को होगा सीधा लाभ
इस डिजिटल पहल से राजस्व सेवाओं में देरी कम होगी, त्रुटियां घटेंगी और अनियमितताओं पर रोक लगेगी। किसानों को भूमि रिकॉर्ड, फसल सर्वेक्षण और अन्य सेवाएं अब तेज और विश्वसनीय तरीके से मिलेंगी। उन्हें बार-बार सरकारी कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे, जिससे समय और संसाधनों की बचत होगी।
पारदर्शी और जवाबदेह शासन की दिशा में कदम
डॉ. सुमिता मिश्रा ने कहा कि इस पहल के हर चरण में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की गई है—चाहे वह खरीद प्रक्रिया हो या उपकरणों का उपयोग। उन्होंने कहा कि फील्ड अधिकारियों को डिजिटल उपकरणों से सशक्त बनाकर सरकार एक अधिक पारदर्शी, उत्तरदायी और नागरिक-केंद्रित शासन प्रणाली स्थापित करने की दिशा में आगे बढ़ रही है।
यह पहल हरियाणा के राजस्व प्रशासन को आधुनिक बनाने के साथ-साथ डिजिटल इंडिया की दिशा में एक मजबूत कदम मानी जा रही है, जिससे आने वाले समय में प्रशासनिक कार्यप्रणाली में व्यापक बदलाव देखने को मिलेगा।











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