October 13, 2026 4:25 pm

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पंचकूला के सिविल अस्पताल में दूसरी एचआईवी वायरल लोड टेस्टिंग लैब स्थापित होगी

सालाना लगभग 15,000 टेस्ट करेगी यह लैब

चंडीगढ़, 26 मार्च – हरियाणा स्वास्थ्य विभाग ने पंचकूला के सिविल अस्पताल में एक एचआईवी वायरल लोड टेस्टिंग लैब स्थापित करने की मंज़ूरी दे दी है। इसके साथ ही, हरियाणा में यह दूसरी समर्पित सुविधा होगी ,इस प्रकार की लैब की सुविधा पहले रोहतक में स्थित है।

 

यह जानकारी स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण की अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. सुमिता मिश्रा ने दी। उन्होंने बताया कि इस लैब को सालाना 1.65 करोड़ रुपये की लागत पर मंज़ूरी दी गई है, जो सालाना लगभग 15,000 एचआईवी वायरल लोड टेस्ट के अनुमानित कार्यभार पर आधारित है।

 

उन्होंने बताया कि इस नई लैब को पंचकूला के सिविल अस्पताल में पहले से मौजूद Covid-19 मॉलिक्यूलर टेस्टिंग इंफ्रास्ट्रक्चर का इस्तेमाल करके स्थापित किया जाएगा। इसके साथ ही, एचआईवी वायरल लोड टेस्टिंग के लिए ज़रूरी अतिरिक्त उपकरण भी खरीदे जाएंगे। इस तरीके से यह सुनिश्चित होता है कि सुविधा को तेज़ी से चालू किया जा सके, और इसके लिए पूरी तरह से एक नया सेटअप बनाने की ज़रूरत न पड़े।

 

यह प्रोजेक्ट हरियाणा राज्य एड्स नियंत्रण सोसायटी (HSACS) से मिले सुझावों के आधार पर तैयार किया गया था, जबकि इसका तकनीकी मूल्यांकन राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण संगठन (NACO) द्वारा स्वतंत्र रूप से किया गया — जो देश में HIV/AIDS से निपटने वाली सर्वोच्च संस्था है। राष्ट्रीय दिशानिर्देशों के अनुरूप, प्रति एचआईवी वायरल लोड टेस्ट की लागत 1,100 रुपये तय की गई है।

 

पूरी लागत NACO उठाएगा — राज्य के खजाने पर कोई बोझ नहीं

 

खास बात यह है कि इस टेस्टिंग सुविधा को स्थापित करने और चलाने का पूरा खर्च राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण संगठन (NACO) उठाएगा, जिससे हरियाणा राज्य सरकार पर कोई वित्तीय बोझ नहीं पड़ेगा।

 

डॉ. मिश्रा ने आगे कहा कि यह एक ऐसा मॉडल है जिसे अन्य राज्य भी अपनाकर अपने बजट पर बिना कोई बोझ डाले अपनी एचआईवी जांच क्षमता का विस्तार कर सकते हैं।

 

उन्होंने बताया कि एचआईवी -पॉजिटिव व्यक्तियों के लिए, नियमित वायरल लोड टेस्टिंग कोई वैकल्पिक चीज़ नहीं है बल्कि यह बेहद ज़रूरी है। ये टेस्ट डॉक्टरों को यह पता लगाने में मदद करते हैं कि क्या एंटीरेट्रोवायरल थेरेपी (ART) प्रभावी ढंग से काम कर रही है, इलाज में विफलता का जल्द पता लगाने में मदद करते हैं, और वायरस को दवाओं के प्रति प्रतिरोधी बनने से रोकते हैं। वायरल लोड टेस्टिंग की समय पर सुविधा न मिलने पर, मरीज़ों को इलाज में देरी और सेहत से जुड़ी खराब स्थितियों का सामना करना पड़ता है। फ़िलहाल, हरियाणा के सभी ज़िलों से सैंपल पीजीआईएमएस रोहतक भेजे जाते हैं। यह नई लैब टेस्टिंग में लगने वाले समय को काफ़ी कम कर देगी, जिससे एचआईवी पॉज़िटिव मरीज़ों की बेहतर निगरानी हो सकेगी।

 

डॉ. मिश्रा ने कहा कि इस लैब के शुरू होने से एचआईवी की समय पर जाँच और निगरानी की सुविधा में काफ़ी सुधार होगा। इससे उन मरीज़ों को फ़ायदा होगा जिन्हें नियमित रूप से वायरल लोड टेस्टिंग की ज़रूरत होती है, और हरियाणा में एचआईवी /एड्स के ख़िलाफ़ चल रहे प्रयासों को भी मज़बूती मिलेगी।

 

पंचकूला की एचआईवी वायरल लोड लैब, हरियाणा सरकार की उस बड़ी पहल का हिस्सा है जिसका मकसद खास तरह की स्वास्थ्य सेवाओं को विकेंद्रित करना और उन्हें उन लोगों तक पहुँचाना है जिन्हें इनकी सबसे ज़्यादा ज़रूरत है। मौजूदा इंफ़्रास्ट्रक्चर का दोबारा इस्तेमाल करके, राष्ट्रीय संस्थाओं के साथ मिलकर काम करके, और राज्य पर कोई अतिरिक्त आर्थिक बोझ न पड़ने देकर, यह पहल एक कुशल और मरीज़-केंद्रित शासन का बेहतरीन उदाहरण पेश करती है।

 

डॉ मिश्रा ने कहा कि हर साल लगभग 15,000 टेस्ट किए जाने का अनुमान है। उम्मीद है कि यह लैब हरियाणा के एचआईवी देखभाल और इलाज नेटवर्क में एक अहम कड़ी साबित होगी, जिससे जाँच में होने वाली देरी कम होगी, इलाज की बेहतर निगरानी हो सकेगी, और अंततः लोगों की जान बचाई जा सकेगी।

बाबूगिरी हिंदी ब्यूरो
Author: बाबूगिरी हिंदी ब्यूरो

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