June 15, 2026 4:24 pm

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आधुनिक हरियाणा के शिल्पी — चौधरी बंसी लाल

किसी भी देश, प्रदेश और समाज की सबसे बड़ी धरोहर उसके दूरदर्शी, कर्मठ और भविष्यदृष्टा नेता होते हैं। ऐसे नेता केवल शासन नहीं करते, बल्कि समाज में चेतना, आत्मविश्वास और गर्व की भावना पैदा करते हैं। वे अपने सपनों को साकार करने के लिए अथक परिश्रम करते हैं और उनके प्रयासों से लाखों लोगों का जीवन बेहतर बनता है। हरियाणा की धरती भी ऐसी ही महान विभूतियों से समृद्ध रही है, जिनमें एक प्रमुख नाम है चौधरी बंसी लाल उनकी पुण्यतिथि पर उन्हें स्मरण करना केवल श्रद्धांजलि ही नहीं, बल्कि उनके योगदान को समझने और उससे प्रेरणा लेने का अवसर भी है।
चौधरी बंसी लाल का व्यक्तित्व जितना प्रभावशाली था, उतना ही बहुआयामी भी। जब भी उनका नाम लिया जाता है, लोगों के मन में मिश्रित भावनाएं उभरती हैं। उनके समर्थक उन्हें “आधुनिक हरियाणा का निर्माता” और “विकास पुरुष” के रूप में देखते हैं, क्योंकि उनके कार्यकाल में प्रदेश ने अभूतपूर्व विकास किया। वहीं, कुछ आलोचक उनके कठोर स्वभाव और निर्णयों को लेकर सवाल भी उठाते रहे हैं। लेकिन इन सबके बावजूद यह सत्य है कि उन्होंने हरियाणा को एक नई पहचान देने में ऐतिहासिक भूमिका निभाई।
सन् 1966 में जब हरियाणा का गठन हुआ, तब यह प्रदेश कई तरह की चुनौतियों से जूझ रहा था। सामाजिक, आर्थिक, शैक्षणिक और प्रशासनिक दृष्टि से यह पिछड़ा हुआ था, और राजनीतिक अस्थिरता भी बनी हुई थी। ऐसे कठिन समय में 21 मई 1968 को चौधरी बंसी लाल ने प्रदेश के सबसे युवा मुख्यमंत्री के रूप में जिम्मेदारी संभाली। यह केवल एक पदभार नहीं था, बल्कि एक चुनौती थी—एक ऐसे प्रदेश को दिशा देने की, जो अपनी पहचान बनाने के संघर्ष में था।
उन्होंने अपनी अदम्य इच्छाशक्ति, दृढ़ निश्चय और अथक परिश्रम के बल पर इस चुनौती को अवसर में बदल दिया। बहुत कम समय में उन्होंने हरियाणा को विकास की उस राह पर अग्रसर किया, जिसने पूरे देश को चौंका दिया। उनकी कार्यशैली स्पष्ट, कठोर और परिणामोन्मुख थी। वे निर्णय लेने में विलंब नहीं करते थे और एक बार निर्णय ले लेने के बाद उसे पूरी दृढ़ता से लागू करते थे।


चौधरी बंसी लाल ने राजनीति को विकास और सामाजिक समरसता का माध्यम बनाया। उन्होंने जातिवाद, क्षेत्रवाद, सम्प्रदायवाद और अपराध जैसी प्रवृत्तियों को सख्ती से नियंत्रित किया और सार्वजनिक जीवन को अनुशासित बनाने का प्रयास किया। उनकी नजर में राजनीति का उद्देश्य केवल सत्ता प्राप्त करना नहीं, बल्कि समाज को आगे बढ़ाना था।
उनकी दूरदृष्टि का सबसे बड़ा प्रमाण उनके द्वारा किए गए विकास कार्य हैं। उन्होंने गांव-गांव को पक्की सड़कों से जोड़ने का कार्य प्राथमिकता से किया, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में आवागमन और आर्थिक गतिविधियों को नई गति मिली। हर घर तक बिजली पहुंचाने का अभियान भी उसी सोच का हिस्सा था, जिसने हरियाणा को आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
सिंचाई के क्षेत्र में लिफ्ट सिंचाई योजनाओं की शुरुआत और नहरों का विस्तार करके उन्होंने किसानों को मजबूत आधार दिया। इसके परिणामस्वरूप कृषि उत्पादन में वृद्धि हुई और हरियाणा देश के अग्रणी कृषि राज्यों में शामिल हो गया। उद्योगों के विकास के लिए भी उन्होंने आवश्यक बुनियादी ढांचे का निर्माण कराया, जिससे प्रदेश की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिली।
शिक्षा के क्षेत्र में उनका योगदान भी अत्यंत महत्वपूर्ण रहा। हिसार में हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय की स्थापना ने कृषि अनुसंधान और शिक्षा को नई दिशा दी। रोहतक में उच्च शिक्षा संस्थानों की स्थापना और राई में खेल स्कूल की शुरुआत ने प्रदेश के युवाओं को नए अवसर प्रदान किए। इन संस्थानों ने हरियाणा को शिक्षा और खेल के क्षेत्र में राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई।
चौधरी बंसी लाल केवल विकास कार्यों तक ही सीमित नहीं रहे, बल्कि उन्होंने हरियाणा की अस्मिता और पहचान को भी मजबूत करने का प्रयास किया। उनका एक बड़ा सपना था—हरियाणा की अपनी अलग राजधानी हो। उन्होंने इस दिशा में गंभीर प्रयास किए और केंद्र सरकार के सामने कई प्रस्ताव रखे। उन्होंने चंडीगढ़ को हरियाणा की राजधानी बनाने के लिए भी प्रयास किए, लेकिन राजनीतिक परिस्थितियों के कारण यह संभव नहीं हो सका। इसके बावजूद उन्होंने एक नई राजधानी के निर्माण की योजना भी बनाई और इस दिशा में प्रारंभिक कार्य भी करवाए।
उनका मानना था कि हरियाणा के लोगों को अपनी भूमि पर अपनी राजधानी का गौरव मिलना चाहिए। यह केवल प्रशासनिक आवश्यकता नहीं, बल्कि आत्मसम्मान का विषय भी था। हालांकि उनका यह सपना अधूरा रह गया, लेकिन उनकी सोच आज भी प्रासंगिक है।
चौधरी बंसी लाल ने हमेशा प्रदेशहित को व्यक्तिगत और राजनीतिक हितों से ऊपर रखा। वर्ष 1999 में उन्होंने नशाबंदी लागू करने का साहसिक निर्णय लिया, जो समाजहित में था। यह निर्णय राजनीतिक रूप से उनके लिए नुकसानदेह साबित हुआ, लेकिन उन्होंने जनता के हित को प्राथमिकता दी।
उनकी कार्यशैली में एक खास बात यह थी कि वे विशेषज्ञों और बुद्धिजीवियों से सलाह लेकर नीतियां बनाते थे। इससे उनके निर्णयों में गहराई और दूरदृष्टि झलकती थी। वे प्रशासन को पारदर्शी और प्रभावी बनाने के पक्षधर थे और उन्होंने इसे व्यवहार में भी उतारा।
आज जब हम हरियाणा को देश के अग्रणी राज्यों में देखते हैं, तो इसके पीछे चौधरी बंसी लाल जैसे नेताओं की दूरदर्शिता और मेहनत का बड़ा योगदान है। उन्होंने जो नींव रखी, उसी पर आज का विकसित हरियाणा खड़ा है।
उनकी पुण्यतिथि पर यह कहना उचित होगा कि चौधरी बंसी लाल केवल एक नेता नहीं थे, बल्कि एक युगदृष्टा, एक कर्मयोगी और एक सच्चे जननायक थे। उनका जीवन हमें यह सिखाता है कि स्पष्ट दृष्टि, दृढ़ संकल्प और निःस्वार्थ भावना से किसी भी प्रदेश का भविष्य बदला जा सकता है।
आज आवश्यकता है कि हम उनके विचारों, उनकी नीतियों और उनके आदर्शों को अपनाएं, ताकि हरियाणा निरंतर प्रगति के पथ पर अग्रसर रहे।
उनकी पुण्यतिथि पर उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि—हरियाणा के इस महान शिल्पी को शत-शत नमन।

— महेंद्र सिंह चोपड़ा
(उप सचिव, भारत सरकार — सेवानिवृत्त

बाबूगिरी हिंदी ब्यूरो
Author: बाबूगिरी हिंदी ब्यूरो

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