मुंबई: रामनवमी की छुट्टी के बाद शुक्रवार को भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत भारी गिरावट के साथ हुई। वैश्विक बाजारों से मिले कमजोर संकेतों और कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के चलते निवेशकों ने सतर्क रुख अपनाया। शुरुआती कारोबार में BSE Sensex करीब 400 अंक गिरकर 74,883.79 पर पहुंच गया, जबकि NSE Nifty 50 132.90 अंक यानी 0.57% टूटकर 23,173.55 पर खुला।
वैश्विक बिकवाली का असर
भारतीय बाजार में गिरावट की सबसे बड़ी वजह अंतरराष्ट्रीय बाजारों में कमजोरी रही। अमेरिकी बाजारों में Nasdaq Composite 2.38% और S&P 500 1.74% गिरकर बंद हुए। इसका असर एशियाई बाजारों पर भी पड़ा, जहां जापान का Nikkei 225 करीब 1% और दक्षिण कोरिया का KOSPI 3% तक लुढ़क गया।
विशेषज्ञों के अनुसार, वैश्विक स्तर पर ‘रिस्क-ऑफ’ सेंटिमेंट हावी है, जिससे निवेशक जोखिम लेने से बच रहे हैं।
ईरान संकट और तेल की बढ़ती कीमतें
Iran और United States के बीच बढ़ते तनाव ने ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता पैदा कर दी है। Donald Trump ने ईरान के ऊर्जा ढांचे पर हमले रोकने की अवधि बढ़ाने की बात कही है, लेकिन हालात अभी भी अस्थिर बने हुए हैं।
ब्रेंट क्रूड करीब 105.53 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा है, जो भारत जैसे आयात-निर्भर देश के लिए चिंता का विषय है।
सेक्टर अपडेट: चौतरफा गिरावट
बाजार में लगभग सभी सेक्टर दबाव में दिखे। रियल्टी, मेटल, पीएसयू बैंक और ऑटो सेक्टर में करीब 1% तक की गिरावट दर्ज की गई।
HDFC Bank और Bajaj Finance जैसे दिग्गज शेयरों ने बाजार को नीचे खींचा।
हालांकि, आईटी और ऑयल एंड गैस सेक्टर में हल्की खरीदारी देखने को मिली। TCS और Infosys के शेयरों में मामूली बढ़त दर्ज की गई।
मिडकैप और स्मॉलकैप शेयर भी लाल निशान में कारोबार कर रहे हैं।
आगे क्या?
बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक, निफ्टी के लिए 23,000–23,050 का स्तर अहम सपोर्ट माना जा रहा है। यदि यह स्तर टूटता है तो गिरावट और गहरी हो सकती है। वहीं 23,500 पर मजबूत रेजिस्टेंस बना हुआ है।
विदेशी संस्थागत निवेशक (FIIs) लगातार बिकवाली कर रहे हैं, जबकि घरेलू निवेशक (DIIs) बाजार को संभालने की कोशिश में लगे हैं।
कुल मिलाकर, जब तक वैश्विक हालात और कच्चे तेल की कीमतों में स्थिरता नहीं आती, तब तक बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रहने की संभावना है।











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