April 6, 2026 12:14 pm

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भूलते भागते पल

— डॉ. विजय गर्ग
समय की रफ्तार कभी थमती नहीं। वह निरंतर बहता रहता है—चुपचाप, बिना किसी आहट के। हमारे जीवन का हर दिन, हर क्षण इसी बहती धारा में शामिल होकर आगे बढ़ता जाता है। कुछ पल ऐसे होते हैं जो हमारे दिल में स्थायी रूप से बस जाते हैं, जबकि कई पल अनजाने में ही हमारी स्मृतियों से फिसल जाते हैं। यही हैं—भूलते भागते पल, जो जीवन की गति और उसकी नश्वरता का अहसास कराते हैं।
समय की अनवरत दौड़
आज का जीवन पहले की तुलना में कहीं अधिक तेज़ हो गया है। हर व्यक्ति किसी न किसी लक्ष्य की ओर भाग रहा है—चाहे वह करियर हो, सफलता हो या सामाजिक प्रतिष्ठा। इस भागदौड़ में हम अक्सर वर्तमान को जीना भूल जाते हैं। हमारा मन या तो बीते हुए कल की यादों में उलझा रहता है या आने वाले कल की चिंताओं में डूबा रहता है। परिणामस्वरूप, आज का यह अनमोल क्षण बिना किसी शोर के हमारे हाथों से फिसल जाता है।
समय हमें कभी रुकने का अवसर नहीं देता, लेकिन हम खुद को ठहरने का अवसर दे सकते हैं। दुर्भाग्य से, हम ऐसा कम ही कर पाते हैं। हम घड़ी की सुइयों के साथ दौड़ते रहते हैं, पर यह नहीं समझ पाते कि असल जीवन उन सुइयों के बीच के पलों में ही बसता है।
यादों का चयन
मानव मस्तिष्क की एक विशेषता है—वह हर पल को सहेज कर नहीं रखता। वह अपने आप ही कुछ खास लम्हों को चुन लेता है और उन्हें स्मृतियों के रूप में संजो लेता है। जैसे—
बचपन की मासूम हँसी
दोस्तों के साथ बिताए बेफिक्र दिन
परिवार के साथ साझा किए गए सुख-दुख
ये पल हमारी यादों की धरोहर बन जाते हैं। लेकिन बाकी अनगिनत पल धीरे-धीरे धुंधले पड़ जाते हैं और स्मृति के किसी कोने में खो जाते हैं। यही भूलते हुए पल हमें यह एहसास दिलाते हैं कि हर क्षण कितना मूल्यवान है, और उसे जीने की कला कितनी आवश्यक है।
आधुनिक जीवन और खोते पल
डिजिटल युग ने हमारे जीवन को सुविधाजनक तो बनाया है, लेकिन इसके साथ ही उसने हमें वास्तविक अनुभवों से दूर भी कर दिया है। आज हम पहले से अधिक जुड़े हुए हैं, फिर भी भीतर से कहीं अधिक अकेले होते जा रहे हैं।
हम किसी सुंदर दृश्य को देखने से पहले उसकी तस्वीर लेने लगते हैं
दोस्तों और परिवार के साथ बैठकर भी मोबाइल स्क्रीन में खोए रहते हैं
सोशल मीडिया पर ‘लाइक्स’ और ‘कमेंट्स’ के पीछे भागते हुए हम असली रिश्तों की गर्माहट को नजरअंदाज कर देते हैं
इस प्रक्रिया में हम उन छोटे-छोटे पलों को खो देते हैं, जो वास्तव में जीवन की सच्ची खुशियाँ होते हैं। यह विडंबना ही है कि हम यादों को कैद करने की कोशिश में उन्हें जीना ही भूल जाते हैं।
पछतावे और सीख
जब हम समय के किसी मोड़ पर ठहरकर पीछे मुड़कर देखते हैं, तो अक्सर यह महसूस होता है कि हमने कितने कीमती पल यूँ ही गँवा दिए।
माता-पिता के साथ बिताने के अनमोल अवसर
दोस्तों के साथ हँसी-मजाक के लम्हे
खुद के साथ बिताया गया शांत और सुकून भरा समय
ये सब पल जब बीत जाते हैं, तब उनकी कीमत और भी अधिक महसूस होती है। पछतावा हमें यह सिखाता है कि समय की कद्र करना कितना जरूरी है, लेकिन यह सीख अक्सर देर से मिलती है।
वर्तमान को जीने की कला
भूलते भागते पलों के बीच सबसे महत्वपूर्ण सीख यही है कि हमें वर्तमान में जीना सीखना चाहिए। जीवन का असली आनंद उसी में छिपा है।
हर दिन के छोटे-छोटे क्षणों में खुशी ढूँढना
अपने प्रियजनों के साथ समय बिताना
अपने मन को शांत और सजग बनाए रखना
जब हम वर्तमान को पूरी सजगता के साथ जीते हैं, तब वही साधारण से दिखने वाले पल हमारी सबसे खूबसूरत यादों में बदल जाते हैं। वर्तमान ही वह स्थान है जहाँ जीवन वास्तव में घटित होता है।
निष्कर्ष
जीवन किसी एक मंज़िल का नाम नहीं है, बल्कि यह उन अनगिनत पलों की यात्रा है, जो रास्ते में हमारे साथ चलते हैं। भूलते भागते पल हमें यह याद दिलाते हैं कि समय किसी का इंतजार नहीं करता।
इसलिए यह आवश्यक है कि हम हर पल को महसूस करें, उसे पूरी तरह से जीएँ और उसे संजो लें। क्योंकि अंततः यही छोटे-छोटे पल मिलकर हमारे जीवन की सबसे बड़ी और सबसे सुंदर कहानी बनाते हैं।
डॉ. विजय गर्ग
सेवानिवृत्त प्रिंसिपल, मलोट (पंजाब)

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Author: BabuGiri Hindi

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