August 29, 2026 11:47 am

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CHANDIGARH: हाई कोर्ट का बड़ा फैसला: सेवानिवृत्त कर्मचारियों से पेंशन-ग्रेच्युटी की वसूली अमानवीय और अवैध

चंडीगढ़। हरियाणा हाई कोर्ट ने सेवानिवृत्त कर्मचारियों से पेंशन या ग्रेच्युटी की वसूली को अमानवीय, अवैध और कल्याणकारी राज्य की भावना के विपरीत करार दिया है। जस्टिस हरप्रीत सिंह बराड़ ने स्पष्ट कहा कि यदि किसी कर्मचारी को अधिक भुगतान उसकी किसी गलती, धोखाधड़ी या गलत प्रस्तुतीकरण के कारण नहीं हुआ है, तो प्रशासन अपनी त्रुटि का बोझ सेवानिवृत्त व्यक्ति पर नहीं डाल सकता।

कोर्ट ने टिप्पणी की कि बिना उचित प्रक्रिया और पूर्व सूचना के की गई वसूली न केवल असंवेदनशील है, बल्कि सेवानिवृत्त कर्मचारियों की गरिमा पर भी आघात करती है। न्यायालय ने कहा कि शासन से निष्पक्षता, जवाबदेही और मानवीय दृष्टिकोण के साथ कार्य करने की अपेक्षा की जाती है।

क्या है मामला?
यह मामला दफ्तरी पद से सेवानिवृत्त हुसैन सहित कई कर्मचारियों से जुड़ा है। अगस्त 2025 में संबंधित बैंक ने उन्हें 1,99,808 रुपये की कथित अतिरिक्त ग्रेच्युटी राशि वापस जमा करने के आदेश जारी किए थे। याचिकाकर्ताओं ने दलील दी कि भुगतान में उनकी ओर से किसी प्रकार की धोखाधड़ी या गलत जानकारी नहीं दी गई थी।
उन्होंने बैंक की प्रस्ताव संख्या-10 का हवाला देते हुए बताया कि 1 जनवरी 2024 से ग्रेच्युटी की अधिकतम सीमा बढ़ाकर 25 लाख रुपये कर दी गई थी और उसी के अनुरूप उन्हें भुगतान किया गया था। ऐसे में वर्षों बाद की गई वसूली न तो न्यायसंगत है और न ही कानूनसम्मत।

सरकार की दलीलें खारिज
हाई कोर्ट ने सरकार की दलीलों को खारिज करते हुए कहा कि वे यह साबित करने में पूरी तरह असफल रहे कि याचिकाकर्ताओं ने किसी गलत तरीके से अधिक राशि प्राप्त की थी। कोर्ट ने कहा कि बिना नोटिस और परामर्श के की गई वसूली प्रशासनिक असंवेदनशीलता को दर्शाती है।
फैसले में सुप्रीम कोर्ट के पूर्व निर्णयों का हवाला देते हुए हाई कोर्ट ने दोहराया कि ग्रुप-सी और ग्रुप-डी कर्मचारियों, सेवानिवृत्त कर्मचारियों या सेवानिवृत्ति के निकट कर्मचारियों से किसी भी प्रकार की वसूली नहीं की जा सकती।

वसूली के आदेश रद्द
हाई कोर्ट ने सभी याचिकाएं स्वीकार करते हुए 19 अगस्त 2025 को जारी वसूली आदेशों को रद्द कर दिया। साथ ही अदालत ने प्रतिवादी पक्ष को भविष्य में याचिकाकर्ताओं से किसी भी प्रकार की वसूली न करने के स्पष्ट निर्देश दिए।

बाबूगिरी हिंदी ब्यूरो
Author: बाबूगिरी हिंदी ब्यूरो

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