पीपीपी मॉडल पर विकास का प्रस्ताव, रोजगार सृजन और नगर निगम की आय बढ़ाने पर फोकस
बाबूगिरी ब्यूरो
चंडीगढ़, 27 अप्रैल: चंडीगढ़ में सार्वजनिक संपत्तियों के बेहतर उपयोग को लेकर एक महत्वपूर्ण पहल सामने आई है। शहर के महापौर Saurabh Joshi ने बंद और कम उपयोग में आ रही भूमिगत पार्किंग स्थलों को व्यावसायिक गतिविधियों के केंद्र के रूप में विकसित करने का प्रस्ताव दिया है। इस संबंध में उन्होंने चंडीगढ़ प्रशासन के मुख्य सचिव को पत्र लिखकर सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) मॉडल के तहत इन स्थानों के पुनर्विकास की मांग की है।
महापौर जोशी ने अपने पत्र में कहा है कि नगर निगम के अधीन कई भूमिगत पार्किंग स्थल लंबे समय से बंद पड़े हैं या उनका उपयोग बहुत सीमित है। ऐसे में ये स्थान “सफेद हाथी” बन चुके हैं, जिन पर खर्च तो हो रहा है लेकिन उनसे कोई ठोस लाभ नहीं मिल रहा। उन्होंने सुझाव दिया कि यदि इनका सही ढंग से पुनर्विकास किया जाए और निजी कंपनियों को संचालन में शामिल किया जाए, तो ये स्थान नगर निगम के लिए स्थायी राजस्व का बड़ा स्रोत बन सकते हैं।
उन्होंने बताया कि चंडीगढ़ में फिलहाल चार प्रमुख भूमिगत पार्किंग स्थल—तीन सेक्टर-17 और एक सेक्टर-8 में—ऐसे हैं जिन्हें इस योजना के तहत विकसित किया जा सकता है। इसके अलावा शहर के प्रमुख व्यावसायिक केंद्र Elante Mall की पार्किंग को भी इस योजना में शामिल करने का प्रस्ताव रखा गया है। यहां पार्किंग के साथ-साथ रिटेल, फूड कोर्ट और अन्य व्यावसायिक गतिविधियां शुरू कर आय बढ़ाई जा सकती है।
महापौर के अनुसार, इस पहल से दोहरा लाभ मिलेगा। एक ओर जहां नगर निगम की आय में उल्लेखनीय वृद्धि होगी, वहीं दूसरी ओर शहर के युवाओं के लिए नए रोजगार के अवसर पैदा होंगे। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में शहरी निकायों के सामने वित्तीय संसाधनों की कमी एक बड़ी चुनौती है, ऐसे में इस तरह की नवाचार आधारित योजनाएं बेहद जरूरी हैं।
जोशी ने अपने प्रस्ताव में पुरानी दिल्ली का उदाहरण देते हुए बताया कि वहां इस तरह की परियोजनाएं निजी कंपनियों, जैसे Omaxe Limited, को सौंपकर सफलतापूर्वक चलाई जा रही हैं। इन परियोजनाओं ने न केवल बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराई हैं, बल्कि सरकारी एजेंसियों की आय में भी बढ़ोतरी की है। उन्होंने कहा कि चंडीगढ़ में भी इस मॉडल को अपनाकर समान सफलता हासिल की जा सकती है।
महापौर ने प्रधानमंत्री Narendra Modi के “विकसित भारत 2047” विजन का उल्लेख करते हुए कहा कि चंडीगढ़ को भी इसी दिशा में आगे बढ़ना होगा। उन्होंने “विकसित चंडीगढ़” की अवधारणा पर जोर देते हुए कहा कि शहर को स्मार्ट, आत्मनिर्भर और नवाचार आधारित बनाना समय की मांग है। इसके लिए सार्वजनिक संपत्तियों का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित करना जरूरी है।
उन्होंने यह भी कहा कि पीपीपी मॉडल अपनाने से सरकार पर वित्तीय बोझ कम होगा और निजी क्षेत्र की विशेषज्ञता का लाभ मिलेगा। इससे परियोजनाओं का तेजी से और प्रभावी तरीके से क्रियान्वयन संभव होगा। साथ ही, शहरवासियों को आधुनिक और बेहतर सुविधाएं मिलेंगी।
महापौर जोशी ने प्रशासन से इस महत्वाकांक्षी योजना को शीघ्र स्वीकृति देने की अपील की है। उन्होंने विश्वास जताया कि यदि इस दिशा में तेजी से कदम उठाए जाते हैं, तो चंडीगढ़ देश के अन्य शहरों के लिए शहरी प्रबंधन और संसाधनों के उपयोग का एक आदर्श मॉडल बन सकता है।
उन्होंने कहा, “सार्वजनिक संपत्तियां निष्क्रिय क्यों रहें? अब समय आ गया है कि हर खाली स्थान को चंडीगढ़ की प्रगति और विकास का आधार बनाया जाए।”











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