ब्लैक स्पॉट्स पर तुरंत कार्रवाई, गोल्डन ऑवर में बेहतर चिकित्सा सुविधा और जागरूकता अभियान पर जोर
बाबूगिरी ब्यूरो
चंडीगढ़, 27 अप्रैल: चंडीगढ़ में सड़क सुरक्षा को लेकर प्रशासन ने अब सख्त कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। इसी कड़ी में जिला सड़क सुरक्षा परिषद की पहली बैठक सांसद Manish Tewari की अध्यक्षता में आयोजित की गई। बैठक में सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाने और मृत्यु दर घटाने के लिए ठोस रणनीति पर चर्चा की गई।
बैठक की शुरुआत में उपायुक्त Nishant Kumar Yadav ने सांसद और अन्य सदस्यों का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि सड़क सुरक्षा की चुनौतियों से निपटने के लिए प्रशासन, ट्रैफिक पुलिस, इंजीनियरिंग विभाग, स्वास्थ्य सेवाओं और नागरिक समाज के बीच बेहतर तालमेल जरूरी है।
ट्रैफिक पुलिस ने बैठक में विस्तृत प्रस्तुति देते हुए जिले में सड़क सुरक्षा की वर्तमान स्थिति, दुर्घटनाओं के रुझान और प्रवर्तन उपायों की जानकारी दी। प्रस्तुति में दुर्घटना-प्रवण “ब्लैक स्पॉट्स” की पहचान को प्राथमिकता देने की बात कही गई।
इन खतरनाक स्थलों पर चिंता जताते हुए सांसद मनीष तिवारी ने संबंधित विभागों को निर्देश दिए कि वे तय समयसीमा में सुधारात्मक कदम उठाएं। उन्होंने बेहतर साइनेज, सड़क इंजीनियरिंग में सुधार, पर्याप्त स्ट्रीट लाइटिंग और सख्त ट्रैफिक नियमों के पालन को सुनिश्चित करने पर जोर दिया।
बैठक में बुनियादी ढांचे से जुड़े मुद्दों की भी समीक्षा की गई। प्रस्तावित फ्लाईओवर परियोजना की प्रगति पर चर्चा करते हुए सांसद ने कहा कि यह परियोजना ट्रैफिक जाम कम करने और सड़क सुरक्षा बढ़ाने में अहम भूमिका निभाएगी। उन्होंने इसे समय पर पूरा करने और नियमित मॉनिटरिंग के निर्देश दिए।
सांसद ने सड़क दुर्घटनाओं के बाद के “गोल्डन ऑवर” को बेहद महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि इस दौरान समय पर इलाज मिलने से कई जानें बचाई जा सकती हैं। उन्होंने आपातकालीन सेवाओं को मजबूत करने, एम्बुलेंस की संख्या बढ़ाने, पुलिस और स्वास्थ्य विभाग के बीच बेहतर समन्वय तथा अस्पतालों में ट्रॉमा केयर सुविधाएं बढ़ाने पर जोर दिया।
इसके अलावा, सड़क सुरक्षा को लेकर जन-जागरूकता बढ़ाने के लिए बड़े स्तर पर सूचना, शिक्षा एवं संचार (IEC) अभियान चलाने की बात कही गई। सांसद ने विशेष रूप से “गुड सेमेरिटन” (Good Samaritans) के लिए मौजूद कानूनी सुरक्षा का व्यापक प्रचार-प्रसार करने के निर्देश दिए, ताकि लोग बिना डर के दुर्घटना पीड़ितों की मदद कर सकें।
बैठक में सभी संबंधित विभागों और हितधारकों ने सक्रिय भागीदारी निभाई और कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए। अंत में यह निर्णय लिया गया कि सड़क सुरक्षा से जुड़े सभी उपायों को मिशन मोड में लागू किया जाएगा, ताकि जिले में दुर्घटनाओं और मौतों की संख्या में प्रभावी कमी लाई जा सके।











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