May 1, 2026 2:45 am

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CHANDIGARH: यूटी प्रशासन की चिट्ठी ने खोली पोल: वित्तीय अनियमितताओं और जवाबदेही की कमी पर उठे गंभीर सवाल

आउटसोर्स कर्मचारियों से कराए जा रहे थे संवेदनशील कार्य, अब प्रशासन ने मानी चूक
बाबूगिरी ब्यूरो
चंडीगढ़, 27 अप्रैल 2026: चंडीगढ़ प्रशासन के वित्त विभाग द्वारा जारी एक ताजा पत्र ने प्रशासनिक तंत्र की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पत्र में स्वीकार किया गया है कि संवेदनशील और महत्वपूर्ण वित्तीय कार्य नियमित कर्मचारियों के बजाय आउटसोर्स या ठेके पर नियुक्त कर्मचारियों से कराए जा रहे थे, जिससे वित्तीय अनियमितताओं की आशंका बढ़ गई।

आर.के. गर्ग ने कहा कि यह केवल लापरवाही नहीं, बल्कि जिम्मेदारी से बचने का एक संगठित तरीका प्रतीत होता है। सार्वजनिक धन से जुड़े कार्य ऐसे कर्मियों को सौंपे गए जिनकी सीधी जवाबदेही तय करना मुश्किल है, जिससे पूरे सिस्टम की पारदर्शिता पर सवाल उठते हैं।

पत्र में यह भी माना गया है कि इस व्यवस्था के कारण किसी भी प्रकार की गड़बड़ी, धोखाधड़ी या गबन की स्थिति में जिम्मेदारी तय करना कठिन हो जाता है। इससे यह संकेत मिलता है कि प्रशासनिक ढांचे में जवाबदेही लगभग समाप्त हो गई थी।
सबसे चौंकाने वाली बात यह सामने आई कि इस संबंध में पहले भी स्पष्ट निर्देश जारी किए जा चुके थे, लेकिन उनका पालन नहीं किया गया। इससे यह सवाल उठता है कि क्या अधिकारियों ने लापरवाही बरती या जानबूझकर नियमों को नजरअंदाज किया।
अब प्रशासन ने सभी विभागों को निर्देश जारी कर कहा है कि संवेदनशील और वित्तीय कार्य केवल नियमित कर्मचारियों को ही सौंपे जाएं। साथ ही किसी भी प्रकार की चूक पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी गई है। इसके अलावा जिम्मेदारी सीधे प्रशासनिक सचिवों और विभागाध्यक्षों पर तय की गई है।

हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम के बाद सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि यह कदम अब क्यों उठाया गया, जब संभावित नुकसान हो चुका है। मामले ने प्रशासन की कार्यशैली और निगरानी तंत्र पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं।
शहर के नागरिकों में भी इस मुद्दे को लेकर नाराजगी देखी जा रही है। लोग जानना चाहते हैं कि अब तक कौन-कौन सी अनियमितताएं सामने आई हैं, क्या किसी प्रकार का वित्तीय नुकसान हुआ है, किन अधिकारियों की जिम्मेदारी बनती है और अब तक क्या कार्रवाई की गई है।

विशेषज्ञों का मानना है कि पारदर्शिता, जवाबदेही और सख्त कार्रवाई ही सुशासन की पहचान होती है। ऐसे में जब तक पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं होती, तब तक यह मामला प्रशासनिक विफलता का उदाहरण बना रहेगा।

आदेश

संवेदनशील और वित्तीय कार्य अब केवल नियमित कर्मचारियों को ही सौंपे जाएंगे
Chandigarh Administration ने वित्तीय अनुशासन और पारदर्शिता को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से एक अहम और सख्त आदेश जारी किया है। प्रशासन के वित्त विभाग (अकाउंट्स ब्रांच) द्वारा जारी इस निर्देश में स्पष्ट किया गया है कि अब सभी प्रकार के महत्वपूर्ण, संवेदनशील और वित्तीय कार्य केवल नियमित (रेगुलर) कर्मचारियों द्वारा ही किए जाएंगे, न कि ठेका या आउटसोर्स कर्मचारियों द्वारा।
हालिया अनियमितताओं के बाद लिया गया निर्णय
यह निर्णय हाल ही में सामने आई वित्तीय अनियमितताओं के मद्देनज़र लिया गया है। विशेष रूप से Chandigarh Renewable Energy and Science & Technology Promotion Society (CREST) और Municipal Corporation Chandigarh के बैंक खातों में गड़बड़ियों के मामलों ने प्रशासन को सख्त कदम उठाने के लिए मजबूर किया।
जांच में यह पाया गया कि इन संस्थाओं में कई महत्वपूर्ण वित्तीय जिम्मेदारियां कॉन्ट्रैक्ट और आउटसोर्स कर्मचारियों को सौंपी गई थीं, जिससे न केवल प्रक्रियाओं में ढीलापन आया बल्कि जवाबदेही भी कमजोर पड़ी।

जवाबदेही तय करने में आती है दिक्कत
वित्त विभाग ने अपने आदेश में कहा है कि जब संवेदनशील कार्य अस्थायी या आउटसोर्स कर्मचारियों को दिए जाते हैं, तो किसी भी अनियमितता, धोखाधड़ी या गबन की स्थिति में जिम्मेदारी तय करना मुश्किल हो जाता है। इससे दोषी अधिकारियों या कर्मचारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई में भी बाधा आती है।
इसी को ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने यह स्पष्ट कर दिया है कि अब ऐसे सभी कार्य केवल स्थायी सरकारी कर्मचारियों के माध्यम से ही संपन्न होंगे, ताकि जवाबदेही सुनिश्चित की जा सके।

सभी विभागों को तत्काल समीक्षा के निर्देश
आदेश में सभी विभागाध्यक्षों को निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने-अपने विभागों में कार्यों का तुरंत पुनर्मूल्यांकन (review) करें और यह सुनिश्चित करें कि:
वित्तीय लेन-देन से जुड़े कार्य
बैंक खातों का संचालन
संवेदनशील दस्तावेजों का प्रबंधन
केवल नियमित कर्मचारियों के पास ही हों।
नियमों की अवहेलना पर होगी सख्त कार्रवाई
प्रशासन ने यह भी साफ कर दिया है कि यदि इन निर्देशों का पालन नहीं किया गया और भविष्य में किसी भी प्रकार की वित्तीय अनियमितता सामने आती है, तो उसकी पूरी जिम्मेदारी संबंधित प्रशासनिक सचिव और विभागाध्यक्ष की होगी।

पारदर्शिता और सिस्टम सुधार की दिशा में कदम
विशेषज्ञों के अनुसार, यह फैसला प्रशासनिक व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। इससे न केवल वित्तीय प्रक्रियाओं में सुधार होगा, बल्कि सरकारी तंत्र में भरोसा भी मजबूत होगा।

http://CHANDIGARH प्रशासन का बड़ा फैसला: संवेदनशील और वित्तीय कार्य अब केवल नियमित कर्मचारियों को ही सौंपे जाएंगे https://babugirihindi.com/archives/13327

बाबूगिरी हिंदी ब्यूरो
Author: बाबूगिरी हिंदी ब्यूरो

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