September 23, 2026 12:04 pm

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विश्व की सर्वकल्याणकारी संस्कृति है सनातन संस्कृति – डाॅ. शमशेर जमदग्रि

सर्वविदित है कि भारतवर्ष विश्व का न केवल प्राचीनतम, बल्कि महानतम राष्ट्र भी है। इसी प्रकार सनातन संस्कृति विश्व की न केवल सबसे शाश्वत, बल्कि सर्वकल्याणकारी संस्कृति भी है। अतः भारतवर्ष अपनी इसी वंदनीय सनातन संस्कृति के आधार पर न केवल प्राचीन काल में विश्व-गुरु के रूप में प्रतिष्ठापित रहा है, बल्कि अब पुनः निकट भविष्य में विश्व-गुरु के रूप में प्रतिष्ठापित होने के मार्ग पर तीव्र गति से अग्रसर हो चला है। फलतः, भारतवर्ष के नवयुवकों को भारतीय संस्कृति के संरक्षण एवं संवर्द्धन के माध्यम से भारतवर्ष के पुनः विश्व-गुरु के रूप में प्रतिष्ठापित होने के सत्कर्म में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका का सकुशल निर्वहन करना चाहिए।’

भारतमातरम राष्ट्रपीठ, नई दिल्ली के सूत्रधार डॉ. शमशेर जमदग्रि (अपर आयुक्त, प्रयागराज, उत्तर प्रदेश) – भारतवादी साहित्यकार, नई दिल्ली द्वारा उपरोक्त विचार विगत दिनों ‘उत्तर भारतीय महासंघ, मुम्बई’ द्वारा श्री हनुमंत आश्रम, गोरेगांव, मुम्बई में आयोजित एक आध्यात्मिक सत्संग महासभा के दौरान ‘मुख्य अतिथि’ के रूप में अपने विशिष्ट संबोधन के अंतर्गत व्यक्त किए गए। उल्लेखनीय है कि डॉ. शमशेर जमदग्रि न केवल एक आदर्श लोक सेवक हैं, बल्कि एक सुप्रसिद्ध भारतवादी चिन्तक भी हैं, जो अपनी विशिष्ट लेखनी के साथ-साथ अपनी सचेतन वाणी के माध्यम से भी भारतीय समाज में निरंतर सेवारत रहते हैं एवं उसी अनुक्रम में ‘उत्तर भारतीय महासंघ, मुम्बई’ द्वारा उन्हें सम्प्रति आध्यात्मिक सत्संग महासभा में उनके प्रेरणास्पद संबोधन के लिए आमंत्रित किया गया था।

सम्प्रति आध्यात्मिक सत्संग महासभा में ‘विशिष्ट अतिथि’ के रूप में उपस्थित श्री स्वप्निल नंदकुमार वाडेकर, जो ‘वेद प्रतिष्ठान, मुम्बई’ के संस्थापक अध्यक्ष हैं, द्वारा सनातन संस्कृति की वन्दनीयता पर प्रकाश डालते हुए कहा गया कि भारतवर्ष ऐसा महान राष्ट्र है, जिसमें टी. एन. शेषन एवं डाॅ. किरण बेदी जैसे महान नौकरशाहों ने वंदनीय राष्ट्र-सेवा की है एवं वर्तमान में डॉ. जमदग्रि जैसे अनेक नौकरशाह भी विशिष्ट राष्ट्र-सेवा में रत हैं। इस विशिष्ट आयोजन में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करने वाले राहुल गायकवाड़, वरिष्ठ पत्रकार, मुम्बई द्वारा भी अपने ओजस्वी विचार रखे गए तथा प्रयागराज, उत्तर प्रदेश से आगमन के लिए ‘मुख्य अतिथि’ महोदय का हार्दिक आभार व्यक्त किया गया।

मुख्य अतिथि डॉ. शमशेर जमदग्रि द्वारा भारतीय संस्कृति की महत्वपूर्ण विशेषताओं पर प्रकाश डालते हुए बताया गया कि सनातन संस्कृति वैदिक संस्कृति है, जो वसुधैव कुटुम्बकम की सर्वकल्याणकारी भावना पर आधारित हैं एवं ‘सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामया, सर्वे भद्रानी पश्यन्तु मा कष्चित दुःख भागभवेत’ का सन्देश प्रदान करती है। सनातन संस्कृति वह वंदनीय संस्कृति है, जो न केवल संपूर्ण विश्व के कल्याण का लक्ष्य रखती है, बल्कि विश्व की समस्त समस्याओं का समाधान भी प्रस्तुत करती है। सम्प्रति आध्यात्मिक सत्संग महासभा में उपस्थित पुरुषों, महिलाओं एवं बच्चों द्वारा भक्ति भाव से न केवल सहभागिता की गई, बल्कि अतिथियों के विचारों को बहुत श्रद्धा भाव से सुना गया एवं उनके विधिवत अनुकरण का संकल्प भी लिया गया।

महत्वपूर्ण है कि सम्प्रति आध्यात्मिक सत्संग महासभा की अध्यक्षता श्री उमेश अपरात – अध्यक्ष, श्रीहनुमंत आश्रम, गोरेगांव, मुम्बई द्वारा की गई तथा मंच का सकुशल संचालन श्री विनोद मल्लाह – अध्यक्ष, वीरा फाउंडेशन, मुम्बई द्वारा किया गया। इस महत्वपूर्ण आध्यात्मिक महासभा में अनेक सुप्रसिद्ध समाजसेवी उपस्थित रहे, जिनमें राजेश मिश्रा, दीपक उपाध्याय, राजकुमार पाल, वीरेन्द्र यादव, मंजू राजभर, सुनीता यादव, सरोज यादव, सरोज सनातन, सुश्री प्रियंका यादव एवं सुश्री पूजा दुर्गागौड़ आदि प्रमुख हैं।

बाबूगिरी हिंदी ब्यूरो
Author: बाबूगिरी हिंदी ब्यूरो

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