3 साल की अधिकतम तैनाती का नियम कागज़ों तक सीमित? संवेदनशील सीटों पर 10–20 साल से जमे कर्मियों पर कार्रवाई नहीं
बाबूगिरी ब्यूरो
चंडीगढ़, 29 अप्रैल 2026। प्रशासनिक पारदर्शिता और भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने के उद्देश्य से लागू ट्रांसफर नीति पर डीसी ऑफिस में गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। विजिलेंस विभाग द्वारा यूटी के सभी विभागों को जारी निर्देशों में स्पष्ट कहा गया था कि किसी भी कर्मचारी को संवेदनशील सीट पर 3 साल से अधिक समय तक नहीं रखा जाएगा, लेकिन डीसी ऑफिस में इन निर्देशों का पालन होता नजर नहीं आ रहा।
सूत्रों के अनुसार, जहां एक ओर इस्टेट ऑफिस ने विजिलेंस के निर्देश मिलते ही तुरंत प्रभाव से कर्मचारियों के ट्रांसफर कर दिए, वहीं डीसी ऑफिस में इस प्रक्रिया को महज औपचारिकता तक सीमित रखा गया। आरोप है कि यहां ट्रांसफर के नाम पर “लीपा-पोती” की जा रही है—यानी कागज़ों में बदलाव दिखाकर कर्मचारियों को थोड़े समय बाद फिर उसी सीट पर बहाल कर दिया जाता है।
पूरी तरह पब्लिक डीलिंग ऑफिस, फिर भी नियमों की अनदेखी
डीसी, SDM, adc ऑफिस शहर का सबसे महत्वपूर्ण प्रशासनिक केंद्र है, जहां प्रतिदिन सैकड़ों लोग विभिन्न कार्यों के लिए पहुंचते हैं। जमीन, रजिस्ट्री, लाइसेंस, प्रमाण पत्र और अन्य सरकारी सेवाओं से जुड़ा यह कार्यालय पूरी तरह पब्लिक डीलिंग पर आधारित है। ऐसे में यहां पारदर्शिता और नियमित रोटेशन की आवश्यकता और भी अधिक हो जाती है, लेकिन हकीकत इसके उलट दिखाई देती है।
बताया जा रहा है कि कई कर्मचारी 10 से 15 वर्षों से एक ही शाखा या सीट पर कार्यरत हैं। कुछ मामलों में तो 20 साल से अधिक समय तक एक ही ब्रांच में तैनाती के आरोप हैं। यदि किसी कर्मचारी का ट्रांसफर होता भी है, तो 2–3 महीनों के भीतर उसे दोबारा उसी सीट पर वापस भेज दिया जाता है।
क्या कहते हैं विजिलेंस के निर्देश?
संवेदनशील सीट पर अधिकतम 3 साल की तैनाती
नियमित रोटेशन से भ्रष्टाचार पर रोक
विभागीय जवाबदेही सुनिश्चित करना
लंबे समय से जमे कर्मचारियों की सूची (सूत्रों के अनुसार):
महाबीर (सीनियर असिस्टेंट) – 20–22 साल से एम.ए. ब्रांच में की सीट पर ही घूम रहे।
जितेंद्र (क्लर्क) पीए adc आउटसोर्सिंग– 12–13 साल से एडीसी स्टाफ में
ज्योति (DC/PA) – लगभग 15 साल से डीसी स्टाफ
सतीश शर्मा – 7–8 साल से DC PA
विनोद कुमार (रीडर) dc – 8–10 साल से तैनात
कुलदीप (MTS) – लंबे समय से एक ही सीट
अभिषेक स्टेनो dc/ pa 5-6 साल से
नेहा क्लर्क आउटसोर्स pa sdm south, 5 साल से, ट्रांसफर के बाद ज्वाइन नही किया।
भानु आउटसोर्स sdm East ऑफिस पिछले 8 साल से
दीपक क्लर्क EO 1 पिछले 4 साल से
योगेश क्लर्क आउटसोर्सिंग EO 4 साल से
पायल गुरु क्लर्क आउटसोर्सिंग 5 साल से डीसी ऑफिस डायरी ब्रांच
सुरेश वर्मा डिस्पैच राइडर डीसी ऑफिस MA ब्रांच 10 साल से
तहसील और सब-रजिस्ट्रार ब्रांच का अधिकांश स्टाफ वर्षों से यथावत
इसके अलावा एसडीएम काउंटर, एसडीएम साउथ और एसडीएम ईस्ट/वेस्ट कार्यालयों में भी कई कर्मचारी 5–6 वर्षों से एक ही स्थान पर जमे होने के आरोप हैं।
चंडीगढ़ यूटी में तीन एसडीएम है, तीनो एसडीएम के पीए भी आउटसोर्सिंग से है, जो पिछले कई सालों से आपस मे ही मिचवल ट्रांसफर करवाते रहे है
नीतियां बनीं, लेकिन अमल नहीं
भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने और प्रशासनिक सुधार के लिए ‘इंटर डिपार्टमेंट ट्रांसफर’ और ‘कॉमन कैडर पॉलिसी’ जैसी योजनाएं भी लागू की गई थीं। इनका उद्देश्य कर्मचारियों का नियमित रोटेशन सुनिश्चित करना था, ताकि कोई भी व्यक्ति लंबे समय तक एक ही संवेदनशील पद पर न रहे।
हालांकि, अब ये नीतियां भी ठंडे बस्ते में जाती नजर आ रही हैं। पर्सनल विभाग पर भी आरोप है कि पिछले 5 वर्षों से ट्रांसफर प्रक्रिया को लेकर कोई ठोस पहल नहीं की गई।
आउटसोर्स स्टाफ पर बढ़ती निर्भरता
डीसी ऑफिस में एक और अहम मुद्दा आउटसोर्स कर्मचारियों की भूमिका को लेकर सामने आया है। आरोप है कि कई महत्वपूर्ण सीटों पर आउटसोर्स स्टाफ को तैनात किया गया है, जबकि नियमित कर्मचारी उन्हीं पर निर्भर रहते हैं।
कहा जा रहा है कि आउटसोर्स कर्मचारियों को “अच्छी” और प्रभावशाली सीटें मिल रही हैं, जिससे कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं और पारदर्शिता प्रभावित हो रही है।
PA पदों पर भी नियमों की अनदेखी
सूत्रों के मुताबिक, डीसी ऑफिस में तैनात पीए (पर्सनल असिस्टेंट) पदों पर भी नियमों का पालन नहीं हो रहा। जहां इन पदों के लिए स्टेनोग्राफर की नियुक्ति जरूरी होती है, वहीं कई मामलों में क्लर्क ही पीए के रूप में कार्य कर रहे हैं।
बताया जा रहा है कि इन कर्मचारियों का ट्रांसफर भी केवल नाममात्र का होता है और उन्हें अन्य सीटों पर भेजने के बजाय फिर से पीए पद पर ही तैनात कर दिया जाता है।
प्रशासन पर उठ रहे बड़े सवाल:
क्या ट्रांसफर नीति सिर्फ कागज़ों तक सीमित रह गई है?
संवेदनशील सीटों पर वर्षों से जमे कर्मचारियों पर कार्रवाई क्यों नहीं?
क्या इससे भ्रष्टाचार और पक्षपात को बढ़ावा मिल रहा है?
क्या विजिलेंस विभाग के निर्देशों की अनदेखी की जा रही है?
डीसी व एसडीएम ऑफिस में ट्रांसफर नियमों के पालन को लेकर उठ रहे ये सवाल प्रशासनिक व्यवस्था की पारदर्शिता और निष्पक्षता पर गंभीर प्रभाव डालते हैं। यदि समय रहते इन अनियमितताओं पर कार्रवाई नहीं की गई, तो इससे आम जनता का विश्वास कमजोर पड़ सकता है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस मुद्दे पर क्या कदम उठाता है और क्या विजिलेंस के निर्देशों को सख्ती से लागू किया जाता है या नहीं।
CHANDIGARH यूटी दफ्तरों में आउटसोर्सिंग कर्मचारियों का दबदबा, क्लर्क बने अधीनस्थ—प्रशासनिक व्यवस्था पर उठे सवाल
चंडीगढ़ यूटी के विभिन्न सरकारी कार्यालयों में आउटसोर्सिंग कर्मचारियों की बढ़ती भूमिका अब विवाद का विषय बनती जा रही है। ताजा हालात में कई विभागों में अधिकारियों के निजी सहायक (PA) की जिम्मेदारी भी आउटसोर्सिंग कर्मचारियों के हाथों में है, जबकि कॉमन कैडर के नियमित क्लर्क उनके अधीन कार्य करने को मजबूर बताए जा रहे हैं।
सूत्रों के अनुसार, कई दफ्तरों में लंबे समय से तैनात आउटसोर्सिंग कर्मचारी न केवल फाइलों की मूवमेंट नियंत्रित कर रहे हैं, बल्कि अधिकारियों तक पहुंच भी उन्हीं के माध्यम से तय हो रही है। इससे नियमित कर्मचारियों में असंतोष बढ़ रहा है।
नियमों के विपरीत व्यवस्था?
प्रशासनिक नियमों के अनुसार संवेदनशील और वित्तीय कार्य केवल नियमित कर्मचारियों को सौंपे जाने चाहिए। इसके बावजूद आउटसोर्सिंग स्टाफ को महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दिए जाने से पारदर्शिता और जवाबदेही पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
क्लर्कों में नाराजगी
कॉमन कैडर के क्लर्कों का कहना है कि उनकी नियुक्ति और अनुभव के बावजूद उन्हें निर्णय प्रक्रिया से दूर रखा जा रहा है। कई मामलों में उन्हें आउटसोर्सिंग कर्मचारियों के निर्देशों पर काम करना पड़ रहा है, जिससे उनकी कार्य-गरिमा प्रभावित हो रही है।
विजिलेंस निर्देशों की अनदेखी के आरोप
विभागीय सूत्रों का यह भी कहना है कि विजिलेंस और प्रशासन की ओर से समय-समय पर जारी दिशा-निर्देशों के बावजूद इस तरह की व्यवस्था जारी है। इससे सरकारी कामकाज की विश्वसनीयता पर भी असर पड़ सकता है।
प्रशासन की चुप्पी
इस मुद्दे पर प्रशासन की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। हालांकि, जानकारों का मानना है कि यदि समय रहते इस पर ध्यान नहीं दिया गया, तो यह मामला और गंभीर हो सकता है।

अब प्रशासन का सख्त आदेश: केवल रेगुलर स्टाफ संभालेगा वित्तीय काम
चंडीगढ़ प्रशासन के वित्त विभाग (अकाउंट्स ब्रांच) ने सभी विभागों को निर्देश जारी करते हुए कहा है कि अब किसी भी प्रकार के महत्वपूर्ण, संवेदनशील और वित्तीय कार्य केवल नियमित (रेगुलर) कर्मचारियों को ही सौंपे जाएं।
अनियमितताओं के बाद लिया गया फैसला
यह आदेश हाल ही में सामने आई वित्तीय गड़बड़ियों के बाद जारी किया गया है। जानकारी के अनुसार, Chandigarh Renewable Energy and Science & Technology Promotion Society (CREST) और Municipal Corporation Chandigarh के बैंक खातों में अनियमितताएं सामने आई थीं। जांच में पाया गया कि कई महत्वपूर्ण वित्तीय कार्य कॉन्ट्रैक्ट और आउटसोर्स कर्मचारियों द्वारा संभाले जा रहे थे, जिसे गंभीर लापरवाही माना गया।
जवाबदेही तय करने में आती है दिक्कत
वित्त विभाग ने स्पष्ट किया है कि जब संवेदनशील और वित्तीय कार्य अस्थायी कर्मचारियों को सौंपे जाते हैं, तो किसी भी धोखाधड़ी, गबन या अनियमितता की स्थिति में जिम्मेदारी तय करना मुश्किल हो जाता है। इससे दोषियों के खिलाफ कार्रवाई भी प्रभावित होती है।
सभी विभागों को रिव्यू के आदेश
प्रशासन ने सभी विभागाध्यक्षों को निर्देश दिए हैं कि वे तुरंत अपने विभागों की समीक्षा करें और सुनिश्चित करें कि:
बैंक खातों का संचालन
वित्तीय लेन-देन
संवेदनशील दस्तावेजों का प्रबंधन
केवल नियमित कर्मचारियों द्वारा ही किया जाए।
उल्लंघन पर होगी सख्त कार्रवाई
प्रशासन ने चेतावनी दी है कि यदि इन निर्देशों का पालन नहीं किया गया और भविष्य में कोई वित्तीय गड़बड़ी सामने आती है, तो इसकी पूरी जिम्मेदारी संबंधित प्रशासनिक सचिव और विभागाध्यक्ष की होगी।
आउटसोर्स स्टाफ पर भी उठे सवाल
आरके गर्ग आरटीआई एक्टिविस्ट ने कहा कि डीसी ऑफिस में पहले से ही आउटसोर्स कर्मचारियों को महत्वपूर्ण सीटों पर तैनात किए जाने के आरोप हैं। ऐसे में नए आदेश के बाद यह सवाल और भी महत्वपूर्ण हो गया है कि क्या अब इन व्यवस्थाओं में बदलाव होगा या नहीं।
नीतियां बनीं, लेकिन अमल अधूरा
इंटर-डिपार्टमेंट ट्रांसफर और कॉमन कैडर पॉलिसी जैसी योजनाएं भी लागू की गई थीं, लेकिन इनका असर जमीनी स्तर पर नजर नहीं आ रहा। पर्सनल विभाग पर भी पिछले कई वर्षों से ट्रांसफर प्रक्रिया को नजरअंदाज करने के आरोप हैं।
डीसी ऑफिस में ट्रांसफर नियमों की अनदेखी और आउटसोर्स कर्मचारियों की भूमिका को लेकर उठ रहे सवालों के बीच प्रशासन का यह नया आदेश एक बड़ा संकेत माना जा रहा है। यदि इन निर्देशों को सख्ती से लागू किया गया, तो इससे न केवल वित्तीय पारदर्शिता बढ़ेगी बल्कि प्रशासनिक व्यवस्था में भी सुधार आने की उम्मीद है। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि डीसी ऑफिस समेत अन्य विभाग इन निर्देशों को कितनी गंभीरता से लागू करते हैं।












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