April 6, 2026 5:03 am

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पंचकूला में प्राइवेट फाइनेंसरों का गोरखधंधा बेनकाब महंगे ब्याज, ब्लैंक कागजों पर साइन और ब्लैकमेलिंग का जाल

फाइनेंसर के घर 10 घंटे की रेड, 18 लाख कैश व भारी मात्रा में सोना-चांदी बरामद
पंचकूला। पंचकूला में प्राइवेट फाइनेंसरों के अवैध धंधे का बड़ा खुलासा हुआ है। जरूरतमंद लोगों को ऊंची ब्याज दरों पर कर्ज देकर, उनसे खाली कागजात पर साइन करवाने, मकान-दुकान के एग्रीमेंट अपने नाम कराने और बाद में ब्लैकमेलिंग व एक्सटॉर्शन के जरिए करोड़ों की वसूली का मामला सामने आया है। इस पूरे गोरखधंधे में कुछ पुलिसकर्मियों की मिलीभगत के भी आरोप लगाए गए हैं।
सेक्टर-26 निवासी बिजनेसमैन कपिल चावला की शिकायत पर सेक्टर-17 निवासी प्राइवेट फाइनेंसर मुकेश गोयल के खिलाफ सेक्टर-14 महिला थाना पुलिस ने गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया है।
10 घंटे 30 मिनट तक चली पुलिस रेड
मामला दर्ज होने के अगले ही दिन मंगलवार, 6 जनवरी को सुबह करीब 7:30 बजे एसीपी विक्रम नेहरा के नेतृत्व में सीआईए-19, महिला थाना और अन्य पुलिस टीमों ने मुकेश गोयल के घर पर रेड की।
रेड करीब 10 घंटे 30 मिनट तक चली। इस दौरान घर के हर कमरे, अलमारियों और गाड़ियों की गहन तलाशी ली गई। परिवार के सभी सदस्यों के मोबाइल फोन जब्त कर लिए गए और किसी को भी बाहर आने-जाने की अनुमति नहीं दी गई।
रेड के दौरान पुलिस ने
18 लाख रुपये नकद,
990 ग्राम सोना,
करीब 4 किलो चांदी,
कई लोगों के चेक,
और प्रॉपर्टी से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेज बरामद किए।
शाम करीब 6 बजे सीआईए-19 की टीम ने आरोपी मुकेश गोयल को हिरासत में ले लिया।
सीआईए-19 इंचार्ज मुकेश सैनी ने बताया कि आरोपी के खिलाफ ब्लैकमेलिंग और एक्सटॉर्शन की शिकायत पर कार्रवाई की गई है और मामले की जांच आगे भी जारी है।
87 लाख का कर्ज, ब्याज बढ़ाकर 8 प्रतिशत
शिकायतकर्ता कपिल चावला ने पुलिस को बताया कि वह अलीपुर-बरवाला में दवाइयों की फैक्टरी चलाते हैं। कुछ साल पहले उन्हें पैसों की जरूरत पड़ी, लेकिन बैंक से लोन नहीं मिल सका। इसके बाद जानकारों के माध्यम से उनकी मुलाकात सेक्टर-17 निवासी मुकेश गोयल से हुई, जो ब्याज पर पैसा देने का काम करता था।
आरोप है कि मुकेश ने शुरुआत में 2 प्रतिशत मासिक ब्याज पर कर्ज देने का वादा किया और
खाली कागजात,
कपिल व उनके पिता के साइन किए हुए चेक,
और सेक्टर-26 स्थित उनके मकान का एग्रीमेंट टू सेल अपने नाम करवा लिया।
जनवरी से सितंबर 2024 के बीच आरोपी ने किस्तों में कुल 87 लाख रुपये दिए। कुछ समय बाद ब्याज दर बढ़ाकर 8 प्रतिशत मासिक कर दी गई और भुगतान में देरी पर 1 लाख रुपये प्रतिदिन जुर्माना वसूलने लगा।
जान से मारने की धमकी और मारपीट का आरोप
कपिल चावला का आरोप है कि जब उन्होंने पैसे देने में असमर्थता जताई तो आरोपी ने उन्हें और उनके परिवार को बंदूक दिखाकर जान से मारने की धमकी दी। मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया।
ब्लैकमेलिंग के दबाव में कपिल को हिमाचल प्रदेश स्थित अपनी फार्मा कंपनी के शेयर आरोपी की पत्नी और बेटे के नाम ट्रांसफर करने पड़े। बाद में पता चला कि आरोपी ने उन शेयरों को अपनी दूसरी कंपनी के नाम पर बैंक में गिरवी रखकर करोड़ों का लोन भी ले लिया।
शिकायत में बताया गया है कि
87 लाख के बदले
कपिल अब तक 29 लाख रुपये बैंक के माध्यम से
और करीब 1.20 करोड़ रुपये नकद दे चुका है,
इसके बावजूद आरोपी लगातार और पैसों की मांग कर रहा था।
ऑफिस में बंधक बनाकर जूतों से पीटने का आरोप
शिकायतकर्ता के अनुसार, 8 नवंबर 2025 को आरोपी ने कपिल को अपने दफ्तर में बंधक बनाकर जूतों से पीटा और जान से मारने की धमकी दी।
इन धाराओं में दर्ज हुआ मामला
पुलिस ने आरोपी के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की
धारा 115 (जानबूझकर नुकसान पहुंचाना),
धारा 308(2) (जबरन वसूली),
धारा 308(5) (झूठे आरोप लगाकर डराना-धमकाना व ब्लैकमेलिंग),
धारा 351(3) (आपराधिक धमकी)
के तहत मामला दर्ज किया है।
पुलिस की भूमिका भी जांच के घेरे में
मामले में यह भी आरोप लगाए जा रहे हैं कि इस अवैध फाइनेंसिंग नेटवर्क को कुछ पुलिसकर्मियों का संरक्षण मिला हुआ था। पुलिस अब इस एंगल से भी जांच कर रही है।
फिलहाल आरोपी से पूछताछ जारी है और पुलिस का कहना है कि आने वाले दिनों में इस गोरखधंधे से जुड़े और बड़े खुलासे हो सकते हैं।

पंचकूला पुलिस के दो दर्जन कर्मी भी फाईन्सर
सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार पंचकूला में चल रहे इस प्राइवेट फाइनेंस के अवैध नेटवर्क में पुलिस विभाग के दो दर्जन से अधिक कर्मियों की संलिप्तता भी सामने आ रही है। आरोप है कि ये पुलिसकर्मी दिन में नियमित ड्यूटी निभाने के बाद शाम के समय बाजारों में रेहड़ी-फड़ी और छोटे दुकानदारों से कर्ज की वसूली में जुट जाते हैं।
सूत्रों के मुताबिक, इन पुलिसकर्मियों ने वसूली के लिए अलग-अलग युवक रखे हुए हैं, जो तय समय पर रकम इकट्ठा करते हैं। भुगतान में देरी होने पर वर्दी के रौब का इस्तेमाल करते हुए पेनल्टी लगाकर जबरन वसूली की जाती है।
कई मामलों में मारपीट और धमकाने की घटनाएं भी सामने आई हैं, हालांकि पीड़ित डर के कारण सामने आने से बच रहे हैं। सूत्रों का दावा है कि यह अवैध फाइनेंसिंग नेटवर्क लंबे समय से सक्रिय है और अब इस मामले के उजागर होने के बाद पुलिस विभाग की भूमिका भी जांच के घेरे में आ सकती है।

BabuGiri Hindi
Author: BabuGiri Hindi

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