PGI ने मनाई सारथी प्रोजेक्ट’ की दूसरी वर्षगांठ
बाबूगिरी हिंदी ब्यूरो
चंडीगढ़, 6 मई 2026: पोस्टग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च में मंगलवार को ‘सारथी प्रोजेक्ट’ की दूसरी वर्षगांठ सेक्टर-12 स्थित ऑडिटोरियम में उत्साहपूर्वक मनाई गई। इस अवसर पर हरियाणा के मुख्य सचिव एच. राजेश प्रसाद तथा शिक्षा सचिव प्रेरणा पूरी मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के दौरान राजकीय कन्या मॉडल वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, सेक्टर-20बी की 21 एनएसएस स्वयंसेविकाओं के दल को उनकी उत्कृष्ट रोगी-सेवा के लिए पीजीआईएमईआर के निदेशक द्वारा सम्मानित किया गया। इस दल में प्रधानाचार्या रुचि ग्रोवर और एनएसएस कार्यक्रम अधिकारी सुनीता श्योराण भी शामिल रहीं।
स्वयंसेविकाओं ने अस्पताल में मरीजों के पंजीकरण, लैब जांच, दृष्टि परीक्षण और व्हीलचेयर सहायता जैसे महत्वपूर्ण कार्यों में सराहनीय योगदान दिया। उनके इस समर्पण की सभी ने भूरी-भूरी प्रशंसा की।
इस अवसर पर टीम ने सेवा का अवसर प्रदान करने के लिए एनएसएस के राज्य संपर्क अधिकारी डॉ. नेमी चंद का आभार व्यक्त किया और एनएसएस के मूल मंत्र ‘मैं नहीं, आप’ को दोहराते हुए समाज सेवा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता जताई।
पीजीआईएमईआर में ‘सारथी दिवस’ का द्वितीय वार्षिक आयोजन उत्साह और गरिमा के साथ किया गया। यह आयोजन ‘सारथी’ पहल के दो सफल वर्षों को समर्पित रहा, जिसका उद्देश्य अस्पताल में रोगी देखभाल और सुविधाओं को अधिक सुलभ एवं प्रभावी बनाना है।
पीजीआईएमईआर के निदेशक प्रो. विवेक लाल, उपनिदेशक (प्रशासन) पंकज राय, अधिष्ठाता (अनुसंधान) प्रो. संजय जैन, चिकित्सा अधीक्षक प्रो. अशोक कुमार सहित कई शिक्षण संस्थानों के प्राचार्य और एनएसएस समन्वयक मौजूद रहे।
कार्यक्रम के दौरान ‘सारथी’ परियोजना की दो वर्षों की उपलब्धियों को विस्तार से प्रस्तुत किया गया। एक विशेष फिल्म के माध्यम से इसके विकास और प्रभाव को दर्शाया गया। इस मौके पर 25 सहयोगी शैक्षणिक संस्थानों, प्राचार्यों, एनएसएस अधिकारियों और समर्पित स्वयंसेवकों (‘ब्रेवहार्ट्स’) को उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए सम्मानित किया गया।
मुख्य अतिथि एच. राजेश प्रसाद ने अपने संबोधन में कहा कि ‘सारथी’ पहल सहानुभूति, करुणा, सामाजिक उत्तरदायित्व और अनुभवात्मक शिक्षण का अनूठा संगम है। उन्होंने कहा कि बड़े अस्पतालों में मरीजों के लिए मार्गदर्शन पाना कठिन होता है, ऐसे में युवा स्वयंसेवक ‘सारथी’ बनकर मरीजों को सम्मान और संवेदनशीलता के साथ सहायता प्रदान करते हैं। उन्होंने इस पहल को देशभर में स्वास्थ्य सेवाओं के अनुभव को बदलने की क्षमता वाला बताया।
निदेशक प्रो. विवेक लाल ने बताया कि 6 मई 2024 को शुरू हुई इस पहल के तहत छात्र स्वयंसेवकों को अस्पताल की गैर-चिकित्सीय प्रक्रियाओं—जैसे पंजीकरण, जांच संबंधी मार्गदर्शन और मरीजों की सहायता—में सक्रिय रूप से शामिल किया गया है। उन्होंने स्वयंसेवकों को ‘ब्रेवहार्ट्स’ बताते हुए उनकी भूमिका की सराहना की।
उपनिदेशक (प्रशासन) पंकज राय ने जानकारी दी कि अब तक 2,000 से अधिक छात्र स्वयंसेवक 1.24 लाख से ज्यादा सेवा घंटे दे चुके हैं, जिससे लाखों मरीजों और उनके परिजनों को लाभ मिला है। उन्होंने बताया कि इस पहल को स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा अनुकरणीय मॉडल के रूप में मान्यता दी गई है और युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय ने भी इसकी सराहना की है।
कार्यक्रम का समापन इस संकल्प के साथ हुआ कि ‘सारथी’ पहल को और अधिक सशक्त बनाकर देशभर के स्वास्थ्य संस्थानों तक विस्तारित किया जाएगा।













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