ब्लैकलिस्ट फर्मों को दूसरी कंपनियों के नाम पर करोड़ों के काम, अधूरे प्रोजेक्ट्स के बावजूद भुगतान जारी, विजिलेंस जांच की उठी मांग
आरटीआई में खुली टेंडरों की पोल
बाबूगिरी हिंदी ब्यूरो
पंचकूला, 20 मई। हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण पंचकूला एक बार फिर गंभीर विवादों में घिरता नजर आ रहा है। अंधा बांटे रेवड़ी फिर फिर अपनो को दे, यह कहावत पंचकूला HSVP पर लागू होई है। टेंडर समय पर पूरा नही करने पर फिर भी बार बार ब्लैकलिस्ट फर्मो व उनकी सिस्टर कन्सर्न फर्मो को नाम बदलकर टेंडर अलॉट किए जा रहे है। HSVP में टेंडरों के नाम पर करोड़ों रुपये के भ्रष्टाचार, अधिकारियों-ठेकेदारों की मिलीभगत और नियमों की खुलेआम अनदेखी के आरोपों ने पूरे शहर में हलचल मचा दी है। आरोप है कि विभाग के कुछ प्रभावशाली इंजीनियरों और अधिकारियों ने मिलकर टेंडर प्रक्रिया को केवल कागजों तक सीमित कर दिया है, जबकि जमीनी स्तर पर सरकारी धन की खुली लूट चल रही है। यह सब आरटीआई से मिली जानकारी में टेंडरों की पोल खुलती नजर आ रही है।

सूत्रों के अनुसार, पंचकूला के सेक्टर-5 में करीब 49 लाख 80 हजार रुपये के एक कार्य को बाद में बढ़ाकर 4 करोड़ रुपये से अधिक तक पहुंचा दिया गया। हैरानी की बात यह है कि इस पूरे मामले में न तो कोई पारदर्शी सार्वजनिक नोटिस जारी किया गया और न ही जनता को जानकारी दी गई। आरोप है कि विभाग के भीतर बैठा एक ‘फिक्स नेटवर्क’ चुनिंदा ठेकेदारों को फायदा पहुंचाने के लिए नियमों को ताक पर रख रहा है।
ब्लैकलिस्ट फर्म फिर मैदान में, नाम बदला और मिल गया टेंडर
मामले का सबसे चौंकाने वाला पहलू यह बताया जा रहा है कि जिन फर्मों को पहले खराब कार्य और अनियमितताओं के चलते ब्लैकलिस्ट किया गया था, उन्हीं फर्म मालिकों ने दूसरी कंपनियां बनाकर फिर से टेंडर हासिल कर लिए। आरोप है कि यह सब इंजीनियरों और अधिकारियों की सीधी मेहरबानी से हुआ।
सूत्र बताते हैं कि ब्लैकलिस्ट की गई एक फर्म की सिस्टर कन्सर्न कंपनी को पहले लगभग 2 करोड़ रुपये का काम दिया गया, जिसे बाद में बढ़ाकर करीब 10 करोड़ रुपये तक एक्सटेंड कर दिया गया। सवाल यह उठ रहा है कि आखिर किन परिस्थितियों में इतनी बड़ी राशि का विस्तार किया गया और क्या इसके लिए सभी वैधानिक प्रक्रियाओं का पालन किया गया था या नहीं।

अधूरे काम, लेकिन भुगतान पूरा
शहर में कई ऐसे प्रोजेक्ट हैं जो वर्षों बाद भी अधूरे पड़े हैं, लेकिन संबंधित ठेकेदारों को भुगतान लगातार जारी रहने के आरोप लग रहे हैं। नाडा साहिब क्षेत्र में पाइप लाइन डालने का कार्य इसका बड़ा उदाहरण बताया जा रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि काम कई सालों से पूरा नहीं हुआ, लेकिन फाइलों में भुगतान और प्रगति रिपोर्ट आगे बढ़ती रही।
इससे यह सवाल खड़ा हो गया है कि आखिर विभागीय अधिकारी बिना कार्य पूरा हुए भुगतान कैसे जारी कर रहे हैं। लोगों का आरोप है कि सरकारी खजाने को करोड़ों रुपये का नुकसान पहुंचाया जा रहा है, जबकि आम जनता मूलभूत सुविधाओं के लिए परेशान है।
वर्षों से एक ही कुर्सी पर जमे इंजीनियर
मामले में एक और गंभीर आरोप यह है कि विभाग के कई इंजीनियर वर्षों से नियमों के विपरीत पंचकूला में ही तैनात हैं। प्रशासनिक नियमों के अनुसार समय-समय पर अधिकारियों का तबादला होना चाहिए, लेकिन कुछ अधिकारी लंबे समय से एक ही सीट पर बैठे हुए हैं। ज्वाइनिंग से लेकर रिटायरमेंट की भी यही से तैयारी है। आरोप है कि इसी वजह से विभाग में ठेकेदारों और अधिकारियों का मजबूत गठजोड़ बन गया है, जिसने पूरे सिस्टम को प्रभावित कर रखा है।
जनता के टैक्स से सरकार को करोड़ों का चूना
सामाजिक संगठनों और स्थानीय निवासियों का कहना है कि HSVP में चल रहे इस कथित भ्रष्टाचार का सीधा असर जनता पर पड़ रहा है। जनता के टैक्स से आने वाला पैसा विकास कार्यों पर खर्च होने की बजाय भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ रहा है। शहर में अब यह चर्चा आम हो चुकी है कि विभाग में बिना ‘सेटिंग’ के कोई बड़ा टेंडर संभव नहीं है।
विजिलेंस जांच की मांग तेज
पूरा मामला सामने आने के बाद अब सामाजिक संगठनों, आरटीआई कार्यकर्ताओं और स्थानीय लोगों ने विजिलेंस जांच की मांग तेज कर दी है। मांग की जा रही है कि पिछले पांच वर्षों में HSVP पंचकूला द्वारा जारी किए गए सभी टेंडरों, एक्सटेंशन, भुगतान और ब्लैकलिस्ट फर्मों से जुड़े मामलों की उच्चस्तरीय जांच करवाई जाए।
लोगों का कहना है कि यदि निष्पक्ष जांच हुई तो करोड़ों रुपये के इस कथित टेंडर घोटाले में कई बड़े अधिकारियों और ठेकेदारों के नाम सामने आ सकते हैं।
अब देखने वाली बात यह होगी कि सरकार और प्रशासन इस पूरे मामले पर क्या रुख अपनाते हैं और क्या वास्तव में भ्रष्टाचार के आरोपों की निष्पक्ष जांच हो पाती है या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा।













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