बाबूगिरी हिंदी ब्यूरो
चंडीगढ़, 25 मई: पंजाब विश्वविद्यालय के मानवविज्ञान विभाग ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए विभिन्न स्नातक, स्नातकोत्तर, डिप्लोमा और पीएचडी पाठ्यक्रमों में प्रवेश हेतु आवेदन आमंत्रित किए हैं। विभाग राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 के तहत मानवविज्ञान में बीएससी (ऑनर्स), एमएससी (ऑनर्स) विद रिसर्च, फोरेंसिक विज्ञान एवं अपराध विज्ञान में डिप्लोमा और पीएचडी कार्यक्रम संचालित कर रहा है।
विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार एमएससी (ऑनर्स) विद रिसर्च/एमएससी (ऑनर्स) दो वर्षीय कार्यक्रम में प्रवेश मेरिट के आधार पर होगा। ऐसे अभ्यर्थी जिन्होंने पंजाब विश्वविद्यालय या यूजीसी से मान्यता प्राप्त किसी भारतीय अथवा विदेशी विश्वविद्यालय से एनईपी/सीबीसीएस ढांचे के अंतर्गत बीएससी अथवा समकक्ष डिग्री प्राप्त की हो, आवेदन कर सकते हैं। इसके अलावा किसी भी स्ट्रीम में स्नातक डिग्री रखने वाले उम्मीदवार, जिन्होंने 10+2 स्तर पर विज्ञान विषय पढ़े हों और न्यूनतम 50 प्रतिशत अंक प्राप्त किए हों, भी पात्र होंगे।
फोरेंसिक विज्ञान और अपराध विज्ञान डिप्लोमा कार्यक्रम में भी प्रवेश योग्यता के आधार पर दिया जाएगा। विज्ञान विषय के साथ 10+2 या समकक्ष परीक्षा में न्यूनतम 50 प्रतिशत अंक प्राप्त करने वाले उम्मीदवार आवेदन के पात्र हैं।मानवशास्त्र में बीएससी (ऑनर्स) कार्यक्रम में कुल 30 सीटें निर्धारित की गई हैं, जिनमें एनआरआई एवं विदेशी छात्रों के लिए आरक्षित सीटें भी शामिल हैं। प्रवेश पीयू-सीईटी (यूजी) परीक्षा के आधार पर होगा। इसमें प्रवेश परीक्षा को 75 प्रतिशत तथा शैक्षणिक योग्यता को 25 प्रतिशत वेटेज दिया जाएगा। आवेदन के लिए उम्मीदवार का अंग्रेजी के साथ भौतिकी, रसायन विज्ञान तथा गणित या जीवविज्ञान विषयों सहित 12वीं कक्षा में न्यूनतम 50 प्रतिशत अंक होना अनिवार्य है
विभाग में अत्याधुनिक प्रयोगशालाएं और शोध सुविधाएं उपलब्ध हैं। इनमें एंथ्रोपोमेट्री लैब, आणविक एवं जैव रासायनिक मानव विज्ञान प्रयोगशाला, पुरामानव विज्ञान एवं प्रागैतिहासिक पुरातत्व इकाई, त्वचा चित्रलिपि प्रयोगशाला, कंप्यूटर लैब, मानव संग्रहालय और सेमिनार हॉल शामिल हैं।
विभाग के पूर्व छात्र देश-विदेश की प्रतिष्ठित संस्थाओं में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। इनमें Boeing और Nokia जैसी कंपनियां शामिल हैं। इसके अलावा छात्र पीजीआईएमईआर, जीएमसीएच-32, आईसीएमआर और भारतीय मानवविज्ञान सर्वेक्षण जैसे संस्थानों में भी कार्यरत हैं। कई विद्यार्थियों ने विदेशों में उच्च शिक्षा एवं शोध कार्य भी किया है।
मानवविज्ञान विभाग की स्थापना वर्ष 1960 में दिवंगत प्रोफेसर एसआरके चोपड़ा ने की थी। विभाग पुरामानव विज्ञान, फोरेंसिक मानव विज्ञान, आणविक मानव विज्ञान, चिकित्सा मानव विज्ञान तथा सामाजिक-सांस्कृतिक मानव विज्ञान के क्षेत्रों में अपने शोध कार्यों के लिए विशेष पहचान रखता है। विभाग द्वारा शिवालिक क्षेत्र से प्राइमेट एवं स्तनधारी जीवाश्मों की महत्वपूर्ण खोजें भी की गई हैं। विभाग को यूजीसी-एएसआईएचएसएस, एफआईएसटी-डीएसटी तथा यूजीसी सेंटर फॉर एडवांस्ड स्टडीज के तहत सहायता प्राप्त हो चुकी है।













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