विदेश मंत्रालय और स्पेन स्थित भारतीय दूतावास के हस्तक्षेप से ऐतिहासिक फर्नीचर नीलामी सूची से हटाया, अब भारत वापसी के प्रयास होंगे तेज
रमेश गोयत
चंडीगढ़, 21 जुलाई। चंडीगढ़ की विश्वप्रसिद्ध विरासत को बचाने की दिशा में चंडीगढ़ प्रशासन को बड़ी सफलता मिली है। स्पेन के बार्सिलोना में 22 जुलाई 2026 को प्रस्तावित चंडीगढ़ के ऐतिहासिक विरासत फर्नीचर की नीलामी को प्रशासन की त्वरित कार्रवाई और भारत सरकार के राजनयिक हस्तक्षेप से रोक दिया गया है। विदेश मंत्रालय ने चंडीगढ़ प्रशासन को आधिकारिक रूप से सूचित किया है कि स्पेन स्थित भारतीय दूतावास के हस्तक्षेप के बाद संबंधित विरासत फर्नीचर को नीलामी सूची से वापस ले लिया गया है।
यह सफलता ऐसे समय मिली है जब हाल के दिनों में चंडीगढ़ की विरासत फर्नीचर विदेशों में लगातार नीलामी के लिए सामने आ रही है और प्रशासन इन मामलों को लेकर पूरी तरह सतर्क है।
प्रशासक के निर्देश पर तुरंत हुई कार्रवाई
चंडीगढ़ के प्रशासक गुलाब चंद कटारिया के निर्देश तथा मुख्य सचिव एच. राजेश प्रसाद के मार्गदर्शन में संस्कृति सचिव डॉ. सैयद आबिद रशीद शाह ने मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल भारत सरकार के विदेश मंत्रालय के समक्ष उठाया। प्रशासन ने विदेश मंत्रालय से अनुरोध किया कि नीलामी को तुरंत रोका जाए और संबंधित विरासत संपत्तियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए स्पेन सरकार तथा भारतीय दूतावास के माध्यम से आवश्यक राजनयिक हस्तक्षेप किया जाए।
विदेश मंत्रालय ने इस अनुरोध पर तुरंत कार्रवाई करते हुए स्पेन स्थित भारतीय दूतावास को सक्रिय किया, जिसके बाद संबंधित नीलामी संस्था ने फर्नीचर को नीलामी से हटा लिया।
स्वामित्व और वैधता पर उठाए गए सवाल
प्रशासन के अनुसार जिस फर्नीचर को स्पेन में नीलामी के लिए सूचीबद्ध किया गया था, वह चंडीगढ़ की संस्थागत विरासत और शहर की आधुनिकतावादी वास्तुकला का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। प्रशासन ने इस फर्नीचर के स्वामित्व, उसके स्रोत और भारत से बाहर ले जाए जाने की वैधता पर गंभीर सवाल उठाए थे।
इसी आधार पर विदेश मंत्रालय से अनुरोध किया गया था कि मामले की जांच कराई जाए और विरासत संपत्ति को सुरक्षित रखा जाए ताकि उसकी पुनर्प्राप्ति संभव हो सके।
अब भारत वापस लाने की होगी कोशिश
चंडीगढ़ प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि नीलामी रुकना पहला महत्वपूर्ण कदम है। अब प्रशासन इस फर्नीचर के सत्यापन, कानूनी स्वामित्व की पुष्टि, पुनर्प्राप्ति और भारत वापसी सुनिश्चित करने के लिए सभी आवश्यक कानूनी, प्रशासनिक और राजनयिक प्रयास जारी रखेगा।
प्रशासन ने इस कार्रवाई में सहयोग देने के लिए भारत सरकार के विदेश मंत्रालय, स्पेन स्थित भारतीय दूतावास और सभी संबंधित अधिकारियों का आभार भी व्यक्त किया है।
विदेशों में बिक रही चंडीगढ़ की विरासत पर बढ़ी चिंता
स्पेन का यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब कुछ दिन पहले अमेरिका और स्पेन में चंडीगढ़ की दो ऐतिहासिक कुर्सियों समेत अन्य विरासत फर्नीचर की नीलामी की तैयारियों का खुलासा हुआ था। इससे पहले प्रशासन पेरिस में प्रस्तावित विरासत फर्नीचर की नीलामी भी रुकवाने में सफल रहा था।
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार अमेरिका और स्पेन में सूचीबद्ध दो कुर्सियां संयुक्त पंजाब विधानसभा काल के स्टेट लेजिस्लेटिव मेंबर्स ब्लॉक से जुड़ी हो सकती हैं। हालांकि प्रशासन ने कहा है कि इसकी अंतिम पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही की जाएगी।
सरकारी संस्थान में विरासत फर्नीचर से पहचान मिटाने की साजिश
विदेशी नीलामी के मामलों के बीच एक और गंभीर मामला सामने आया है। संस्कृति विभाग की शिकायत पर सेक्टर-3 थाना पुलिस ने सरकारी संस्थान में सुरक्षित रखे गए विरासत फर्नीचर से उसकी पहचान बताने वाले मूल स्टेंसिल चिह्न उखाड़कर चोरी किए जाने के मामले में अज्ञात लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है।
संस्कृति विभाग के निदेशक नवीन रत्तू की शिकायत के अनुसार, स्टेंसिल चिह्न फर्नीचर की वास्तविक पहचान, सरकारी रिकॉर्ड और उसके ऐतिहासिक महत्व का सबसे महत्वपूर्ण प्रमाण होते हैं। इन्हें हटाए जाने से आशंका जताई जा रही है कि भविष्य में इन वस्तुओं की पहचान छिपाकर उन्हें अंतरराष्ट्रीय बाजार में बेचने की साजिश रची जा सकती है।
पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 305(ई) और 61(2) के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। सीसीटीवी फुटेज, विजिटर रजिस्टर, कर्मचारियों की गतिविधियों और सुरक्षा रिकॉर्ड की जांच की जा रही है।
यूनेस्को विश्व धरोहर से जुड़ा है पूरा मामला
चंडीगढ़ का कैपिटल कॉम्प्लेक्स यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल है। इसके भवनों के साथ उनमें रखा गया मूल फर्नीचर भी प्रसिद्ध वास्तुकार ली कॉर्बुजिए और उनकी टीम की डिजाइन अवधारणा का अभिन्न हिस्सा माना जाता है। इसलिए इन वस्तुओं का विदेशों में पहुंचना और उनकी पहचान मिटाने की कोशिश को शहर की सांस्कृतिक विरासत के लिए गंभीर खतरे के रूप में देखा जा रहा है।
संगठित नेटवर्क की भी होगी जांच
प्रशासन पहले ही पंजाब विश्वविद्यालय और पीजीआई से जुड़े विरासत फर्नीचर की कथित चोरी और अवैध बिक्री के मामलों में एफआईआर दर्ज करा चुका है। अब जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि दशकों पुराने सरकारी विरासत फर्नीचर को किसने, कब और कैसे सरकारी संस्थानों से बाहर निकाला तथा अंतरराष्ट्रीय नीलामी बाजार तक पहुंचाया। साथ ही यह भी जांच की जाएगी कि क्या विदेशी नीलामी और स्टेंसिल चोरी की घटनाओं के पीछे कोई संगठित नेटवर्क सक्रिय है।











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