June 5, 2026 5:31 am

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CHANDIGARH NEWS: दिव्यांगजनों के लिए YHAI चंडीगढ़ शाखा का विशेष हिमालयन ट्रेक अभियान शुरू

सर पास ट्रेक के लिए 43 सदस्यीय दल रवाना, साहसिक पर्यटन में समावेशिता को बढ़ावा
बाबूगिरी हिंदी न्यूज़
कुल्लू/चंडीगढ़, 2 जून 2026। यूथ हॉस्टल्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (YHAI) की चंडीगढ़ स्टेट ब्रांच द्वारा दिव्यांगजनों के लिए विशेष हिमालयन ट्रेकिंग अभियान का आयोजन किया जा रहा है। हिमाचल प्रदेश के प्रसिद्ध सर पास ट्रेक के लिए यह विशेष अभियान 31 मई 2026 से शुरू हुआ है, जिसका उद्देश्य दिव्यांगजनों को साहसिक गतिविधियों से जोड़ते हुए उनमें आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता और आत्मनिर्भरता की भावना को मजबूत करना है।
सीओबाग (लेफ्ट बैंक), कुल्लू स्थित बेस कैंप में आवश्यक अनुकूलन (एक्लेमेटाइजेशन) प्रक्रिया पूरी होने के बाद मंगलवार को ट्रेकिंग दल को औपचारिक रूप से रवाना किया गया। इस अवसर पर वाईएचएआई चंडीगढ़ स्टेट ब्रांच के संस्थापक अध्यक्ष एवं संयोजक राजेश जोगपाल ने हरी झंडी दिखाकर अभियान की शुरुआत की।

इस विशेष ट्रेकिंग अभियान में 18 दिव्यांग प्रतिभागी हिस्सा ले रहे हैं। इनके साथ समर्पित स्वयंसेवक, अनुभवी ट्रेक लीडर और वाईएचएआई अधिकारी भी मौजूद हैं। कुल मिलाकर 43 सदस्यीय दल इस हिमालयी अभियान का हिस्सा बना है।

अभियान में शामिल प्रतिभागियों में नितेश शर्मा, दिया नेगी, महिताब सिंह, सुनील कुमार, पार्थ वशिष्ठ, ऐशना, अंकुश, गितेश, पंकज, मनोज सिंह नेगी, रिशव, चांद, फर्दीन, अतुल, सोनू, अरुण, राजिंदर और पूजा शामिल हैं। इन सभी प्रतिभागियों ने अपने साहस, दृढ़ इच्छाशक्ति और आत्मविश्वास से समावेशी साहसिक पर्यटन की नई मिसाल पेश की है।

ट्रेकिंग दल चार रातें ऊंचाई वाले कैंपों में बिताएगा और 7 जून 2026 को वापस सीओबाग बेस कैंप लौटेगा।
सर पास हिमालय के सबसे लोकप्रिय और खूबसूरत ट्रेकिंग स्थलों में गिना जाता है। स्थानीय भाषा में “सर” शब्द का अर्थ झील या जमे हुए जल स्रोत से होता है। इस पास का नाम शिखर के निकट स्थित एक मौसमी झील के कारण पड़ा, जो अधिकतर समय बर्फ से ढकी रहती है।

सर पास ट्रेक की शुरुआत पार्वती घाटी के प्रसिद्ध पर्यटन स्थल कसोल से होती है और इसका समापन बरशैणी में होता है। यह ट्रेक घने देवदार के जंगलों, पारंपरिक पहाड़ी गांवों, हरे-भरे घास के मैदानों, विशाल बर्फीले क्षेत्रों और रोमांचक स्नो स्लाइड के लिए प्रसिद्ध है। यही कारण है कि यह ट्रेक साहसिक गतिविधियों के शौकीनों के बीच काफी लोकप्रिय माना जाता है।
ट्रेक की चढ़ाई क्रमिक और संतुलित होने के कारण इसे शुरुआती ट्रेकर्स के लिए भी उपयुक्त माना जाता है, जबकि यह अनुभवी ट्रेकर्स को भी चुनौतीपूर्ण और यादगार अनुभव प्रदान करता है। सर पास को पार करने के बाद ट्रेकर्स को हिमालय की बर्फ से ढकी पर्वत श्रृंखलाओं का मनमोहक दृश्य देखने को मिलता है।
इस अवसर पर राजेश जोगपाल ने कहा कि साहसिक गतिविधियां और ट्रेकिंग जैसी चुनौतियां सभी लोगों के लिए सुलभ होनी चाहिए, चाहे उनकी शारीरिक सीमाएं कुछ भी हों। उन्होंने कहा कि ऐसे अभियान दिव्यांगजनों में आत्मविश्वास, आत्मनिर्भरता, साहस और सामाजिक समावेश को बढ़ावा देते हैं तथा उन्हें अपनी क्षमताओं को पहचानने का अवसर प्रदान करते हैं।
वाईएचएआई लंबे समय से देशभर में ट्रेकिंग, पर्वतारोहण और आउटडोर एजुकेशन कार्यक्रमों के माध्यम से युवाओं में साहसिक गतिविधियों, पर्यावरण संरक्षण, राष्ट्रीय एकता और व्यक्तित्व विकास को बढ़ावा देने का कार्य कर रहा है।
आयोजकों ने विश्वास जताया कि यह सर पास अभियान सभी प्रतिभागियों के लिए प्रेरणादायक और यादगार अनुभव साबित होगा तथा भारत में समावेशी साहसिक पर्यटन और दिव्यांगजन-अनुकूल ट्रेकिंग को नई दिशा देगा।

RAMESH GOYAT
Author: RAMESH GOYAT

With over 20 years of experience in Hindi journalism, Ramesh Goyat has served as District Bureau Chief in Kaithal and worked with the Haryana , Punjab , HP and UT Bureau in Chandigarh. Coming from a freedom fighter family, he is known for his fast, accurate, and credible reporting. Through Babugiri Hindi, he aims to deliver impartial and fact-based news to readers.

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