June 5, 2026 4:33 am

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PANCHKULA NEWS: विश्व साइकिल दिवस पर पंचकूला का विरोधाभास : 200 सार्वजनिक साइकिलें जंग खा रहीं

रमेश गोयत
पंचकूला। एक ओर पूरे विश्व में बुधवार को विश्व साइकिल दिवस मनाकर लोगों को स्वस्थ जीवनशैली अपनाने, पर्यावरण संरक्षण करने और ईंधन की बचत के लिए साइकिल चलाने के प्रति जागरूक किया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर पंचकूला में नगर निगम की करीब 200 सार्वजनिक साइकिलें वर्षों से बेकार पड़ी जंग खा रही हैं। करोड़ों रुपये की लागत से शुरू किया गया सार्वजनिक साइकिल शेयरिंग प्रोजेक्ट आज बदहाली का शिकार बना हुआ है।
नगर निगम पंचकूला द्वारा शहर में आधुनिक परिवहन व्यवस्था और प्रदूषण कम करने के उद्देश्य से सार्वजनिक साइकिल शेयरिंग परियोजना शुरू की गई थी। इसके तहत शहर के विभिन्न सेक्टरों में साइकिल स्टैंड बनाए गए थे, ताकि लोग छोटी दूरी तय करने के लिए मोटर वाहनों के बजाय साइकिल का उपयोग कर सकें। शुरुआती दौर में इस योजना को नागरिकों का अच्छा समर्थन भी मिला था और बड़ी संख्या में लोग इसका इस्तेमाल करते थे।
लेकिन समय के साथ रखरखाव की कमी, तकनीकी समस्याओं और संचालन में लापरवाही के चलते यह महत्वाकांक्षी परियोजना धीरे-धीरे ठप पड़ गई। वर्तमान में शहर के अधिकांश साइकिल स्टैंड बंद पड़े हैं, जबकि करीब 200 सार्वजनिक साइकिलें सेक्टर-12 स्थित कम्युनिटी सेंटर परिसर में खड़ी-खड़ी खराब हो रही हैं। कई साइकिलों में जंग लग चुकी है और लंबे समय से उपयोग न होने के कारण उनकी हालत खराब होती जा रही है।
जानकारी के अनुसार, नगर निगम ने पिछले करीब छह वर्षों में इस परियोजना पर लगभग 2.08 करोड़ रुपये खर्च किए। शहर के करीब 20 सेक्टरों में साइकिल ट्रैक भी विकसित किए गए थे, ताकि नागरिक सुरक्षित रूप से साइकिल चला सकें। इसके बावजूद योजना का सही संचालन नहीं हो पाने से करोड़ों रुपये का यह प्रोजेक्ट निष्क्रिय हो गया।

स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों का कहना है कि यदि इस परियोजना को दोबारा शुरू किया जाए तो इससे हजारों लोगों को लाभ मिल सकता है। लोगों का मानना है कि बढ़ती ट्रैफिक समस्या और पेट्रोल-डीजल की महंगाई के दौर में सार्वजनिक साइकिल व्यवस्था एक बेहतर विकल्प साबित हो सकती है। इससे शहर में यातायात का दबाव कम होगा, प्रदूषण घटेगा और लोगों का स्वास्थ्य भी बेहतर रहेगा।
नागरिकों का यह भी कहना है कि पंचकूला जैसे योजनाबद्ध शहर में साइकिल संस्कृति को बढ़ावा दिया जाना चाहिए। कई देशों और बड़े भारतीय शहरों में सार्वजनिक साइकिल शेयरिंग सिस्टम सफलतापूर्वक चल रहा है, लेकिन पंचकूला में यह योजना प्रशासनिक उदासीनता की भेंट चढ़ती दिखाई दे रही है।

सूत्रों के अनुसार, कुछ निजी कंपनियों ने इस परियोजना को दोबारा संचालित करने में रुचि दिखाई है, लेकिन अब तक नगर निगम की ओर से कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है। यदि समय रहते इस योजना को पुनर्जीवित नहीं किया गया तो करोड़ों रुपये की सार्वजनिक संपत्ति पूरी तरह बेकार हो सकती है।
इस संबंध में पंचकूला के मेयर शाम लाल बंसल ने कहा कि वह नगर निगम आयुक्त से बातचीत कर इस परियोजना को दोबारा शुरू करवाने का प्रयास करेंगे। उन्होंने कहा कि शहर के लोग इस सुविधा की मांग कर रहे हैं और विदेशों की तर्ज पर पंचकूला में भी साइकिल उपयोग को बढ़ावा दिया जाना चाहिए। मेयर ने भरोसा दिलाया कि नगर निगम इस दिशा में सकारात्मक कदम उठाने का प्रयास करेगा।
विश्व साइकिल दिवस के मौके पर यह सवाल भी उठ रहा है कि जब सरकारें और प्रशासन पर्यावरण संरक्षण तथा ग्रीन ट्रांसपोर्ट को बढ़ावा देने की बात कर रहे हैं, तब पंचकूला में करोड़ों रुपये की सार्वजनिक साइकिल परियोजना आखिर कब दोबारा पटरी पर लौटेगी।

RAMESH GOYAT
Author: RAMESH GOYAT

With over 20 years of experience in Hindi journalism, Ramesh Goyat has served as District Bureau Chief in Kaithal and worked with the Haryana , Punjab , HP and UT Bureau in Chandigarh. Coming from a freedom fighter family, he is known for his fast, accurate, and credible reporting. Through Babugiri Hindi, he aims to deliver impartial and fact-based news to readers.

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