June 15, 2026 4:06 pm

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CHANDIGARH NEWS: चंडीगढ़ UT में IAS बड़ा या PCS? सहकारिता विभाग की प्रशासनिक व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल

RCS की शक्तियां जूनियर अधिकारी को सौंपे जाने, अपीलीय व्यवस्था और वरिष्ठता विवाद को लेकर चर्चा तेज

रमेश गोयत

चंडीगढ़, 7 जून। चंडीगढ़ प्रशासन के सहकारिता विभाग और चंडीगढ़ स्टेट कोऑपरेटिव बैंक की प्रशासनिक संरचना इन दिनों गंभीर सवालों के घेरे में है। विभाग के भीतर वरिष्ठता, प्रोटोकॉल, अधिकार क्षेत्र और अपीलीय व्यवस्था को लेकर चल रही चर्चाओं ने न केवल प्रशासनिक हलकों में बल्कि आम जनता के बीच भी बहस छेड़ दी है। सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि आखिर चंडीगढ़ में प्रशासनिक पदक्रम (हाइरार्की) के नियमों का पालन हो रहा है या नहीं।
सूत्रों के अनुसार सहकारिता विभाग में ऐसी स्थिति बनी हुई है जहां एक आईएएस अधिकारी के आदेशों से जुड़े मामलों की सुनवाई पीसीएस अधिकारी स्तर पर हो रही है। वहीं रजिस्ट्रार कोऑपरेटिव सोसाइटीज (आरसीएस) से संबंधित कई शक्तियां भी एक जूनियर अधिकारी को डेलीगेट किए जाने की चर्चा है। इससे विभागीय अधिकारियों में असंतोष और भ्रम की स्थिति पैदा होने की बात कही जा रही है।

सहकारिता विभाग की व्यवस्था पर उठे सवाल
जानकारों के अनुसार सहकारिता विभाग में आरसीएस का पद विभाग का सर्वोच्च नियामक और अपीलीय प्राधिकरण माना जाता है। सहकारी बैंकों, सोसायटियों और प्रशासनिक निर्णयों से जुड़े मामलों में अंतिम स्तर पर आरसीएस की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।
मगर वर्तमान व्यवस्था को लेकर सवाल उठ रहे हैं कि जहां बैंक के प्रबंध निदेशक (एमडी) के पद पर आईएएस अधिकारी कार्यरत हैं, वहीं उनके आदेशों के खिलाफ अपील सुनने की जिम्मेदारी पीसीएस अधिकारी स्तर पर आ रही है। प्रशासनिक हलकों में इसे पदक्रम और वरिष्ठता के सिद्धांतों के विपरीत बताया जा रहा है।

पंजाब और हरियाणा की व्यवस्था का दिया जा रहा उदाहरण
सहकारिता क्षेत्र से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि पंजाब और हरियाणा जैसे राज्यों में आमतौर पर रजिस्ट्रार कोऑपरेटिव सोसाइटीज का पद आईएएस अधिकारी के पास होता है, जबकि अतिरिक्त रजिस्ट्रार या अन्य वरिष्ठ पदों पर पीसीएस अथवा एचसीएस अधिकारियों की नियुक्ति की जाती है।
इसी प्रकार सहकारी बैंकों में प्रबंध निदेशक के पद पर भी प्रायः सहकारिता विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को जिम्मेदारी दी जाती है। ऐसे में चंडीगढ़ की मौजूदा व्यवस्था को लेकर सवाल उठ रहे हैं कि क्या यहां प्रशासनिक संतुलन और पदक्रम का समुचित ध्यान रखा गया है।

जूनियर और सीनियर अधिकारियों के बीच बढ़ रही असहजता
सूत्रों का दावा है कि विभाग में कई वरिष्ठ अधिकारियों को ऐसे प्रशासनिक हालात का सामना करना पड़ रहा है जहां उन्हें कनिष्ठ अधिकारियों के अधीन कार्य करना पड़ रहा है। इससे अधिकारियों के बीच असहजता और मनोवैज्ञानिक दबाव की स्थिति बनने की चर्चा है।
कुछ अधिकारियों का मानना है कि यदि प्रशासनिक पदक्रम का सम्मान नहीं होगा तो निर्णय प्रक्रिया और विभागीय समन्वय दोनों प्रभावित हो सकते हैं। हालांकि इस विषय पर प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
आरसीएस की शक्तियों के प्रतिनिधिकरण पर भी बहस
विभागीय सूत्रों के अनुसार आरसीएस कार्यालय की कुछ शक्तियां अधीनस्थ स्तर पर डेलीगेट किए जाने को लेकर भी चर्चा चल रही है। आलोचकों का कहना है कि इससे अपीलीय और नियामक प्रक्रिया की निष्पक्षता प्रभावित हो सकती है, जबकि समर्थकों का तर्क है कि प्रशासनिक कार्यों के त्वरित निपटारे के लिए शक्तियों का प्रतिनिधिकरण आवश्यक होता है।
फिर भी सवाल यह उठ रहा है कि क्या ऐसे प्रतिनिधिकरण में वरिष्ठता और प्रशासनिक मर्यादा का पर्याप्त ध्यान रखा गया है।

 

 

बैंक प्रशासन और निदेशक मंडल को लेकर भी विवाद
चंडीगढ़ स्टेट कोऑपरेटिव बैंक से जुड़े कुछ मामलों ने भी विवाद को और बढ़ा दिया है। सूत्रों के अनुसार बैंक के कुछ निदेशकों के खिलाफ ऋण संबंधी शिकायतें आरसीएस कार्यालय तक पहुंची हैं। आरोप है कि कुछ मामलों में लिए गए ऋणों से संबंधित परियोजनाएं मौके पर दिखाई नहीं दे रही हैं।
शिकायतकर्ताओं का कहना है कि यदि कोई निदेशक बैंक का ऋण डिफाल्टर पाया जाता है तो सहकारी नियमों के तहत उसके खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है।

पूर्व एमडी के कार्यमुक्त होने को लेकर भी चर्चाएं
विभागीय गलियारों में यह भी चर्चा है कि बैंक की पूर्व प्रबंध निदेशक के पद छोड़ने के पीछे प्रशासनिक असंतुलन और अधिकार क्षेत्र से जुड़े मुद्दे भी एक कारण रहे हो सकते हैं। हालांकि इस संबंध में कोई आधिकारिक पुष्टि उपलब्ध नहीं है।

आरटीआई कार्यकर्ता ने उठाए सवाल
आरटीआई कार्यकर्ता आर.के. गर्ग ने चंडीगढ़ प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि प्रशासन अपने अधिकारियों के बीच ही स्पष्ट और न्यायसंगत व्यवस्था स्थापित नहीं कर पा रहा है तो आम नागरिकों का विश्वास प्रभावित होना स्वाभाविक है।
गर्ग का कहना है कि इस पूरे मामले को लेकर जल्द ही गृह मंत्रालय (एमएचए), नई दिल्ली के समक्ष विस्तृत शिकायत और दस्तावेज प्रस्तुत किए जाएंगे ताकि प्रशासनिक ढांचे की समीक्षा कराई जा सके।

जनता जानना चाहती है जवाब
सहकारिता विभाग में चल रही इन चर्चाओं के बीच सबसे बड़ा सवाल यही है कि चंडीगढ़ प्रशासन में वरिष्ठता, अधिकार और जवाबदेही की स्पष्ट व्यवस्था आखिर क्या है। क्या वर्तमान संरचना नियमों और प्रशासनिक परंपराओं के अनुरूप है या फिर इसमें सुधार की आवश्यकता है?
फिलहाल इन सवालों के जवाब प्रशासनिक स्तर पर मिलने बाकी हैं, लेकिन इतना तय है कि चंडीगढ़ के सहकारी तंत्र में उठे इस विवाद ने प्रशासनिक पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर नई बहस छेड़ दी है।

RAMESH GOYAT
Author: RAMESH GOYAT

With over 20 years of experience in Hindi journalism, Ramesh Goyat has served as District Bureau Chief in Kaithal and worked with the Haryana , Punjab , HP and UT Bureau in Chandigarh. Coming from a freedom fighter family, he is known for his fast, accurate, and credible reporting. Through Babugiri Hindi, he aims to deliver impartial and fact-based news to readers.

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