August 5, 2026 3:06 am

August 5, 2026 3:06 am

CHANDIGARH: वाईएचएआई चंडीगढ़ ने मोरनी हिल्स में दिव्यांग एवं ईडब्ल्यूएस बच्चों के लिए समावेशी प्रकृति अध्ययन भ्रमण किया आयोजित 

रमेश गोयत
चंडीगढ़, 3 अगस्त। भारत युवा छात्रावास संघ (वाईएचएआई) की चंडीगढ़ राज्य शाखा ने मोरनी हिल्स स्थित थपली नेचर कैंप में दिव्यांग बच्चों एवं आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) के सरकारी विद्यालयों में अध्ययनरत बच्चों के लिए समावेशी प्रकृति अध्ययन भ्रमण का आयोजन किया। कार्यक्रम का उद्देश्य विभिन्न पृष्ठभूमि और क्षमताओं वाले बच्चों को एक साथ प्रकृति के बीच सीखने, समझने और आनंद लेने का अवसर प्रदान करना था।
कार्यक्रम में लगभग 120 बच्चों ने भाग लिया, जिनमें करीब 80 एकल एवं बहु-दिव्यांग बच्चे तथा 40 ईडब्ल्यूएस परिवारों के बच्चे शामिल थे। दिव्यांग बच्चों के अभिभावकों और देखभालकर्ताओं ने भी इस भ्रमण में भाग लेकर बच्चों का उत्साह बढ़ाया।

सुबह कैंप पहुंचने पर प्रतिभागियों का स्वागत वाईएचएआई चंडीगढ़ राज्य शाखा के आयोजन सचिव राधेश्याम ने किया। सभी के लिए अल्पाहार एवं स्वागत पेय की व्यवस्था की गई। राज्य शाखा के संयोजक राजेश जोगपाल तथा नॉर्थ चंडीगढ़ इकाई के संयोजक अभिषेक मेहता ने बच्चों और अभिभावकों का स्वागत करते हुए दिनभर के कार्यक्रम की जानकारी दी। उन्होंने बच्चों को संदेश दिया कि प्रकृति का आनंद लें, उससे सीखें, लेकिन किसी भी पेड़-पौधे, पक्षी या जीव-जंतु को नुकसान न पहुंचाएं।

नेचर ट्रेजर हंट बना मुख्य आकर्षण
कार्यक्रम के दौरान बच्चों को चार समूहों में विभाजित कर प्रकृति भ्रमण कराया गया। उन्हें जंगल के रास्तों पर बीज, सूखे पत्ते, पक्षियों के पंख, शंकु, जंगली फल, तितलियां, कीट-पतंगे और अन्य प्राकृतिक वस्तुओं का अवलोकन करने के लिए प्रेरित किया गया। बच्चों को केवल प्राकृतिक रूप से गिरी हुई वस्तुएं ही एकत्र करने की अनुमति दी गई तथा पौधों या फूलों को तोड़ने से मना किया गया।
बरसात के मौसम को देखते हुए सुरक्षा के विशेष इंतजाम किए गए। बच्चों को समूह के साथ रहने, फिसलन वाले रास्तों पर सावधानी से चलने तथा वन्यजीवों के प्रति सतर्क रहने के निर्देश दिए गए।

प्रकृति बनी बच्चों की पाठशाला
भ्रमण के दौरान बच्चों ने चीड़ के शंकु, सूखी पत्तियां, अमलतास की फलियां, मोरपंख, पक्षियों के पंख, जंगली बेर, घोंघे के खोल, काई से ढके पत्थर, मशरूम तथा अनेक प्राकृतिक वस्तुओं का अवलोकन किया। उन्होंने चींटियों, तितलियों, घोंघों, पक्षियों और बंदरों को भी करीब से देखा तथा उनकी तस्वीरें लीं।
कैंप लौटने पर प्रत्येक समूह ने अपने अनुभव साझा किए और एकत्रित प्राकृतिक वस्तुओं की प्रदर्शनी लगाई। इस गतिविधि ने बच्चों में प्रकृति के प्रति जिज्ञासा, अवलोकन क्षमता और पर्यावरण के प्रति जागरूकता विकसित की।

सांस्कृतिक कार्यक्रम में दिखी सच्ची समावेशिता
सांस्कृतिक कार्यक्रम में बच्चों ने समूह नृत्य और मनोरंजक गतिविधियों में बढ़-चढ़कर भाग लिया। श्रवण एवं वाक दिव्यांग बच्चों ने सांकेतिक भाषा और दृश्य संकेतों की मदद से गीतों की लय को महसूस करते हुए नृत्य किया। धीरे-धीरे अन्य बच्चे भी उनके साथ शामिल हो गए और पूरा माहौल एकता और खुशी से भर गया।
यह दृश्य इस बात का उदाहरण बना कि उचित सहयोग और अवसर मिलने पर हर बच्चा अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर सकता है।

दिव्यांग बच्चों ने किया ट्री क्लाइम्बिंग का साहसिक प्रयास
कार्यक्रम में ट्री क्लाइम्बिंग गतिविधि भी आयोजित की गई। सुरक्षा व्यवस्था के बीच कुछ दिव्यांग बच्चों ने भी पेड़ों पर चढ़ने का साहसिक प्रयास किया। इस गतिविधि ने बच्चों में आत्मविश्वास, साहस और चुनौतियों का सामना करने की भावना को मजबूत किया।

समावेशी पर्यावरण प्रश्नोत्तरी का आयोजन
बच्चों के लिए पर्यावरण संरक्षण, वन, वन्यजीव, जैव विविधता और पक्षियों से संबंधित प्रश्नोत्तरी भी आयोजित की गई। श्रवण एवं वाक दिव्यांग बच्चों की सहभागिता सुनिश्चित करने के लिए सांकेतिक भाषा शिक्षक ने प्रश्नों का अनुवाद किया और बच्चों ने सांकेतिक भाषा में उत्तर दिए। इससे यह संदेश मिला कि उचित सहयोग मिलने पर संवाद कभी बाधा नहीं बनता।

बच्चों ने साझा किए अपने अनुभव
कार्यक्रम के अंत में बच्चों ने दिनभर के अनुभव साझा किए। श्रवण एवं वाक दिव्यांग बच्चों ने भी सांकेतिक भाषा के माध्यम से अपने विचार व्यक्त किए, जिनका अनुवाद सभी प्रतिभागियों के लिए किया गया। बच्चों के आत्मविश्वास और उत्साह ने कार्यक्रम को यादगार बना दिया।

सेवा और सहयोग की मिसाल बने स्वयंसेवक
प्रतिभागियों के लिए अल्पाहार और भोजन की समुचित व्यवस्था की गई। भोजन दो चरणों में परोसा गया, जबकि वाईएचएआई के स्वयंसेवकों ने बच्चों और अभिभावकों की सहायता करते हुए सेवा, सहयोग और संवेदनशीलता का परिचय दिया।

यादगार रहा समावेशी प्रकृति अध्ययन भ्रमण
वाईएचएआई चंडीगढ़ राज्य शाखा का यह समावेशी प्रकृति अध्ययन भ्रमण केवल एक पिकनिक नहीं, बल्कि प्रकृति, सीख, आत्मविश्वास, मित्रता और समान अवसरों का संदेश देने वाला कार्यक्रम साबित हुआ। इस अवसर ने यह सिद्ध किया कि हर बच्चे में प्रतिभा और सपने होते हैं तथा दिव्यांगता, आर्थिक स्थिति या सामाजिक पृष्ठभूमि किसी भी बच्चे की प्रगति में बाधा नहीं बननी चाहिए। उचित सहयोग और समान अवसर उपलब्ध कराकर हर बच्चे को आगे बढ़ने का अवसर दिया जा सकता है।
कार्यक्रम का समापन बच्चों के मुस्कुराते चेहरों, नए मित्रों, बढ़े हुए आत्मविश्वास और प्रकृति से जुड़ी अविस्मरणीय यादों के साथ हुआ।

RAMESH GOYAT
Author: RAMESH GOYAT

With over 20 years of experience in Hindi journalism, Ramesh Goyat has served as District Bureau Chief in Kaithal and worked with the Haryana , Punjab , HP and UT Bureau in Chandigarh. Coming from a freedom fighter family, he is known for his fast, accurate, and credible reporting. Through Babugiri Hindi, he aims to deliver impartial and fact-based news to readers.

virender chahal

Our Visitor

3 8 2 5 5 0
Total Users : 382550
Total views : 621929

शहर चुनें