पेरिस में 25 जून को प्रस्तावित नीलामी पर रोक लगाने की मांग, दो फर्नीचर वस्तुओं की उत्पत्ति पर उठे सवाल
बाबूगिरी ब्यूरो
चंडीगढ़, 24 जून 2026: चंडीगढ़ प्रशासन ने फ्रांस के पेरिस में 25 जून 2026 को प्रस्तावित चंडीगढ़ से संबंधित विरासत फर्नीचर की नीलामी को रोकने के लिए भारत सरकार के विदेश मंत्रालय (MEA) से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। प्रशासन ने नीलामी में शामिल वस्तुओं की बरामदगी और उन्हें भारत वापस लाने के लिए कूटनीतिक स्तर पर कार्रवाई का आग्रह किया है।
विदेश मंत्रालय के संयुक्त सचिव (यूएनईएस) को भेजे गए पत्र में चंडीगढ़ प्रशासन के संस्कृति सचिव ने नीलामी के लिए रखी गई दो फर्नीचर वस्तुओं की उत्पत्ति और स्वामित्व को लेकर गंभीर चिंता जताई है। इन वस्तुओं पर “PU Chem/55” और “PGI/W/CH-020” अंकित है, जिससे इनके पंजाब विश्वविद्यालय और पीजीआईएमईआर चंडीगढ़ से जुड़े होने की संभावना जताई गई है।
प्रशासन का कहना है कि इन चिन्हों से आशंका उत्पन्न होती है कि यह विरासत फर्नीचर संभवतः बिना अनुमति के अपने मूल स्थानों से हटाकर विदेश भेजा गया हो सकता है। यह मामला केवल फर्नीचर की बिक्री तक सीमित नहीं बल्कि चंडीगढ़ की ऐतिहासिक और स्थापत्य विरासत से जुड़ा गंभीर विषय है।
चंडीगढ़ का कैपिटल कॉम्प्लेक्स यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल है। इसे महान वास्तुकार ले कोर्बुज़िए और उनके सहयोगियों की आधुनिक वास्तुकला की उत्कृष्ट कृति माना जाता है। प्रशासन ने कहा कि इस विरासत से जुड़े मूल फर्नीचर का संरक्षण राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सांस्कृतिक महत्व रखता है।
प्रशासन ने विदेश मंत्रालय को बताया कि विदेशी नीलामी बाजार में चंडीगढ़ की विरासत वस्तुओं का सामने आना संभावित चोरी, अवैध तरीके से हटाने, अनधिकृत बिक्री और सांस्कृतिक संपत्ति के अवैध निर्यात जैसी आशंकाओं को जन्म देता है। इससे शहर की ऐतिहासिक पहचान और भारत की सांस्कृतिक धरोहर को नुकसान पहुंच सकता है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए चंडीगढ़ पुलिस ने 23 जून 2026 को भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं के तहत दो एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस द्वारा कथित चोरी, अवैध तरीके से हटाने, निर्यात, बिक्री और तस्करी की संभावनाओं की जांच की जा रही है।
चंडीगढ़ प्रशासन ने विदेश मंत्रालय से आग्रह किया है कि वह फ्रांस स्थित भारतीय दूतावास और संबंधित फ्रांसीसी अधिकारियों के साथ मामला उठाकर नीलामी को तत्काल स्थगित या रद्द करवाए। साथ ही जांच पूरी होने तक फर्नीचर को सुरक्षित रखने, स्वामित्व और उत्पत्ति के दस्तावेजों की जांच तथा वस्तुओं की भारत वापसी सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएं।
प्रशासन ने कहा है कि चंडीगढ़ की सांस्कृतिक और स्थापत्य विरासत की सुरक्षा के लिए सभी आवश्यक दस्तावेज, रिकॉर्ड और तकनीकी सहायता उपलब्ध कराई जाएगी तथा विरासत संपत्तियों की वापसी के लिए हर संभव प्रयास किए जाएंगे।












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