50 एकड़ प्रतिबंधित जमीन की फर्जी रजिस्ट्री मामले में ACB की बड़ी कार्रवाई
सुप्रीम कोर्ट की रोक के बावजूद हुई थी जमीन की खरीद-फरोख्त, सात दिन के पुलिस रिमांड पर भेजा आरोपी; रिश्वत और वित्तीय लेनदेन की होगी जांच
रमेश गोयत
पंचकूला। रायपुररानी में पर्ल्स ग्रुप (पीजीएफ/पीएसीएल) की प्रतिबंधित जमीन की कथित फर्जी रजिस्ट्री के बहुचर्चित मामले में एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (एचएसवीपी) के जिला राजस्व अधिकारी (डीआरओ) जोगिंदर शर्मा को दिल्ली से गिरफ्तार कर लिया। आरोपी लंबे समय से जांच एजेंसी की निगरानी में था और गिरफ्तारी से बचने का प्रयास कर रहा था। मंगलवार को उसे अदालत में पेश किया गया, जहां से सात दिन के पुलिस रिमांड पर भेज दिया गया।
एसीबी के अनुसार, जोगिंदर शर्मा के दिल्ली में छिपे होने की सूचना मिलने के बाद विशेष टीम ने कार्रवाई करते हुए उसे गिरफ्तार किया। गिरफ्तारी के बाद आरोपी को पंचकूला लाया गया और सेक्टर-6 स्थित नागरिक अस्पताल में उसका मेडिकल परीक्षण कराया गया। इसके बाद अदालत में पेश कर पुलिस रिमांड हासिल किया गया।
तत्कालीन तहसीलदार की पूछताछ में सामने आया था नाम
जांच एजेंसी के मुताबिक, इस मामले में पहले गिरफ्तार किए जा चुके रायपुररानी के तत्कालीन तहसीलदार विक्रम सिंगला से पूछताछ के दौरान जोगिंदर शर्मा का नाम सामने आया था। इसके बाद एसीबी ने उसे जांच में शामिल किया, लेकिन बाद में वह फरार हो गया। गिरफ्तारी से बचने के लिए उसने अदालत में अग्रिम जमानत याचिका भी दायर की थी, जिसे खारिज कर दिया गया।
सुप्रीम कोर्ट की रोक के बावजूद हुई फर्जी रजिस्ट्रियां
एसीबी की प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि पीजीएफ और पीएसीएल (पर्ल्स ग्रुप) से जुड़ी करीब 172 एकड़ जमीन रायपुररानी और शाहपुर क्षेत्र में विभिन्न लोगों के नाम दर्ज थी। इस जमीन की खरीद-फरोख्त पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा रोक लगाए जाने के बावजूद कथित रूप से अधिकारियों और निजी व्यक्तियों की मिलीभगत से लगभग 50 एकड़ प्रतिबंधित जमीन की फर्जी रजिस्ट्रियां कर दी गईं।
जांच एजेंसी का आरोप है कि पूरे मामले में सरकारी अधिकारियों, बिचौलियों और निजी व्यक्तियों की मिलीभगत से प्रतिबंधित जमीन का अवैध हस्तांतरण किया गया, जिससे नियमों की खुली अनदेखी हुई।
रिश्वत और वित्तीय लेनदेन की होगी गहन जांच
एसीबी अब सात दिन के पुलिस रिमांड के दौरान आरोपी से पूछताछ कर कथित जमीन सौदे में हुए वित्तीय लेनदेन, रिश्वत के आरोपों, फर्जी दस्तावेजों की तैयारी और इस पूरे नेटवर्क में शामिल अन्य लोगों की भूमिका की जांच करेगी। जांच एजेंसी का कहना है कि मामले में अभी कई अन्य आरोपी भी रडार पर हैं और उनकी गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी की जा रही है।
एसीबी अधिकारियों का मानना है कि रिमांड के दौरान पूछताछ से जमीन घोटाले से जुड़े कई अहम खुलासे हो सकते हैं, जिससे इस पूरे नेटवर्क में शामिल अन्य लोगों तक पहुंचने में मदद मिलेगी।












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