बाबूगिरी हिन्दी ब्यूरो
चंडीगढ़, 1 अगस्त 2026: हरियाणा में पुलिस सुधारों को लेकर लागू किए गए हरियाणा पुलिस (संशोधन) अधिनियम, 2014 को शनिवार को 12 वर्ष पूरे हो गए। हालांकि, कानून में स्पष्ट प्रावधान होने के बावजूद राज्य सरकार अब तक एक भी जिला पुलिस शिकायत प्राधिकरण (District Police Complaints Authority) का गठन नहीं कर सकी है। इस मुद्दे पर पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के अधिवक्ता एवं कानूनी-प्रशासनिक मामलों के जानकार हेमंत कुमार ने सवाल उठाते हुए कहा कि जिला स्तर पर शिकायत प्राधिकरणों का गठन न होना पुलिस जवाबदेही की व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न है।
हेमंत कुमार ने बताया कि 1 अगस्त 2014 से प्रभावी हरियाणा पुलिस (संशोधन) अधिनियम, 2014 के तहत प्रत्येक जिले अथवा एक से अधिक जिलों के लिए संयुक्त जिला पुलिस शिकायत प्राधिकरण गठित करने का स्पष्ट कानूनी प्रावधान किया गया था। इसके बावजूद 12 वर्षों में एक भी जिला प्राधिकरण अस्तित्व में नहीं आया।
2014 में बहु-सदस्यीय प्राधिकरण का हुआ था प्रावधान
उन्होंने बताया कि तत्कालीन भूपेंद्र सिंह हुड्डा सरकार ने हरियाणा पुलिस अधिनियम, 2007 में संशोधन कर राज्य और जिला पुलिस शिकायत प्राधिकरणों को एक सदस्यीय के बजाय बहु-सदस्यीय बनाने का प्रावधान किया था। संशोधन के अनुसार प्रत्येक प्राधिकरण में चेयरपर्सन के अलावा अधिकतम तीन सदस्य नियुक्त किए जा सकते हैं। साथ ही आवश्यकता पड़ने पर एक से अधिक जिलों के लिए संयुक्त जिला प्राधिकरण गठित करने का भी प्रावधान रखा गया।
राज्य प्राधिकरण का गठन हुआ, जिला स्तर अब भी खाली
हेमंत कुमार ने बताया कि अगस्त 2025 में सेवानिवृत्त आईपीएस अधिकारी डॉ. आर.सी. मिश्रा को हरियाणा राज्य पुलिस शिकायत प्राधिकरण का चेयरपर्सन नियुक्त किया गया। इसके बाद सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी ललित सिवाच और सुमेधा कटारिया को सदस्य बनाया गया। हालांकि, डॉ. मिश्रा की नियुक्ति को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है। याचिका में सुप्रीम कोर्ट के प्रकाश सिंह बनाम भारत संघ (2006) फैसले का हवाला देते हुए कहा गया है कि राज्य पुलिस शिकायत प्राधिकरण का अध्यक्ष हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट का सेवानिवृत्त न्यायाधीश होना चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट ने 20 वर्ष पहले दिए थे निर्देश
हेमंत कुमार के अनुसार, सितंबर 2006 में सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस सुधारों पर ऐतिहासिक निर्णय देते हुए सभी राज्यों को राज्य और जिला—दोनों स्तरों पर पुलिस शिकायत प्राधिकरण गठित करने का निर्देश दिया था। अदालत ने कहा था कि राज्य प्राधिकरण एसपी और उससे ऊपर के अधिकारियों के खिलाफ शिकायतों की सुनवाई करेगा, जबकि जिला प्राधिकरण डीएसपी और उससे नीचे के अधिकारियों के मामलों की जांच करेगा।
उन्होंने कहा कि हरियाणा पुलिस अधिनियम में सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पूरी तरह पालन नहीं किया गया। राज्य में जिला प्राधिकरण को डीएसपी तक नहीं, बल्कि केवल इंस्पेक्टर रैंक तक के पुलिसकर्मियों के खिलाफ गंभीर शिकायतों की जांच का अधिकार दिया गया है।
2026 में कानून में संशोधन, फिर भी गठन नहीं
हेमंत कुमार ने बताया कि हरियाणा विधानसभा ने मार्च 2026 के बजट सत्र में हरियाणा पुलिस (संशोधन) अधिनियम, 2026 पारित किया, जो 5 मई 2026 से लागू हुआ। इसके तहत अधिनियम की धारा 68-सी में संशोधन कर जिला पुलिस शिकायत प्राधिकरण के अधिकारों और कार्यप्रणाली को स्पष्ट किया गया।
नई व्यवस्था के अनुसार जिला प्राधिकरण:
स्वतः संज्ञान लेकर जांच कर सकेगा।
पीड़ित या उसकी ओर से किसी अन्य व्यक्ति द्वारा शपथ-पत्र के साथ दी गई शिकायत पर कार्रवाई करेगा।
राष्ट्रीय या राज्य मानवाधिकार आयोग से प्राप्त शिकायतों की जांच करेगा।
शिकायत मिलने के छह माह के भीतर निर्णय देगा।
इसके अलावा गुमनाम या छद्म नाम से भेजी गई शिकायतों पर कार्रवाई नहीं होगी। अदालत में लंबित मामलों, विभिन्न आयोगों के समक्ष विचाराधीन मामलों, तीन वर्ष से अधिक पुराने मामलों तथा अवैध जमाव, धरना-प्रदर्शन, सड़क अवरोध या आवश्यक सेवाओं में व्यवधान के दौरान पुलिस बल प्रयोग से जुड़े मामलों को इसके अधिकार क्षेत्र से बाहर रखा गया है।
2021 से राज्य प्राधिकरण ही संभाल रहा जिला स्तर का काम
हेमंत कुमार ने बताया कि सितंबर 2021 में हरियाणा सरकार ने आदेश जारी कर राज्य पुलिस शिकायत प्राधिकरण को ही जिला पुलिस शिकायत प्राधिकरणों का कार्यभार भी सौंप दिया था। यानी वही अब इंस्पेक्टर रैंक तक के पुलिसकर्मियों के विरुद्ध शिकायतों की सुनवाई कर रहा है।
उन्होंने कहा कि जब कानून में अलग से जिला पुलिस शिकायत प्राधिकरण गठित करने का स्पष्ट प्रावधान मौजूद है, तब राज्य स्तर के प्राधिकरण से ही जिला स्तर का कार्य कराना विधायी मंशा के अनुरूप नहीं माना जा सकता।
मुख्य बिंदु
1 अगस्त 2014 से हरियाणा पुलिस (संशोधन) अधिनियम लागू।
12 वर्ष बाद भी राज्य में एक भी जिला पुलिस शिकायत प्राधिकरण का गठन नहीं।
मार्च 2026 में जिला प्राधिकरण के अधिकारों में संशोधन किया गया।
शिकायतों के निस्तारण के लिए 6 माह की समय-सीमा तय।
सितंबर 2021 से राज्य पुलिस शिकायत प्राधिकरण ही जिला स्तर का कार्य भी संभाल रहा है।













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