बाबूगिरी हिंदी ब्यूरो
चंडीगढ़, 5 अगस्त। देश की सबसे आधुनिक, अनुशासित और प्रोफेशनल पुलिस फोर्स में शुमार चंडीगढ़ पुलिस इन दिनों एक के बाद एक सामने आ रहे विवादों के कारण कठघरे में खड़ी नजर आ रही है। पिछले कुछ महीनों में भ्रष्टाचार, रिश्वतखोरी, हाई-प्रोफाइल आरोपियों को कथित संरक्षण और ट्रैफिक पुलिस पर अवैध वसूली जैसे मामलों ने विभाग की छवि पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब एक नया मामला सामने आया है, जिसमें एक पुलिस अधिकारी पर हर महीने एक लाख रुपये की कथित ‘मंथली’ और दो पेटी महंगी विदेशी शराब मांगने के आरोप लगे हैं। मामले में शिकायत और कथित साक्ष्य मिलने के बाद सीबीआई ने अपनी रिपोर्ट यूटी पुलिस प्रमुख (डीजीपी) को भेजते हुए संबंधित अधिकारी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की सिफारिश की है।
बताया जा रहा है कि शिकायतकर्ता ने सीबीआई को कथित ऑडियो रिकॉर्डिंग और अन्य साक्ष्य उपलब्ध कराए थे। आरोप है कि संबंधित पुलिस अधिकारी लंबे समय से एक शराब कारोबारी से हर महीने नकदी और विदेशी शराब की मांग करता था। फिलहाल मामले में विभागीय स्तर पर कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू होने की बात सामने आई है। हालांकि, आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा।
सीबीआई की लगातार कार्रवाई से बढ़ी चिंता
चंडीगढ़ पुलिस पर सवाल केवल इस मामले तक सीमित नहीं हैं। हाल के दिनों में भ्रष्टाचार के मामलों में सीबीआई की लगातार कार्रवाई ने भी विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं।
दो दिन पहले सीबीआई ने बड़ी कार्रवाई करते हुए चंडीगढ़ पुलिस के एक इंस्पेक्टर और एक एएसआई को 2.50 लाख रुपये की कथित रिश्वत लेते गिरफ्तार किया। आरोप है कि दोनों अधिकारियों ने एक मामले में राहत देने के बदले रिश्वत की मांग की थी। कार्रवाई के बाद दोनों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया।
इस कार्रवाई ने यह संदेश भी दिया कि भ्रष्टाचार के मामलों में जांच एजेंसियां लगातार नजर बनाए हुए हैं और शिकायत मिलने पर कार्रवाई की जा रही है।
आईडीएफसी बैंक घोटाले के आरोपी की होटल में ‘खातिरदारी’ का मामला
चंडीगढ़ पुलिस को सबसे बड़ा झटका हाल ही में सामने आए आईडीएफसी बैंक घोटाले के आरोपी विक्रम वधवा मामले से लगा।
आरोप है कि पेशी के बाद आरोपी को सीधे जेल ले जाने के बजाय होटल ले जाया गया, जहां उसकी कथित तौर पर खातिरदारी की जा रही थी। सूचना मिलने पर डीएसपी पूनम दिलावरी के नेतृत्व में पुलिस टीम ने होटल में छापा मारा और आरोपी विक्रम वधवा, उसके दो बेटों तथा ड्यूटी पर मौजूद दो पुलिस कर्मियों को गिरफ्तार कर लिया। मामले में एफआईआर दर्ज कर विभागीय जांच भी शुरू कर दी गई है।
इस घटना ने पुलिस की सुरक्षा व्यवस्था और कैदियों की निगरानी प्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
ट्रैफिक पुलिस पर भी लगते रहे हैं आरोप
चंडीगढ़ ट्रैफिक पुलिस भी समय-समय पर विवादों में रही है। बाहरी राज्यों के नंबर वाली गाड़ियों को ट्रैफिक नियम उल्लंघन के नाम पर रोककर कथित अवैध वसूली करने के आरोप कई बार सामने आए हैं।
हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और पुलिस विभाग हमेशा ऐसे आरोपों से इनकार करता रहा है। विभाग का कहना है कि यदि किसी कर्मचारी के खिलाफ ठोस शिकायत या प्रमाण मिलते हैं तो निष्पक्ष जांच के बाद नियमानुसार कार्रवाई की जाती है।
एक के बाद एक मामलों से प्रभावित हुई छवि
पिछले कुछ महीनों में सामने आए घटनाक्रमों को देखें तो चंडीगढ़ पुलिस के कई अधिकारी और कर्मचारी अलग-अलग मामलों में जांच के दायरे में आए हैं। रिश्वतखोरी, भ्रष्टाचार, आरोपियों को कथित संरक्षण और अनुशासनहीनता से जुड़े मामलों ने जनता के बीच पुलिस की विश्वसनीयता को लेकर बहस तेज कर दी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी पुलिस संगठन की सबसे बड़ी ताकत जनता का विश्वास होता है। ऐसे में यदि भ्रष्टाचार या अनियमितता के आरोप लगातार सामने आते हैं तो उनका प्रभाव पूरे विभाग की छवि पर पड़ता है, भले ही अधिकांश अधिकारी ईमानदारी से अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हों।
जवाबदेही और पारदर्शिता की बढ़ी मांग
लगातार सामने आ रहे मामलों के बाद सामाजिक संगठनों और कई जनप्रतिनिधियों ने पुलिस विभाग में जवाबदेही और निगरानी व्यवस्था को और मजबूत करने की मांग की है। उनका कहना है कि भ्रष्टाचार के मामलों में त्वरित और निष्पक्ष कार्रवाई ही जनता का विश्वास बनाए रख सकती है।
वहीं, पुलिस अधिकारियों का कहना है कि विभाग में भ्रष्टाचार के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई गई है और किसी भी अधिकारी या कर्मचारी को कानून से ऊपर नहीं माना जाएगा। यदि किसी के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य मिलते हैं तो उसके विरुद्ध विभागीय और कानूनी कार्रवाई की जाती है।











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