CBI ने सरकारी धन के दुरुपयोग में बताई अहम भूमिका
रमेश गोयत
पंचकूला, 6 अगस्त। हरियाणा के बहुचर्चित करीब ₹560 करोड़ के बैंक घोटाला मामले में गिरफ्तार आईएएस अधिकारी पंकज अग्रवाल को बड़ा झटका लगा है। पंचकूला स्थित विशेष सीबीआई अदालत ने उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी है। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद यह फैसला सुनाया।
सुनवाई के दौरान पंकज अग्रवाल की ओर से अदालत में दलील दी गई कि उन्होंने केवल सरकारी विभागों के बैंक खातों को एक बैंक से दूसरे बैंक में स्थानांतरित करने की प्रशासनिक मंजूरी दी थी। बचाव पक्ष का कहना था कि उन्होंने किसी प्रकार का अवैध लाभ नहीं लिया और उनके खिलाफ किसी भी वित्तीय लाभ या प्रत्यक्ष संलिप्तता का कोई ठोस साक्ष्य मौजूद नहीं है।
वहीं, केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने जमानत का कड़ा विरोध करते हुए अदालत को बताया कि मामला केवल बैंक बदलने की मंजूरी तक सीमित नहीं है। जांच एजेंसी के अनुसार, पंकज अग्रवाल की स्वीकृति से सरकारी विभागों के खाते नियमों की अनदेखी करते हुए आईडीएफसी फर्स्ट बैंक में खोले गए। इसके बाद सरकारी धन का कथित तौर पर फर्जी लेनदेन के माध्यम से डायवर्जन किया गया।
सीबीआई ने अदालत में दावा किया कि इस पूरी साजिश में पंकज अग्रवाल की महत्वपूर्ण भूमिका रही और वे मुख्य आरोपी के संपर्क में भी थे। एजेंसी का कहना है कि जांच के दौरान ऐसे साक्ष्य सामने आए हैं, जिनसे संकेत मिलता है कि सरकारी धन के कथित दुरुपयोग और डायवर्जन की जानकारी होने के बावजूद आवश्यक कार्रवाई नहीं की गई।
जांच एजेंसी ने यह भी बताया कि मामले की जांच अभी जारी है। आरोपियों के बीच हुए वित्तीय लेनदेन, धन के प्रवाह और अन्य संबंधित पहलुओं की गहन पड़ताल की जा रही है। ऐसे में इस स्तर पर जमानत दिए जाने से जांच प्रभावित हो सकती है।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद विशेष सीबीआई अदालत ने पंकज अग्रवाल की जमानत याचिका खारिज कर दी।
उल्लेखनीय है कि हरियाणा के इस बहुचर्चित करीब ₹560 करोड़ के बैंक घोटाले की जांच सीबीआई कर रही है। मामले में कई आरोपियों से पूछताछ की जा चुकी है और जांच एजेंसी लगातार नए साक्ष्य जुटाने में लगी हुई है।











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