बाबूगिरी हिंदी ब्यूरो
मोहाली, 6 अगस्त। केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने अमेरिका के नागरिकों को निशाना बनाकर करोड़ों रुपये की ठगी और उगाही करने वाले अंतरराष्ट्रीय टेक सपोर्ट फ्रॉड रैकेट का पर्दाफाश करते हुए चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। यह गिरोह पंजाब और दिल्ली में फर्जी कॉल सेंटर एवं कार्यालय संचालित कर विदेशी नागरिकों को साइबर ठगी का शिकार बना रहा था।
सीबीआई के अनुसार, गिरोह का सरगना और उसके साथी स्वयं को माइक्रोसॉफ्ट, वित्तीय संस्थानों तथा कानून प्रवर्तन एजेंसियों का प्रतिनिधि बताकर मुख्य रूप से अमेरिका के नागरिकों से संपर्क करते थे। आरोपी कंप्यूटर स्क्रीन पर फर्जी पॉप-अप और नकली माइक्रोसॉफ्ट टोल-फ्री नंबर दिखाकर पीड़ितों को अपने कॉल सेंटर से जोड़ते थे। इसके बाद सिस्टम ठीक करने के नाम पर उनसे बड़ी रकम वसूल की जाती थी।
जांच में यह भी सामने आया कि कई मामलों में पीड़ितों को बाल अश्लीलता जैसे गंभीर अपराधों में फंसाने की झूठी धमकी देकर क्रिप्टोकरेंसी एटीएम के माध्यम से फिरौती जमा कराई जाती थी। ठगी से प्राप्त राशि को विभिन्न क्रिप्टो वॉलेट्स के जरिए अमेरिका से बाहर भेजा जाता था और बाद में दिल्ली स्थित ऑपरेटरों के माध्यम से मनी लॉन्ड्रिंग की जाती थी।
सीबीआई ने 5 और 6 अगस्त की दरम्यानी रात पंजाब और दिल्ली में 10 स्थानों पर एक साथ छापेमारी की। मोहाली स्थित मुख्य आरोपी के फर्जी कॉल सेंटर पर भी कार्रवाई की गई। तलाशी के दौरान 20 से अधिक मोबाइल फोन, 15 लैपटॉप एवं टैबलेट, कई हार्ड डिस्क, पेन ड्राइव, मेमोरी कार्ड, भारी मात्रा में नकदी, क्रिप्टो वॉलेट और अन्य आपत्तिजनक दस्तावेज बरामद किए गए। मुख्य आरोपी सहित चार लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया है। मामले की आगे की जांच जारी है।
सीबीआई ने बताया कि वर्ष 2022 में फ्लोरिडा (अमेरिका) की एक महिला को झांसा देकर लगभग 4.40 लाख अमेरिकी डॉलर बिटकॉइन एटीएम के माध्यम से जमा करवाए गए थे। वहीं वर्ष 2023 में न्यू जर्सी की एक अन्य महिला से इसी तरीके से करीब 1.30 लाख अमेरिकी डॉलर की ठगी की गई। दोनों मामलों में धनराशि आरोपियों के नियंत्रण वाले क्रिप्टो वॉलेट्स तक पहुंचाई गई।













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