भ्रष्टाचार के मामलों के बीच जारी हुआ आदेश
बाबूगिरी हिंदी ब्यूरो
चंडीगढ़/रोहतक, 7 अगस्त। हरियाणा सरकार ने भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरे नायब तहसीलदार शिवराज सिंह के खिलाफ बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई करते हुए उन्हें सरकारी सेवा से समयपूर्व (Premature Retirement) सेवानिवृत्त कर दिया है। सरकार ने यह निर्णय हरियाणा सिविल सेवा (जनरल) नियम, 2016 के नियम 144 एवं 145 के तहत जनहित में लिया है। यह आदेश 30 जुलाई 2026 को जारी किया गया, जबकि इसकी प्रतिलिपि 5 अगस्त 2026 को संबंधित विभागों को भेजी गई।
सरकार द्वारा जारी कार्यालय आदेश में कहा गया है कि सक्षम प्राधिकारी ने शिवराज सिंह के संपूर्ण सेवा रिकॉर्ड की समीक्षा करने के बाद यह राय बनाई कि जनहित में उन्हें 58 वर्ष की आयु पूरी होने से पहले ही सरकारी सेवा से हटाया जाना आवश्यक है। आदेश के अनुसार उन्हें तीन माह के वेतन एवं भत्तों के भुगतान के साथ नोटिस अवधि के स्थान पर तत्काल प्रभाव से सेवानिवृत्त किया गया है।

भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों के बाद कार्रवाई
शिवराज सिंह का नाम हाल के दिनों में कई विवादों और भ्रष्टाचार के मामलों में सामने आया था। भ्रष्टाचार निरोधक एजेंसियों द्वारा उनके खिलाफ जांच की जा रही थी। आरोप थे कि भूमि एवं राजस्व से जुड़े मामलों में अनियमितताएं और भ्रष्टाचार किया गया। इन मामलों के सामने आने के बाद सरकार ने उनके सेवा रिकॉर्ड की समीक्षा कर यह कठोर फैसला लिया।
सूत्रों के अनुसार, सरकार ने केवल लंबित मामलों को ही नहीं बल्कि उनके पूरे सेवा रिकॉर्ड, कार्यशैली और सार्वजनिक हित पर पड़ने वाले प्रभाव का भी मूल्यांकन किया। इसी आधार पर उन्हें समयपूर्व सेवानिवृत्त करने का निर्णय लिया गया।
आदेश में क्या कहा गया
अतिरिक्त मुख्य सचिव (शहरी संपदा विभाग) अनुराग अग्रवाल द्वारा जारी आदेश में स्पष्ट किया गया है कि:
सक्षम प्राधिकारी ने सेवा रिकॉर्ड की समीक्षा की।
जनहित में समयपूर्व सेवानिवृत्ति आवश्यक पाई गई।
हरियाणा सिविल सेवा (जनरल) नियम, 2016 के नियम 144 एवं 145 के तहत कार्रवाई की गई।
तीन माह के वेतन एवं भत्तों का भुगतान कर तत्काल प्रभाव से सेवा समाप्त कर दी गई।
आदेश के बाद शिवराज सिंह सरकारी सेवा में नहीं रहेंगे।
सरकार का सख्त संदेश
हरियाणा सरकार की यह कार्रवाई प्रशासनिक तंत्र में भ्रष्टाचार के खिलाफ कड़ा संदेश मानी जा रही है। सरकार पहले भी भ्रष्टाचार और खराब सेवा रिकॉर्ड वाले अधिकारियों के खिलाफ समयपूर्व सेवानिवृत्ति जैसे प्रावधानों का उपयोग कर चुकी है। माना जा रहा है कि भविष्य में भी ऐसे मामलों में इसी प्रकार की कार्रवाई जारी रह सकती है।
सरकारी अधिकारियों का कहना है कि जनहित सर्वोपरि है और जिन अधिकारियों का सेवा रिकॉर्ड संतोषजनक नहीं पाया जाएगा या जिन पर गंभीर आरोप होंगे, उनके विरुद्ध नियमों के तहत कठोर कार्रवाई की जाएगी।













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