October 12, 2026 12:37 pm

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चंडीगढ़: 18 साल की सुरिंदर कौर ने मौत के बाद भी दी जिंदगी की सौगात, अंगदान से चार लोगों को मिली नई उम्मीद

एक किडनी और अग्न्याशय का 31 वर्षीय मरीज में सफल संयुक्त प्रत्यारोपण, दूसरी किडनी 15 वर्षीय मरीज को दी गई; दो मरीजों को कॉर्निया से मिलेगी रोशनी

रमेश गोयत
चंडीगढ़, 26 अगस्त 2026। जिंदगी भले ही 18 साल की उम्र में थम गई, लेकिन सुरिंदर कौर अपने पीछे ऐसी अमिट विरासत छोड़ गईं, जो कई लोगों के जीवन में हमेशा जीवित रहेगी। पंजाब के मोहाली जिले के खरड़ स्थित गांव तेउर की रहने वाली 18 वर्षीय सुरिंदर कौर की सड़क दुर्घटना के बाद मृत्यु हो गई। दुख की इस घड़ी में उनके परिवार ने अंगदान का साहसिक फैसला लेकर चार लोगों के जीवन में नई उम्मीद जगा दी।
सुरिंदर कौर को 23 अगस्त 2026 को सड़क दुर्घटना के बाद पीजीआईएमईआर, चंडीगढ़ में भर्ती कराया गया था। उपचार के दौरान उन्हें गंभीर और अपरिवर्तनीय न्यूरोलॉजिकल क्षति हुई। सभी निर्धारित चिकित्सा प्रोटोकॉल और आवश्यक परीक्षण पूरे किए जाने के बाद 25 अगस्त को ब्रेन स्टेम डेथ कमेटी ने उन्हें ब्रेन स्टेम डेड घोषित किया।
इसके बाद सुरिंदर कौर की मां  संतोष कौर और निकटतम परिजनों ने उनके अंग एवं ऊतक दान करने की सहमति दी। परिवार के इस निर्णय से उनकी दोनों किडनियां, अग्न्याशय और कॉर्निया दान किए जा सके।
पीजीआईएमईआर के निदेशक प्रो. विवेक लाल ने दाता परिवार के निर्णय की सराहना करते हुए कहा कि अंगदान मानवता की महान अभिव्यक्तियों में से एक है। उन्होंने कहा कि जिस समय परिवार खुद गहरे दुख से गुजर रहा था, उस समय दूसरों के जीवन में उम्मीद जगाने का निर्णय असाधारण साहस और मानवीय संवेदना का परिचायक है।
सुरिंदर कौर की मां संतोष कौर ने कहा कि परिवार अपनी बेटी को वापस नहीं ला सकता, लेकिन यदि उसका कोई हिस्सा किसी दूसरे के जीवन में जीवित रह सके तो उसके जीवन का अर्थ बना रहेगा। उन्होंने उम्मीद जताई कि उनकी बेटी के अंग प्राप्त करने वाले लोग स्वस्थ और खुशहाल जीवन जिएंगे।

31 वर्षीय मरीज का 13 घंटे चला जटिल किडनी-अग्न्याशय प्रत्यारोपण
दान किए गए अंगों में से एक किडनी और अग्न्याशय को 31 वर्षीय पुरुष मरीज में एक साथ प्रत्यारोपित किया गया। इसे सिमल्टेनियस पैंक्रियाज-किडनी (एसपीके) प्रत्यारोपण कहा जाता है। दूसरी किडनी का 15 वर्षीय मरीज में सफल प्रत्यारोपण किया गया। वहीं दोनों कॉर्निया दो मरीजों को दृष्टि प्रदान करने में मदद करेंगे।
पीजीआईएमईआर के नेफ्रोलॉजी विभाग के प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष प्रो. एच.एस. कोहली ने बताया कि दोनों मरीज लंबे समय से डायलिसिस पर थे। अंग उपलब्ध होने के बाद प्राप्तकर्ता मरीजों का तेजी से चिकित्सकीय मूल्यांकन किया गया। इम्यूनोलॉजिकल अनुकूलता सहित कई महत्वपूर्ण चिकित्सा मानकों की जांच के बाद उन्हें प्रत्यारोपण के लिए तैयार किया गया।
रीनल ट्रांसप्लांट सर्जरी विभाग के प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष प्रो. आशीष शर्मा ने बताया कि 31 वर्षीय मरीज का एसपीके प्रत्यारोपण बेहद जटिल था। सात वर्ष पहले मरीज की मां द्वारा दान की गई किडनी का प्रत्यारोपण विफल हो चुका था। इसके अलावा दोनों पैरों और ऊपरी अंगों की प्रमुख नसों में रुकावट के कारण डायलिसिस के विकल्प भी सीमित हो गए थे।
सर्जरी के दौरान नई किडनी और अग्न्याशय के प्रत्यारोपण के साथ पहले से मौजूद विफल किडनी को निकालना और इलियक वेन की मरम्मत भी करनी पड़ी। करीब 13 घंटे तक चली इस चार चरणों वाली जटिल सर्जरी को सफलतापूर्वक पूरा किया गया। पूरी प्रक्रिया में विभिन्न चिकित्सा टीमों ने लगभग 18 घंटे तक लगातार काम किया।

परिवार को अंगदान के लिए तैयार करने में रिश्तेदार ने निभाई अहम भूमिका
पीजीआईएमईआर के ट्रांसप्लांट कोऑर्डिनेटर डॉ. नवदीप बंसल ने कहा कि किसी प्रियजन की मृत्यु के तुरंत बाद परिवार से अंगदान की सहमति लेना बेहद संवेदनशील प्रक्रिया होती है। इस मामले में पीजीआईएमईआर में कार्यरत और परिवार के रिश्तेदार श्री सुरजीत सिंह ने भी परिवार को अंगदान के महत्व को समझाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
रोटो नॉर्थ, पीजीआईएमईआर के नोडल अधिकारी डॉ. विजय टाडिया ने कहा कि इस पूरे मामले में संभावित अंगदाता की पहचान, ब्रेन स्टेम डेथ की घोषणा, परिवार की काउंसलिंग, सहमति, चिकित्सकीय जांच, अंगों की निकासी और प्रत्यारोपण तक कई स्तरों पर समन्वय की आवश्यकता थी। विभिन्न चिकित्सा टीमों के बेहतर तालमेल से यह संभव हो पाया।
पीजीआईएमईआर का रोटो नॉर्थ उत्तरी क्षेत्र में मृतक अंगदान को बढ़ावा देने के लिए अस्पताल नेटवर्किंग, क्षमता निर्माण, जागरूकता कार्यक्रमों, परामर्श, प्रशिक्षण और प्रत्यारोपण से जुड़े संस्थानों को सहयोग प्रदान कर रहा है।
सुरिंदर कौर अब इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन उनके अंगों से मिली नई जिंदगी और दृष्टि उनके जीवन की कहानी को आगे बढ़ाती रहेगी। उनका अंगदान यह संदेश देता है कि अत्यंत कठिन और दुखद परिस्थितियों में भी एक परिवार का मानवीय फैसला कई जिंदगियों के लिए उम्मीद और नई शुरुआत का कारण बन सकता है।

RAMESH GOYAT
Author: RAMESH GOYAT

With over 20 years of experience in Hindi journalism, Ramesh Goyat has served as District Bureau Chief in Kaithal and worked with the Haryana , Punjab , HP and UT Bureau in Chandigarh. Coming from a freedom fighter family, he is known for his fast, accurate, and credible reporting. Through Babugiri Hindi, he aims to deliver impartial and fact-based news to readers.

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